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हेट स्पीच को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला, जानिए किसने क्‍या कहा

हेट स्पीच को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है. ⁠कोर्ट में दायर याचिकाओं में भड़काऊ बयानबाजी पर लगाम लगाने के लिए कोर्ट के दखल की मांग की है. 

हेट स्पीच को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला, जानिए किसने क्‍या कहा
  • सुप्रीम कोर्ट ने हेट स्पीच से संबंधित याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखकर सभी पक्षों से लिखित दलीलें मांगी हैं.
  • अब SC तय करेगा कि क्या भड़काऊ बयानबाजी पर लगाम के लिए दिशा निर्देश जारी किया जाए या व्यवस्था बनाई जाए.
  • वकील निजाम पाशा ने कहा कि शिकायतों के बाद भी FIR दर्ज नहीं होतीं और होती भी हैं तो सही धाराएं नहीं लगाई जाती.
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नई दिल्‍ली:

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को हेट स्पीच को लेकर दायर याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रखा है. इस मामले में सभी पक्षों की दलीलें पूरी हो गई हैं. कोर्ट ने सभी पक्षकारों से लिखित दलीलें दाखिल करने को कहा है. अब सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि क्या सांप्रदायिक आधार पर होने वाली भड़काऊ बयानबाजी पर लगाम लगाने के लिए अन्य कोई दिशानिर्देश जारी किया जाए या कोई व्यवस्था बनाई जाए.

2018 में  दिए अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने भीड़ की हिंसा को रोकने के लिए दिशानिर्देश तय किए थे. ⁠कोर्ट में दायर याचिकाओं में इस आदेश पर सही तरह से अमल न होने और भड़काऊ बयानबाजी पर लगाम लगाने के लिए कोर्ट के दखल की मांग की है. 

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शिकायतों के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं होती: पाशा

सुनवाई के दौरान वकील निजाम पाशा ने कहा कि शिकायतों के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं होतीं हैं और अगर एफआईआर दर्ज होती भी हैं तो सही धाराएं नहीं लगाई जाती हैं.

उन्‍होंने कहा कि शरारत वगैरह जैसी हल्की धाराएं लगाई जाती हैं, ⁠फिर वही लोग उसी तरह के भाषण देते हुए दिखते हैं. उन्‍होंने कहा कि ⁠हेट स्पीच से हेट क्राइम होते हैं. 

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सिर्फ धार्मिक हस्तियों को टारगेट करते हैं: शमशाद 

एडवोकेट एमआर शमशाद ने कहा कि आम हेट स्पीच के अलावा एक ट्रेंड यह है कि वे सिर्फ धार्मिक हस्तियों को टारगेट करते हैं और जब हम शिकायत दर्ज कराते हैं तो सिर्फ इस वजह से एफआईआर दर्ज नहीं की जाती कि मंजूरी की जरूरत है.  

हिन्दू सेना के वकील बरुण सिन्हा ने कहा कि ओवैसी और स्टालिन ने हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ सांप्रदायिक बयान दिए हैं. ⁠मैंने शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.  

सीनियर एडवोकेट संजय हेगड़े ने कोर्ट को बताया कि एक न्यूज चैनल ने कहा था कि एक समुदाय का अपनी कम्युनिटी के लिए UPSC की कोचिंग का इंतजाम करना यूपीएससी जिहाद है. ⁠सुप्रीम कोर्ट ने कम से कम दो फैसले दिए हैं, ⁠एक तहसीन पूनावाला का मामला था और दूसरा अमीश देवगन का मामला. ⁠दिक्कत यह है कि अक्सर एक आदमी या एक संगठन जिसे अपनी बोलने की आजादी समझता है, वह दूसरे के लिए हेट स्पीच बन जाती है. 
 

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