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This Article is From Jul 10, 2025

बिहार वोटर लिस्ट रिवीजन पर सुनवाई... SC ने आधार कार्ड पर क्या कहा? जानिए हर एक बात

निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने संविधान के अनुच्छेद 326 का हवाला देते हुए कहा कि प्रत्येक मतदाता को भारतीय नागरिक होना चाहिए और 'आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं है.'

बिहार वोटर लिस्ट रिवीजन पर सुनवाई... SC ने आधार कार्ड पर क्या कहा? जानिए हर एक बात
  • सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को जारी रखने की अनुमति दी है और चुनाव आयोग को आधार, वोटर आईडी तथा राशन कार्ड को शामिल करने पर विचार करने को कहा है।
  • न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि चुनाव आयोग का नागरिकता निर्धारण से कोई संबंध नहीं है, यह गृह मंत्रालय का क्षेत्राधिकार है।
  • चुनाव आयोग ने बताया कि आधार कार्ड केवल पहचान पत्र है और नागरिकता का प्रमाण नहीं है, इसलिए इसे मतदाता सूची रिवीजन में शामिल करने का निर्णय आयोग पर निर्भर करेगा।
नई दिल्ली:

बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने कहा कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण जारी रहेगा. लेकिन आयोग को आधार, वोटर आईडी और राशन कार्ड जैसे दस्तावेजों को शामिल करने पर विचार करना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग का यह कदम संविधान के अनुरूप है, लेकिन समय थोड़ा देर से आया है. अब इस सुनवाई में चुनाव आयोग ने आधार कार्ड को लेकर बड़ी बात कही है.

जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने बिहार में मतदाता गहन पुनरीक्षण के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई की. पूर्व अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने चुनाव आयोग की तरफ से पक्ष रखा, जबकि कपिल सिब्बल और गोपाल शंकर नारायण ने याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी.

न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण में दस्तावेजों की सूची में आधार कार्ड पर विचार न करने को लेकर सवाल किया और कहा कि निर्वाचन आयोग का किसी व्यक्ति की नागरिकता से कोई लेना-देना नहीं है और यह गृह मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है.

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'आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं'
निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने संविधान के अनुच्छेद 326 का हवाला देते हुए कहा कि प्रत्येक मतदाता को भारतीय नागरिक होना चाहिए और 'आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं है.'

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के सामने यह प्रस्ताव रखा है कि वह आधार, राशन कार्ड और वोटर आई कार्ड को भी मतदाता सूची में रिवीजन के दौरान व्यक्ति के पहचान के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं. लेकिन यह चुनाव आयोग पर निर्भर करेगा कि वह इसे स्वीकार करता है या नहीं. इस मसले पर कानूनी बहस अब 28 जुलाई को जारी रहेगी.

'आधार कार्ड नागरिकता नहीं साबित करता'
कपिल सिब्बल ने कहा कि BLO को यह अधिकार नहीं दिया जा सकता कि वह नागरिकता निर्धारित करे. तो इसपर चुनाव आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि 11 डॉक्यूमेंट की लिस्ट जो दी गई है वो Non Exhaustive लिस्ट है. हर डॉक्यूमेंट का अलग अलग उपयोग है. आधार कार्ड नागरिकता नहीं साबित करता. आधार एक्ट में लिखा हैं कि आधार कार्ड सिटिजनशिप या डोमिसाइल प्रूफ नहीं करता.

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कोर्ट ने कहा कि पहली नजर में उसकी राय है कि न्याय हित में चुनाव आयोग को बिहार में मतदाता सूचियों के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान आधार, राशन कार्ड और मतदाता पहचान पत्र जैसे दस्तावेजों को भी शामिल करने पर विचार करना चाहिए.

'ये केवल एक पहचान पत्र...'
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में 11 दस्तावेजों को मांगे जाने की वजह बताई. ईसी ने कहा, "जिन 11 दस्तावेजों को मांगा गया है, उनके पीछे एक उद्देश्य है. आधार कार्ड को आधार कार्ड एक्ट के तहत लाया गया है. 60 फीसदी लोगों ने अब तक फॉर्म भर दिया है।. अब तक आधे से अधिक फॉर्म को अपलोड भी कर दिया गया है. आधार कार्ड कभी भी नागरिकता का आधार नहीं हो सकता. ये केवल एक पहचान पत्र है. जाति प्रमाण पत्र आधार कार्ड पर निर्भर नहीं है. आधार केवल पहचान पत्र है, उससे ज्यादा कुछ नहीं."

70 प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाला किशनगंज जिले में आवासीय प्रमाण पत्र के लिए आवेदन के आंकड़े को लेकर राज्य के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने दावा किया कि सिर्फ 6 दिनों में 1.27 लाख लोगों ने आवासीय प्रमाण पत्र के लिए आवेदन दिया है. बड़ी संख्या में आवेदन घुसपैठियों की मौजूदगी का प्रमाण है और यह मामला राज्य की सुरक्षा और वोटर लिस्ट की शुद्धता से जुड़ा हुआ है.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर भाजपा प्रवक्ता कुंतल कृष्ण ने कहा कि SC ने स्पष्ट निर्देश दे दिया कि बिहार में विशेष पुनर्निरीक्षण जारी रहेगा. यह विपक्ष के मुंह पर कड़ा संवैधानिक तमाचा है. अब विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ हर बार अपनी हार का ठीकरा फोड़ने वाला रोना धोना छोड़े और इस पूरी प्रक्रिया में इलेक्शन कमीशन का साथ दें.

याचिकाकर्ता योगेंद्र यादव ने कहा कि अब बिहार में SIR की पूरी प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट की मॉनिटरिंग होगी. अब कोर्ट की निगाह इलेक्टरल रोल के रिवीजन की प्रक्रिया होगी. हमें आज पहली बड़ी जीत मिली है. हमने अपनी याचिका में कहा था कि चुनाव आयोग इलेक्टरल रोल को जिस तरह से रिवीजन कर रहा है. वह वोट बंदी है. आम लोगों के वोट के अधिकार को छीनने की एक कोशिश है.

जीतन राम मांझी के बेटे और बिहार सरकार में मंत्री संतोष सुमन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का निर्देश स्वागत योग्य है. अब ये तय हो गया कि किसी भी जायज मतदाता का नाम नहीं कटेगा और ना ही किसी नजायज मतदाता का नाम जुड़ेगा. विपक्ष की ओर से बहुत भ्रम फैलाने की कोशिश की गई.

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