- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रदर्शन के नाम पर किसी जगह पर अनिश्चितकाल तक कब्जा नहीं किया जा सकता
- सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि 20 जुलाई के प्रदर्शन के लिए केवल एक दिन की अनुमति थी
- अदालत ने कहा कि संसद और सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने की अनुमति नहीं है और निर्धारित स्थानों का पालन जरूरी है
सेंट्रल दिल्ली प्रोटेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि प्रदर्शन के नाम पर किसी जगह पर अनिश्चितकाल तक कब्जा नहीं किया जा सकता. CJI सूर्य कांत ने कहा कि आप किसी जगह पर हमेशा के लिए कब्जा नहीं कर सकते,दूसरे प्रदर्शनकारी भी हैं.किसान कहां जाएंगे, वकील कहां जाएंगे. उन्होंने कहा कि सभी को विरोध-प्रदर्शन करने का अधिकार है.प्रदर्शन के लिए निर्धारित जगहें एक निश्चित समयावधि के लिए होनी चाहिए और सभी को उसका पालन करना होगा.
संसद और सुप्रीम कोर्ट तक मार्च नहीं कर सकते
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि 20 जुलाई को प्रदर्शन की अनुमति केवल एक दिन के लिए दी गई थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने जगह खाली नहीं की और वहीं कब्जा बनाए रखा. उन्होंने संसद तक मार्च किया. संसद केवल एक राजनीतिक इमारत नहीं है, आप संसद तक मार्च नहीं कर सकते और आप सुप्रीम कोर्ट तक भी मार्च नहीं कर सकते.
कारोबारियों की ओर से अदालत में पेश मुकुल रोहतगी ने कहा कि दुनिया के कुछ हिस्सों में विरोध-प्रदर्शनों के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा हुई है. इस पर मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि यहां कोई हिंसा नहीं हुई है. यूरोप की घटनाओं को यहां मत लाइए. इस पर सीजेआई ने कहा कि ये दो परस्पर विरोधी दावे हैं. दुकानदार और रेहड़ी-पटरी वाले कहां जाएंगे? हमें प्रदर्शन के लिए ऐसी जगह की पहचान करनी होगी, जहां गरीब कारोबारियों की आजीविका प्रभावित न हो.
बिना अनुमति प्रदर्शन नहीं बुला सकते
इस पर मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि रामलीला मैदान को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल बनाया गया था. जब जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल घोषित किया गया था, तब वहां कोई हिंसा नहीं हुई थी. इस पर वरिष्ठ वकील हरिहर ने कहा कि कल दिल्ली पुलिस के कर्मचारी हड़ताल पर थे और जंतर-मंतर पर बैठे थे . वहीं सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि आप बिना अनुमति प्रदर्शन नहीं बुला सकते, जिससे लोगों की आजीविका का नुकसान हो और फिर शोर मचाएं.
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जारी किया नोटिस
बता दें कि दिल्ली के व्यापारियों की संस्था किराना कमेटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है. याचिका में त्योहारी सीजन में सेंट्रल दिल्ली में प्रदर्शनों पर रोक लगाने की मांग की गई है.व्यापारियों की तरफ से वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि धरना प्रदर्शन और रैली की वजह से 2 हजार करोड़ का नुकसान हुआ है.
मुकुल रोहतगी की दलील
वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि आज हम जंतर-मंतर, रामलीला मैदान आदि से लगभग 80 साल आगे आ चुके हैं. रामलीला मैदान CP से 1 मील दूर है. एक तरफ अस्पताल है, उस इलाके मे 50 लाख लोग रहते हैं. अब हमें किसी योजना के बारे में सोचना होगा. यह अब इधर-उधर जंतर-मंतर लगाने जैसा नहीं रह गया है. मैं दिल्ली के सभी व्यापार संघों का की तरफ से पेश हो रहा हूं. आज सभी दुकानें बंद हैं, CP में कोई नहीं है. अगर त्योहारों के सीजन में बिक्री न हो तो हमारी बिक्री गिर जाती है. मेरी गुजारिश है कि कुछ अलग हटकर समाधान खोजना चाहिए। इससे पहले CJP ने विरोध प्रदर्शन किया था.
जुटाए जा रहे डेटा का इस्तेमाल कहां हो रहा?
SG तुषार मेहता ने कहा कि विरोध प्रदर्शनों में 500-600 इंफ्लुएंसर वीडियो बना रहे हैं . ये लोग प्राइवेसी की बात करके सरकार को सर्विलांस से रोकने की कोशिश कर रहे हैं.वहीं वकील प्रशांत भूषण ने विरोध-प्रदर्शनों के दौरान फेशियल रिकग्निशन सॉफ्टवेयर के कथित अवैध इस्तेमाल का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान फेशियल रिकग्निशन सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जा रहा है. सरकार बताए कि किस कानून के तहत निगरानी की जा रही है. यह भी बताया जाए कि निगरानी के जरिए जुटाए जा रहे डेटा का इस्तेमाल कहां हो रहा है और उसका इस्तेमाल कौन कर रहा है.
सार्वजनिक स्थान पर नहीं कर सकते निजता का दावा
इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सार्वजनिक स्थान पर प्रदर्शन करते समय कोई निजता के अधिकार का दावा नहीं कर सकता.इस संबंध में एक याचिका दाखिल हुई थी और उसके बाद सभी निर्धारित प्रदर्शन स्थलों पर CCTV निगरानी की व्यवस्था की गई है.
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