- सुप्रीम कोर्ट ने मालदा मामले की 12 एफआईआर की जांच एनआईए को संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत सौंप दी है.
- कोर्ट ने पश्चिम बंगाल पुलिस को निर्देश दिया कि जांच से जुड़ी सभी सामग्री तुरंत एनआईए को सौंपे.
- एनआईए को नए अपराधियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने तथा जांच का पूरा अधिकार दिया गया है.
मालदा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाते हुए 12 एफआईआर की जांच एनआईए को सौंप दी है. यह कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत की गई है. कोर्ट ने पश्चिम बंगाल पुलिस को निर्देश दिया है कि वह जांच से जुड़ी सभी सामग्री तत्काल एनआईए को सौंपे.
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने बताया कि इस मामले में एनआईए ने एक सीलबंद लिफाफे में प्रारंभिक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है, जिसमें सामने आया है कि सभी एफआईआर स्थानीय पुलिस द्वारा दर्ज की गई थीं और स्थानीय पुलिस पर गंभीर आरोप लगे हैं.
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सुप्रीम कोर्ट ने एनआईए को यह अधिकार भी दिया है कि यदि आगे और अपराध सामने आते हैं तो वह नए लोगों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कर सकती है. इसके साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया है कि अब तक गिरफ्तार किए गए आरोपियों की कस्टडी तुरंत एनआईए को सौंपी जाए. वहीं, जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने पश्चिम बंगाल के चीफ सेक्रेटरी के रवैये पर सवाल उठाते हुए उनसे जवाब तलब किया और टिप्पणी की कि उनका फोन अक्सर स्विच ऑफ रहता है, यहां तक कि कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस भी उनसे संपर्क नहीं कर पा रहे हैं. CJI ने कहा कि नौकरशाही के इस बेहद अड़ियल रवैये का सामना हमें दूसरे राज्यों में भी करना पड़ रहा है.
सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत प्रदत्त असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए एनआईए बंगाल के दौरान न्यायिक अधिकारियों पर कथित हमलों के सभी 12 मामलों की जांच करने के लिए अधिकृत किया. उन्होंने कहा कि एनआईए जांच संभालेगी. भले ही ये उनका निर्धारित कार्य नहीं हैं. कलकत्ता में विशेष एनआईए अदालत मुकदमे की सुनवाई करेगी. एनआईए समय-समय पर उच्चतम न्यायालय के समक्ष जांच की स्थिति रिपोर्ट पेश करेगी. एनआईए की अगली रिपोर्ट 13 अप्रैल की सुनवाई तक दाखिल की जाएगी.
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य पुलिस को केस डायरी और अब तक के जांच के रिकॉर्ड तुरंत एनआईए को सौंपने का निर्देश दिया, राज्य पुलिस द्वारा जांच के लिए एनआईए को सभी कार्रवाई दी जाए. पश्चिम बंगाल सरकार ने डीजीपी और मुख्य सचिव की ओर से सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विस्तृत हलफनामा दाखिल किया. न्यायिक अधिकारियों को धमकी देने के आरोप में 2 व्यक्तियों- शाहजहां कादरी और मफतुल इस्लाम को गिरफ्तार किया गया.
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