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क्या एकतरफा फैसले ले सकते हैं ज्ञानेश कुमार? सुप्रीम कोर्ट में आरोपों पर आज बड़ी सुनवाई

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से निर्देश मांगे गए हैं और इसके तहत CEC ज्ञानेश कुमार से यह बताने को कहा गया है कि उन्होंने किस अधिकार के तहत आयोग की सामूहिक निर्णय लेने की शक्ति का इस्तेमाल किया और कर रहे हैं.

क्या एकतरफा फैसले ले सकते हैं ज्ञानेश कुमार? सुप्रीम कोर्ट में आरोपों पर आज बड़ी सुनवाई
नई दिल्ली:

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिकाओं पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी. सीजेआई सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच मामले को सुनेगी. इन याचिकाओं में  SIR से जुड़े कथित एकतरफा फैसलों, दिशा-निर्देशों और सॉफ्टवेयर बदलावों को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है. साथ ही ज्ञानेश कुमार और अन्य अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की भी डिमांड है.

याचिकाओं में चुनौती दी गई है कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार एकतरफा रूप से उन शक्तियों का प्रयोग कर सकते हैं, जो संवैधानिक रूप से पूरे बहु-सदस्यीय चुनाव आयोग के लिए निर्धारित हैं. वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने इस मामले को 29 सितंबर को मुख्य न्यायाधीश के सामने उठाया था, इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने कहा था, "इसे अगले सप्ताह सूचीबद्ध करें."

याचिकाओं में क्या मांगें?

  • SIR के दौरान करीब 13 करोड़ नाम हटाए जाने के आरोप की सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता में SIT/न्यायिक जांच और ECINet-ERONet के फॉरेंसिक ऑडिट की मांग
  • CEC ज्ञानेश कुमार से आयोग की सामूहिक शक्ति के इस्तेमाल का कानूनी आधार बताने और ECI के मूल रिकॉर्ड, फाइल नोटिंग और बैठक के कार्यवृत्त तलब करने की मांग
  • सुनवाई लंबित रहने तक ज्ञानेश कुमार को CEC के तौर पर कार्य करने से रोकने की मांग

दरअसल सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पहली याचिका शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने  दाखिल की थी. इसमें विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े कथित एकतरफा फैसलों को चुनौती देते हुए ज्ञानेश कुमार के अलावा वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग और निर्वाचन आयोग की महानिदेशक (आईटी) सीमा खन्ना के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है.

याचिका में मांग की गई है कि ऐसे सभी फैसलों, दिशा-निर्देशों और सॉफ्टवेयर में किए गए बदलावों को असंवैधानिक और शून्य घोषित किया जाए, जिन्हें याचिकाकर्ता के मुताबिक CEC ने अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिया या लागू कराया. आरोप लगाया गया है कि नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति या असहमति दर्ज की. दावा है कि इन आपत्तियों के बावजूद संबंधित फैसलों को आयोग के फैसले के रूप में लागू किया गया.

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इसमें ECINet और ERONet डेटाबेस और SIR से संबंधित तकनीकी बदलावों की फॉरेंसिक जांच की मांग भी की गई है. साथ ही एक अक्टूबर 2025 से संबंधित सर्वर लॉग, डेटाबेस, संचार और मेटाडेटा को सुरक्षित रखने का निर्देश देने की मांग की गई है.

याचिका में मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में कथित बदलाव को भी चुनौती दी गई है. आरोप है कि ECINet पोर्टल पर Form-6 में ऐसी जानकारी मांगी गई जो आवेदक या उसके रिश्तेदार की पिछली SIR मतदाता सूची में मौजूदगी से संबंधित थी. याचिका में मूल वैधानिक Form-6 को बहाल करने की मांग की गई है.

13 करोड़ नाम हटाने के आरोप की SIT जांच की मांग

याचिका में SIR के दौरान करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोप की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग या विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग की गई है. प्रस्तावित जांच में ECINet और ERONet के डेटाबेस का फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग भी शामिल है. याचिकाकर्ता ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने को चुनौती देने वाली कथित 16.10 लाख अपीलों की परिस्थितियों की भी जांच की मांग की है.

