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'भारत इनोवेट्स का आइडिया PM मोदी को दिया तो उन्होंने क्या कहा?', हरीश साल्वे ने NDTV को बताई पूरी कहानी

फ्रांस में हुई 'भारत इनोवेट्स 2026' के सूत्रधार हरीश साल्वे ने NDTV से बात की. उन्होंने बताया कि भारत आज स्टार्टअप्स और इनोवेशन के मामले में कहां तक पहुंच गया है?

'भारत इनोवेट्स का आइडिया PM मोदी को दिया तो उन्होंने क्या कहा?', हरीश साल्वे ने NDTV को बताई पूरी कहानी
भारत इनोवेट्स 2026 के सूत्रधार हरीश साल्वे ही थे.
NDTV
नई दिल्ली:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के दौरे पर 'भारत इनोवेट्स 2026' का उद्घाटन किया था. यह भारत की टेक्नोलॉजी और इनोवेशन से जुड़ी बड़ी महत्वाकांक्षा का हिस्सा है, क्योंकि फ्रांस और भारत 2026 को 'इनोवेशन का साल' भी मना रहे हैं. 'भारत इनोवेट्स 2026' के मुख्य सूत्रधार हरीश साल्वे हैं. 

इसे लेकर हरीश साल्वे ने NDTV से बात की और कई अहम बातें बताईं. उन्होंने बताया कि 'भारत इनोवेट्स 2026' का आइडिया कैसे आया. उन्होंने जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपना आइडिया साझा किया तो उन्होंने क्या कहा.

कैसे आया आइडिया?

NDTV से बात करते हुए हरीश साल्वे ने कहा कि 'भारत इनोवेट्स 2026' सरकार का आइडिया है. उन्होंने कहा, 'मैंने बस एक आइडिया दिया था और यह आइडिया मुझे इसलिए आया क्योंकि मैं IIT दिल्ली के साथ बहुत करीब से काम करता हूं, जहां मैं पिछले दो साल से बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का चेयरमैन हूं, और IIT रुड़की के साथ भी, जहां मैं बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का एक्टिंग चेयरमैन हूं. वहां हो रहे काम को देखकर मैं हैरान रह गया.'

उन्होंने कहा कि मैं 2024 और 2025 में IIT दिल्ली के लिए फंड रेज करना चाहता था. मैंने IIT दिल्ली के पूर्व छात्रों से बात की थी. 

उन्होंने बताया कि 'मैंने प्रधानमंत्री मोदी के सामने अपना आइडिया रखा, जिस पर उन्होंने कहा कि सिर्फ IIT दिल्ली है क्यों? बाकी IITs क्यों नहीं? और इस तरह यह आइडिया आगे बढ़ा और विकसित होकर 'भारत इनोवेट्स 2026' बन गया.'

उन्होंने कहा कि 'यह भारतीय इनोवेटर्स का एक खास इवेंट था और इन लोगों के साथ काम करते हुए हमें एहसास हुआ कि उन्हें एक्सपोजर की जरूरत है. इस एक्सपोजर से इंटरनेशनल कम्युनिटी का भरोसा बढ़ेगा और वे अपना पैसा लगाने को तैयार होंगे.'

हरीश साल्वे ने बताया कि कई लोग उनके पास आए और उन्होंने कहा कि अगर भारतीय स्टार्ट्अप्स में पैसा लगाते हैं तो इनकी वैल्यू तीन-चार या पांच साल में 5 बिलियन से 30 बिलियन के हो जाएगी.

मैक्रों ने ड्रोन खरीदने में दिखाई थी दिलचस्पी

हरीश साल्वे ने कहा कि 'भारत में 2,00,000 से ज़्यादा स्टार्टअप हैं, जिनमें से लगभग 18 से 20,000 रजिस्टर्ड डीप-टेक स्टार्टअप हैं. हमने 120 अच्छे स्टार्टअप को चुना और यहां लेकर आए. ये स्टार्टअप्स ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों से थे - जो आज काम का बहुत ही अहम क्षेत्र है - साथ ही स्पेस, कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों से भी.'

उन्होंने बताया कि 'भारत के एक ड्रोन मैन्युफैक्चरर, जिनके ड्रोन का इस्तेमाल सेना ने 'ऑपरेशन सिंदूर' में भी किया था, वे यहां मौजूद थे. और जब प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति मैक्रों के साथ घूम रहे थे, तो उन्होंने उन्हें फ्रांस के राष्ट्रपति से मिलवाया, जिन्होंने उनसे ड्रोन खरीदने में दिलचस्पी दिखाई.'

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भारत-फ्रांस समझौतों पर क्या बोले हरीश साल्वे?

