- इंडिया गठबंधन के 20 दलों के नेता दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ व्यापक धरना-प्रदर्शन की तैयारी में
- कांग्रेस ने महासचिवों की बैठक बुलाई है और विपक्षी सांसद चुनाव आयोग के दफ्तर तक मार्च करने वाले हैं
- विपक्षी दल जंतर-मंतर पर रोजाना प्रदर्शन कर रहे हैं और राष्ट्रपति भवन तक दबाव बनाने की योजना बना रहे हैं
नई दिल्ली. चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ इंडिया गठबंधन इस हफ्ते पूरी तैयारी के साथ सड़क पर उतरने को तैयार है. इसके लिए देश भर के 20 दलों वाले इंडिया गठबंधन के नेता दिल्ली में जुटेंगे. 2 अक्टूबर से लेकर 8 अक्टूबर 2026 तक देश भर में कांग्रेस और अन्य दलों का धरना-प्रदर्शन हो ही रहा है, मगर अब इसे और व्यापक बनाने के लिए कांग्रेस ने सोमवार को अपने सभी महासचिवों की बैठक भी बुलाई है.
कांग्रेस को लगता है कि मुख्य विपक्षी दल होने के नाते उसकी जिम्मेदारी अधिक है. यही नहीं, विपक्ष के सभी सांसद चुनाव आयोग के दफ्तर तक मार्च करने वाले हैं. कुछ ऐसा ही मार्च वोट चोरी और चंदा चोरी के मामले को लेकर विपक्ष ने गांधी स्मृति तक किया था, जिसमें विपक्ष के करीब सवा सौ सांसदों ने हिस्सा लिया था. तब ये सभी सांसद बसों में गांधी स्मृति तक गए थे. यदि इस बार ये सांसद संसद भवन से लेकर निर्वाचन सदन तक पैदल मार्च करते हैं, तो यह बहुत बड़ी बात होगी. हालांकि संसद से निर्वाचन सदन की दूरी ज्यादा नहीं है.
चुनाव आयोग से राष्ट्रपति भवन तक दबाव बनाने की तैयारी
विपक्षी दलों का यह धरना-प्रदर्शन सरकार के लिए दोतरफा दबाव का कारण बन सकता है, क्योंकि वहीं बगल में जंतर-मंतर है, जहां मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ रोज प्रदर्शन हो रहे हैं. इसके बाद विपक्ष की रणनीति इसी मुद्दे पर राष्ट्रपति से मिलने की है. यदि राष्ट्रपति विपक्षी सांसदों को मिलने का समय दे देते हैं, तो इतने बड़े पैमाने पर सांसदों का राष्ट्रपति भवन जाना भी बड़ी खबर बनेगा.
विपक्ष इस मुद्दे को अक्टूबर और नवंबर के महीने, या कहें संसद के शीतकालीन सत्र के शुरू होने तक, धरना-प्रदर्शन और रैलियों के जरिए जीवित रखना चाहता है. इसलिए 1 नवंबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक बड़ी रैली करने की रणनीति बनाई गई है. साथ ही देश के पांच राज्यों में भी ऐसी ही बड़ी रैलियां आयोजित करने की योजना है. इनमें बंगाल, उत्तर प्रदेश और बिहार के नाम प्रमुख रूप से लिए जा रहे हैं, जबकि अन्य राज्यों को लेकर अभी योजना बनाई जा रही है.
शीतकालीन सत्र तक सड़क से संसद तक लड़ाई की योजना
विपक्ष की रणनीति है कि संसद के शीतकालीन सत्र तक वह इन मुद्दों को लेकर सड़क पर बना रहे. इसलिए इस अभियान को 'लोकतंत्र बचाओ मार्च' का नाम दिया गया है. इसके बाद जैसे ही संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होगा, सड़क और रैलियों की लड़ाई संसद के भीतर लड़ी जाएगी. विपक्ष की रणनीति साफ है कि संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग लाया जाएगा. इसमें कांग्रेस को इंडिया गठबंधन के बाहर के दलों का भी समर्थन मिलने की उम्मीद है.
आम आदमी पार्टी कह चुकी है कि वह सदन में कांग्रेस के महाभियोग प्रस्ताव का समर्थन करेगी. इसी तरह महाभियोग के मुद्दे पर डीएमके, बीजू जनता दल, बीआरएस और वाईएसआर कांग्रेस से भी बातचीत की जाएगी. यदि ये सभी दल सदन के अंदर महाभियोग के समर्थन में अपने हस्ताक्षर कर देते हैं, तो सरकार पर दबाव बढ़ सकता है. हालांकि, एक बार दोनों सदनों में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग खारिज किया जा चुका है, मगर अभी भी महाभियोग का एक प्रस्ताव राज्यसभा में लंबित है. कुल मिलाकर चुनाव आयोग और एसआईआर के मामले पर इस बार कांग्रेस की बातों से बाकी विपक्ष भी सहमत दिख रहा है, जो शायद पहले नहीं था. यही विपक्षी दलों की एकता की धुरी बनती दिखाई दे रही है, जिसकी वजह से समूचा विपक्ष सरकार को सड़क से लेकर संसद तक घेरने के लिए तैयार नजर आ रहा है.
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