तीनों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग

याचिका में जनप्रतिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 32 के तहत CEC ज्ञानेश कुमार, वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग, IT महानिदेशक सीमा खन्ना और जांच में दोषी पाए जाने वाले अन्य अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई/अभियोजन शुरू करने की मांग की गई है. मामले में प्रतिवादी के तौर पर केंद्र, निर्वाचन आयोग, ज्ञानेश कुमार, कैबिनेट सचिव, मनीष गर्ग और सीमा खन्ना को नामित किया गया है.

इसके अलावा एक अन्य याचिका राकेश कुमार सिंह ने दाखिल की है याचिका में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति किसी एक व्यक्ति को नहीं बल्कि निर्वाचन आयोग को एक संस्था के रूप में दी गई है. याचिकाकर्ता के मुताबिक CEC आयोग के अध्यक्ष हैं, लेकिन आयोग की सामूहिक शक्ति का अकेले इस्तेमाल करने का अधिकार उन्हें नहीं है. 

14 फैसलों पर आपत्ति का हवाला

राकेश कुमार सिंह की याचिका में दावा किया गया है कि 28 अक्टूबर 2025 से 14 अगस्त 2026 के बीच चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कम से कम 14 मौकों पर आयोग के नाम पर लिए गए फैसलों और उठाए गए कदमों को लेकर आपत्ति दर्ज की. याचिका में कहा गया है कि इन आपत्तियों के बावजूद संबंधित फैसले निर्वाचन आयोग के फैसलों के रूप में आगे बढ़ाए गए.  हालांकि निर्वाचन आयोग की ओर से कहा गया है कि संबंधित पत्र एक अधिकारी के प्रतिनियुक्ति से जुड़े थे और वे नीति या आईटी विभाग के मामलों से संबंधित नहीं थे.

CEC से अधिकार का आधार बताने की मांग

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से निर्देश मांगे गए हैं और इसके तहत CEC ज्ञानेश कुमार से यह बताने को कहा गया है कि उन्होंने किस अधिकार के तहत आयोग की सामूहिक निर्णय लेने की शक्ति का इस्तेमाल किया और कर रहे हैं. याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से निर्वाचन आयोग के मूल रिकॉर्ड, फाइल नोटिंग, बैठक के एजेंडे और कार्यवृत्त, मंजूरी संबंधी दस्तावेज, पत्राचार तथा अन्य रिकॉर्ड मंगाने की भी मांग की है, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि विवादित फैसले संविधान और 2023 के कानून के अनुरूप लिए गए थे या नहीं.

SIR को भी चुनौती

याचिका में देशभर में कराए जा रहे SIR और इसके तहत की गई कार्रवाइयों, फैसलों, निर्देशों और उनसे जुड़े कदमों को भी चुनौती दी गई है. याचिकाकर्ता ने मांग की है कि यदि रिकॉर्ड की जांच में यह पाया जाता है कि SIR या उससे जुड़े फैसले आवश्यक संवैधानिक और वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए बिना लिए गए, तो उन्हें शुरू से ही शून्य और कानूनी अधिकार के बिना घोषित किया जाए.

आयोग के कामकाज की प्रक्रिया तय करने की मांग

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि निर्वाचन आयोग के नाम से जारी होने वाले पत्र, आदेश, निर्देश और अपील आयोग के विधि-सम्मत निर्णय के आधार पर ही जारी हों. इसके अलावा आयोग की बैठकों के एजेंडे पहले से प्रसारित करने और बैठकों के बाद कार्यवृत्त दर्ज करने की नियमित व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है. याचिकाकर्ता के मुताबिक, मतभेद की स्थिति में आयोग का निर्णय बहुमत के आधार पर लिया जाना चाहिए, जैसा कि 2023 के कानून की धारा 18 में प्रावधान है.

CEC के कामकाज पर अंतरिम रोक की मांग

याचिका में सुनवाई लंबित रहने के दौरान ज्ञानेश कुमार को CEC के कार्यों का इस्तेमाल करने से रोकने की अंतरिम राहत भी मांगी गई है. साथ ही इस अवधि में आयोग का कामकाज अन्य दो चुनाव आयुक्तों के माध्यम से कराने की मांग की गई है.  याचिका में SIR से संबंधित इलेक्ट्रॉनिक और भौतिक रिकॉर्ड, जिसमें डेटाबेस, ऑडिट ट्रेल, सर्वर लॉग और आईटी एक्सेस रिकॉर्ड शामिल हैं, सुरक्षित रखने का निर्देश देने की भी मांग की गई है.

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