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This Article is From May 02, 2022

मुस्लिमों के खिलाफ हेट स्पीच पर कार्यवाही की याचिका पर 9 मई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

वकील एम आर शमशाद द्वारा दाखिल याचिका में देशभर में हेट स्पीच से संबंधित अपराधों के सिलसिले में की गईं समस्त शिकायतों को एक साथ शामिल करके स्वतंत्र जांच समिति गठित करने का निर्देश जारी करने का भी अनुरोध किया गया है.

मुस्लिमों के खिलाफ हेट स्पीच पर कार्यवाही की याचिका पर 9 मई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
मुस्लिमों के खिलाफ हेट स्पीच पर कार्यवाही की याचिका पर 9 मई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
नई दिल्ली:

मुस्लिमों के खिलाफ हेट स्पीच पर कार्यवाही की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 9 मई को सुनवाई करेगा. जमीयत उलेमा-ए-हिंद की याचिका पर धर्म संसद मामले के साथ ही इस मामले की सुनवाई होगी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये संबंधित मामले हैं, इसलिए साथ ही 9 मई को सुनवाई करेंगे. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर पैगंबर मोहम्मद के व्यक्तित्व पर कथित ‘लगातार हमलों' और देश के विभिन्न हिस्सों में कुछ लोगों द्वारा मुस्लिमों की पर कथित हमलों से संबंधित हेट क्राइम के मामले में अदालत की निगरानी में जांच और कानूनी कार्यवाही की मांग की गई है. 

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना सैयद महमूद असद मदनी के माध्यम से दाखिल याचिका में केंद्र को यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है कि हेट स्पीच, विशेष रूप से पैगंबर मोहम्मद की शख्सियत को निशाना बनाकर दिये गये बयानों के संबंध में विभिन्न राज्यों द्वारा की गयी कार्रवाई पर रिपोर्ट मांगी जाए.  

वकील एम आर शमशाद द्वारा दाखिल याचिका में देशभर में हेट स्पीच से संबंधित अपराधों के सिलसिले में की गयीं समस्त शिकायतों को एक साथ शामिल करके स्वतंत्र जांच समिति गठित करने का निर्देश जारी करने का भी अनुरोध किया गया है. याचिका में कहा गया है कि पैगंबर मोहम्मद का अपमान इस्लाम की पूरी बुनियाद पर ही हमला करने के समान है और इस तरह यह अत्यंत गंभीर प्रकृति का है क्योंकि इसके नतीजतन न केवल मुस्लिम समुदाय के लोगों पर निशाना साधा गया है, बल्कि उनकी आस्था की बुनियाद पर भी हमला किया जाता है.  

इसमें कहा गया कि ये हेट स्पीच किसी अन्य की आस्था की आलोचना की स्वीकार्य सीमा से परे जाकर दिये जा रही हैं और निश्चित रूप से धार्मिक असहिष्णुता को भड़का सकते हैं. याचिका के अनुसार राज्य और केंद्र के अधिकारियों को इन्हें विचारों तथा धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता के संदर्भ में असंगत मानना चाहिए और समुचित प्रतिबंधात्मक कदम उठाने चाहिए. 

संगठन ने कहा कि उसने काफी समय तक इंतजार करने और शासकीय अधिकारियों को उचित कदम उठाने के लिए पर्याप्त वक्त देने के बाद यह याचिका दायर की है. ये याचिका पिछले साल दिसंबर में दाखिल की गई थी. 

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आशीष भार्गव
Senior Editor – Legal News
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