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This Article is From Jan 11, 2023

लालढांग-चिल्लरखाल सड़क निर्माण को लेकर उत्तराखंड सरकार को सुप्रीम कोर्ट से झटका

सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त कमेटी ने रिपोर्ट में लालढांग-चिल्लरखाल सड़क के ब्लैक टॉपिंग (तारकोल बिछाने) यानी पक्की सड़क बनाने पर आपत्ति जताई थी. कोर्ट की कमेटी ने सुझाव दिया था कि सिगाड़ी सोत से चमरिया मोड़ तक के हिस्से में तारकोल की सड़क यानी पक्की सड़क नहीं बनाई जानी चाहिए.

लालढांग-चिल्लरखाल सड़क निर्माण को लेकर उत्तराखंड सरकार को सुप्रीम कोर्ट से झटका
लालढांग-चिल्लरखाल सड़क निर्माण पर SC ने लगाई रोक

लालढांग-चिल्लरखाल सड़क निर्माण को लेकर उत्तराखंड सरकार को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. कोर्ट ने लालढांग-चिल्लरखाल सड़क निर्माण फिलहाल पर रोक लगाई है. कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार को निर्देश दिया कि लालढांग-चिल्लरखाल क्षेत्र में सड़क का निर्माण ना करें. सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट द्वारा नियुक्त कमेटी पर संज्ञान लेते हुए आदेश दिया  है.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त कमेटी ने रिपोर्ट में लालढांग-चिल्लरखाल सड़क के ब्लैक टॉपिंग (तारकोल बिछाने) यानी पक्की सड़क बनाने पर आपत्ति जताई थी. कोर्ट की कमेटी ने सुझाव दिया था कि सिगाड़ी सोत से चमरिया मोड़ तक के हिस्से में तारकोल की सड़क यानी पक्की सड़क नहीं बनाई जानी चाहिए. रिपोर्ट में कहा गया कि यह गलियारा राजाजी और कार्बेट टाइगर रिजर्व को जोड़ता है और इसका इस्तेमाल बाघ व हाथियों द्वारा किया जाता है.

राजाजी बाघ अभयारण्य के बीच से लालढांग-चिल्लरखाल रोड का मामला भी सुप्रीम कोर्ट में आया है. कोर्ट ने इस सड़क के एक अहम हिस्से को डामर यानी तारकोल वाली पक्की सड़क बनाने से मना कर दिया. कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार से कहा कि वो अभ्यारण्य के बीच से रोड के निर्माण के बाघों की आवाजाही वाले कॉरिडोर में पक्की सड़क का निर्माण न करें. कोर्ट ने ये निर्देश विशेषज्ञ कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर दिया है. रिपोर्ट का सबसे अहम हिस्सा वो है, जिसमें सिगड़ी सोत से चमरिया बेंड तक के हिस्से को बाघ और अन्य वन्य जीवों के रहवास और आवाजाही का मुख्य क्षेत्र मानते हुए सड़क को कच्ची ही रहने देने की सिफारिश की गई थी. वहां उस हिस्से में खासकर सब कुछ नैसर्गिक ही रहने देने की बात रिपोर्ट में कही गई थी. कोर्ट के आदेश पर बनाई गई कमेटी यानी एससीसी ने यह भी सिफारिश की थी कि गहन वन का ये क्षेत्र राजाजी और जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय बाघ अभयारण्यों में रहने वाले बाघों के साथ साथ हिरण, जंगली सुअर, मृग  जैसे लंबी दौड़ लगाने वाले जानवरों और शिकार के लिए उनके पीछे भागने वाले बाघ, तेंदुओं और अन्य जंतुओं के भी आने जाने रहने और शिकार का मुख्य गलियारा है. सुप्रीम कोर्ट ने वकील गौरव बंसल और वन्य जीव संरक्षण कार्यकर्ता की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए रिपोर्ट देने का आदेश दिया था.

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