- सुप्रीम कोर्ट ने बिहार SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया है
- चुनाव आयोग का कहना है कि SIR का मकसद केवल वोटरों की नागरिकता सुनिश्चित करना है, न कि व्यापक नागरिकता जांच करना
- सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से माइग्रेशन शब्द के अर्थ और इसके संवैधानिक अधिकारों पर स्पष्टता मांगी थी
बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. अदालत ने बिहार से जुड़े मुख्य मामले में याचिकाकर्ताओं की जवाबी दलीलों के बाद सुनवाई पूरी की. मामले में सभी पक्षों की दलीलें पूरी हो चुकी हैं. अदालत का फैसला चुनाव आयोग की SIR कराने की शक्तियों के दायरे और प्रभाव को तय करेगा. बता दें कि ADR, PUCL और कई विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख कर SIR कराने के लिए चुनाव आयोग की शक्तियों को चुनौती दी है.
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22 जनवरी को चुनाव आयोग ने रखा था अपना पक्ष
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में 22 जनवरी को हुई सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने अपना पक्ष रखा था. ईसीआई के वकील राकेश द्विवेदी ने कहा था कि 2003 में नागरिकता अधिनियम में संशोधन हुआ था, तब किसी ने विरोध नहीं किया और इसे सभी पक्षों का समर्थन मिला था. कोर्ट ने पूछा कि क्या उस संशोधन के बाद ही एसआईआर में नागरिकता जांच की जरूरत पड़ी. ईसीआई ने स्पष्ट किया था कि एसआईआर का मुख्य उद्देश्य संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत केवल वोटरों की नागरिकता सुनिश्चित करना है.
सुप्रीम कोर्ट ने भारत के चुनाव आयोग (ECI) के विभिन्न राज्यों में वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) कराने के फैसले की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक बैच पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। pic.twitter.com/rBCdXZmE9A
— ANI_HindiNews (@AHindinews) January 29, 2026
कोर्ट ने पूछा था 'माइग्रेशन' शब्द का मतलब
इस दौरान अदालत ने ईसीआई से सवाल किया था कि एसआईआर के आदेश में 'माइग्रेशन' शब्द का क्या मतलब है? क्या यह सिर्फ सीमा पर अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए है? ईसीआई ने जवाब दिया था कि माइग्रेशन में अंतरराज्यीय और राज्य के भीतर का प्रवासन दोनों शामिल हैं. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा सवाल उठाया कि माइग्रेशन का मतलब वैध प्रवासन होता है. भारत में हर नागरिक को किसी भी राज्य में जाने और रहने का संवैधानिक अधिकार है, इसलिए अंतर-राज्य प्रवासन को अवैध नहीं माना जा सकता.
अमेरिकी अदालतों के फैसलों का दिया हवाला
याचिकाकर्ताओं ने एसआईआर को 'ड्यू प्रोसेस' का उल्लंघन बताते हुए अमेरिकी अदालतों के फैसलों का हवाला दिया था. इस पर ईसीआई ने पलटवार किया. वकील ने कहा कि अमेरिका खुद ड्यू प्रोसेस का कितना पालन करता है? उन्होंने उदाहरण दिया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वेनेजुएला के राष्ट्रपति को हटाने और ट्रायल के लिए ले जाने की बात करते हैं, साथ ही ग्रीनलैंड पर कब्जे की इच्छा जताते हैं. ऐसे में अमेरिका ड्यू प्रोसेस की बात कैसे कर सकता है?
बिहार SIR पर फैसला सुरक्षित
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. सुप्रीम कोर्ट में हुई यह सुनवाई बिहार में मतदाता सूची के एसआईआर और नागरिकता जांच के तरीके को लेकर काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे लाखों लोगों का मताधिकार प्रभावित हो सकता है.
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