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पश्चिम बंगाल के 20 लाख सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट का बकाया महंगाई भत्ता देने का आदेश

पश्चिम बंगाल के करीब 20 लाख राज्य कर्मचारियों को को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए 2008 से 2019 तक का बकाया महंगाई भत्ता दिए जाने का आदेश दिया है.

पश्चिम बंगाल के 20 लाख सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट का बकाया महंगाई भत्ता देने का आदेश
  • सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल के 20 लाख कर्मचारियों को 2008 से 2019 तक का बकाया महंगाई भत्ता देने का आदेश दिया है.
  • सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में 4 सदस्यीय कमेटी बनाई, जो DA भुगतान की योजना बनाएगी.
  • राज्य सरकार को कुल बकाया महंगाई भत्ते के लिए करीब 43 हजार करोड़ रुपए का भुगतान करना होगा.
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नई दिल्‍ली:

पश्चिम बंगाल सरकार और राज्य कर्मचारियों के बीच महंगाई भत्ता विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला दिया है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने राज्‍य के करीब 20 लाख कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है. अदालत ने इन कर्मचारियों को 2008 से 2019 तक का बकाया महंगाई भत्ता दिए जाने का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसके पहले दिए गए अंतरिम आदेश के मुताबिक बकाया DA का 25% हिस्सा 6 मार्च तक दिया जाए. साथ ही बकाया का बाकी हिस्सा किस्तों मे कैसे दिया जाए, ये तय करने के लिए एक कमेटी के गठन का आदेश दिया. 

सुप्रीम कोर्ट ने शीर्ष अदालत की पूर्व जज इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता मे कमेटी का गठन किया है. जस्टिस इंदु मलहोत्रा ,जस्टिस तरलोचन सिंह चौहान और जस्टिस गौतम विधूडी और CAG के अधिकारी की कमेटी बनाई गई है. यह कमेटी तय करेगी कि किस तरह से बकाया DA दिया जाए. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 16 मई तक कमेटी से रिपोर्ट मांगी है. अगली सुनवाई 16 मई को होगी.  

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राज्‍य सरकार को देने होंगे 43 हजार करोड़ 

20 लाख कर्मचारियों को इस फैसले से फायदा होगा. राज्य सरकार के मुताबिक, 43 हजार करोड़ का भुगतान करना होगा.  सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कर्मचारियों को DA उनका अधिकार है. ममता सरकार ने कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले को SC में चुनौती दी थी. 

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हाई कोर्ट ने भुगतान का दिया था आदेश 

कलकत्ता हाईकोर्ट  ने मई 2022 में राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह जुलाई 2008 से लंबित महंगाई भत्ता का भुगतान तीन महीने के अंदर करे. 

इस फैसले के खिलाफ ममता सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 16 मई को अपने अंतरिम आदेश में राज्य सरकार को कहा था कि वह कुल बकाया DA का कम से कम 25% हिस्सा तीन महीने में कर्मचारियों को दे. 
 

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