- अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में दोषी अब्बू अबूबकर बरेलवी की मौत की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी
- सुप्रीम कोर्ट ने बरेलवी की याचिका पर नोटिस जारी कर मौत की सजा पर अमल नहीं करने का निर्देश दिया
- गुजरात हाई कोर्ट ने पहले 38 दोषियों की फांसी और 11 दोषियों की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी थी
गुजरात के अहमदाबाद में साल 208 में हुई सीरियल ब्लास्ट मामले में मौत की सजा पाए दोषी अब्बू अबूबकर बरेलवी को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल बड़ी राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने उसकी मौत की सजा पर रोक लगा दी है. अदालत ने बरेलवी की सजा के खिलाफ याचिका पर नोटिस जारी कर कहा कि उसकी मौत की सजा पर फिलहाल अमल नहीं होगा. बता दें कि उसने गुजरात हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.
अबूबकर बरेलवी की मौत की सजा पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने दोषी अहमद बावा अब्बू अबूबकर बरेलवी की याचिका पर नोटिस जारी किया है. बरेलवी ने सुप्रीम कोर्ट में गुजरात हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उसकी सजा और मौत की सजा को बरकरार रखा गया था.
जांच एजेंसी को नोटिस जारी
बरेवली के वकील ने जस्टिस विक्रमनाथ की बेंच से कहा कि उसे पूरी तरह से साजिश के आधार पर ही दोषी ठहराया गया है. गुजरात कोर्ट के फैसले के अनुवाद के लिए भी उन्होंने एक अर्जी दायर की है. दरअसल ट्रायल कोर्ट के दस्तावेज स्थानीय भाषा में हैं. इस पर जस्टिस नाथ ने कहा कि ठीक है, सजा पर अमल को रोक दिया जाएगा. साथ ही कोर्ट ने जांच एजेंसी को नोटिस जारी कर इस मामले में जवाब मांगा है.
गुजरात हाई कोर्ट ने 38 लोगों की फांसी की सजा रखी थी बरकरार
बता दें कि 7 जुलाई 2026 को गुजरात हाई कोर्ट ने विशेष अदालत का फैसला बरकरार रखते हुए 38 लोगों की फांसी की सजा को बरकरार रखा था. अदालत ने 11 दोषियों की आजीवन कारावास की सजा को भी बरकरार रखा था. अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में निचली अदालत ने फरवरी 2022 में सजा का ऐलान करते हुए 49 में 38 आरोपियों को फांसी की सजा दी थी.
कहां-कहां हुए थे अहमदाबाद में सीरियल ब्लास्ट?
अहमदाबाद में 26 जुलाई 2008 को 21 ठिकानों पर ताबड़तोड़ बम धमाके हुए थे, जिनमें 56 लोगों की मौत हुई थी और 250 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. इंडियन मुजाहिदीन (IM) ने इन विस्फोट की जिम्मेदारी ली थी. ये धमाके शाम 6:30 से रात 8:15 बजे तक 20 जगहों पर धमाके हुए थे. सरकारी अस्पतालों अहमदाबाद सिविल अस्पताल और एलजी अस्पताल, बस अड्डे, बाजार और पार्किंग में भीड़भाड़ वाले इलाके में साइकिल और कारों में टिफिन बमों में रखे गए थे, जिनमें धमाके हुए थे.
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