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व्यवसाय और होटल बंद कर सकते हैं लेकिन अखबार नहीं...पंजाब केसरी मामले की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट

अदालत ने यह भी कहा कि प्रदूषण का हवाला देकर अखबार बंद नहीं किए जा सकते. पीठ ने मामले के गुण‑दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना यथास्थिति बनाए रखने और प्रिंटिंग प्रेस को बिना किसी बाधा के चालू रखने का निर्देश दिया.

व्यवसाय और होटल बंद कर सकते हैं लेकिन अखबार नहीं...पंजाब केसरी मामले की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट

पंजाब केसरी अखबार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई कि पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने उसके एक प्रिंटिंग प्रेस और प्रबंधन से जुड़े एक होटल को बंद कर दिया. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल राहत देते हुए कहा कि प्रिंटिंग प्रेस को बंद नहीं किया जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट कहा कि आप व्यवसाय और होटल बंद कर सकते हैं, लेकिन अखबार नहीं. अदालत ने यह भी कहा कि प्रदूषण का हवाला देकर अखबार बंद नहीं किए जा सकते. पीठ ने मामले के गुण‑दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना यथास्थिति बनाए रखने और प्रिंटिंग प्रेस को बिना किसी बाधा के चालू रखने का निर्देश दिया.

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अंतरिम संरक्षण कब तक?

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि अखबार की प्रिंटिंग प्रेस को बंद करने पर लगी अंतरिम रोक पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश आने के एक हफ्ते बाद तक लागू रहेगी, ताकि पीड़ित पक्ष चाहे तो हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दे सके.

राज्य सरकार की दलीलें

पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि संबंधित होटल में प्रदूषण की समस्या पाई गई. प्रिंटिंग प्रेस में शराब की दो बोतलें मिलीं. हाई कोर्ट ने मामले की विस्तृत सुनवाई कर फैसला सुरक्षित रख लिया है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसे होटल से कोई लेना‑देना नहीं, पर प्रिंटिंग प्रेस को बंद नहीं किया जाना चाहिए.

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अख़बार की ओर से कौन पेश हुआ?

मामले में सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने प्रिंटिंग प्रेस की ओर से पक्ष रखा. सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब केसरी के प्रिंटिंग प्रेस को “प्रदूषण के आधार पर बंद” किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई और साफ संकेत दिया कि मीडिया संस्थानों को इस तरह से निशाने पर नहीं लिया जा सकता है. अदालत ने दोहराया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस की आजादी लोकतंत्र के मूल आधार हैं.

अब हाई कोर्ट अपना आदेश सुनाएगा. सुप्रीम कोर्ट की दी हुई अंतरिम सुरक्षा हाई कोर्ट के आदेश के एक सप्ताह बाद तक प्रभावी रहेगी. उस अवधि में पीड़ित पक्ष को कानूनी चुनौती देने का अवसर मिलेगा.

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