उन्होंने बताया कि फ्रांस की कंपनियों ने भारत के स्टार्टअप के साथ समझौते किए हैं. उन्होंने कहा, 'आप जिन समझौतों की बात कर रहे हैं, उनमें से एक हमारे AI एक्सपर्ट्स में से एक, IIT के प्रोफेसर के साथ हुआ है. उनके स्टार्टअप को एयरक्राफ्ट इंजन बनाने वाली एक बड़ी कंपनी ने अपनाया है, जो फ्रांस में अलग-अलग कामों के लिए एयरक्राफ्ट इंजन बनाती है. और उनके AI का इस्तेमाल इन इंजनों को बनाने और उनकी निगरानी करने के लिए किया जा रहा है.'

उन्होंने कहा, 'लोग कहते हैं कि हम उनकी टेक्नोलॉजी पर निर्भर हैं. अगर उनके इंजन के लिए भारतीय AI का इस्तेमाल होता है, तो वे हमारी टेक्नोलॉजी पर निर्भर हो जाएंगे. तो क्या आप सोच सकते हैं कि इससे कितनी 'सॉफ्ट पावर' मिलेगी?'

हरीश साल्वे ने बताया कि 'दूसरी बात, इस तरह के सौदे शायद 100 अरब डॉलर के न हों, क्योंकि हर चीज़ अरबों-खरबों की नहीं होती, जैसा कि आप बड़ी इंडस्ट्रीज़ के निवेश के बारे में सुनते हैं. ये ऐसे सौदे हैं जो भारत के भविष्य के लिए नींव का काम करते हैं. और इससे दूसरों को भी अपना काम बेहतर करने और उस स्टैंडर्ड तक पहुंचने की हिम्मत मिलती है.'

उन्होंने कहा कि 'हर साल, हम 100-120 नए लोगों को चुनेंगे और उन्हें दुनिया के सामने लाएंगे.  और यह हमारी एक छोटी सी कोशिश होगी. इन लोगों ने भारत में हर मुश्किल का सामना किया है, आगे बढ़े हैं, अपनी एंटरप्रेन्योर वाली सोच दिखाई है और अपनी बुद्धि का इस्तेमाल किया है.'

कितनी जबरदस्त है भारत की क्षमता? हरीश साल्वे ने बताया

उन्होंने बताया कि भारत की क्षमता आज के समय में बहुत जबरदस्त है. उन्होंने बताया कि IIT दिल्ली ने एक ऐसा सीमेंट बनाया है, जिसका कार्बन फुटप्रिंट 40 फीसदी से कम है. एक ऐसा फैब्रिक बनाया है जो प्रदूषण फैलाने वाले कणों को सोख सकता है. उन्होंने एक बुलेटप्रूफ वेस्ट भी बनाया है, जो मेरे ख्याल से 6 में से 5 ग्रेड का है. बुलेटप्रूफ वेस्ट की खासियत यह है कि टकराने पर उसमें बड़ा गड्ढा नहीं पड़ना चाहिए, क्योंकि इससे आपकी पसलियां टूट सकती हैं. 

उन्होंने कहा कि साथ ही, डीप साइंस, AI कंप्यूटिंग, स्पेस और सैटेलाइट जैसे क्षेत्रों में आपके पास हाई-टेक तकनीक है. IIT रुड़की ने UK की टेलीफोन कंपनी के साथ समझौता किया है. CERN AI ने एयरक्राफ्ट बनाने वाली कंपनियों के साथ समझौता किया है. 

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भारत को कोई ठीक से नहीं जानता: हरीश साल्वे

भारत किस बड़े पैमाने पर इनोवेशन कर रहा है और उसमें इनोवेशन करने की कितनी क्षमता है? इस सवाल पर हरीश साल्वे ने कहा कि 'मैं अपनी ज़िंदगी का ज़्यादातर समय इंग्लैंड में बिताता हूँ और थोड़ा समय फ्रांस में. मैं यहां लोगों से मिलता हूं और मुझे एहसास हुआ कि असल में कोई भी भारत को ठीक से नहीं जानता. और मुझे यह कहते हुए अफ़सोस होता है कि जिस तरह से हम खुद को कमतर आंकते हैं, हमारी मीडिया हमें कमतर दिखाती है... हर समय भारत के बारे में बस यही सुनने को मिलता है कि अरे, भारत में बिज़नेस करना बहुत मुश्किल है.'

उन्होंने कहा कि 'मुझे बस एक बहुत जायज़ शिकायत सुनने को मिलती है कि भारत में विवाद सुलझाने के लिए अगर आप भारतीय अदालत जाते हैं, तो आप एक ऐसी भूलभुलैया में फंस जाते हैं जिससे कभी बाहर नहीं निकल पाते. इस तरह के प्रोजेक्ट्स के लिए भारत में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' का अनुभव बहुत अलग है.'

उन्होंने कहा, 'हम बस यह कहना चाहते थे कि देखिए, अगर हम 200,000 स्टार्टअप्स बना सकते हैं, तो ज़ाहिर है कि बिज़नेस करने में कुछ तो आसानी ज़रूर होगी. और यही वह बड़ा संदेश है जिसकी वजह से लोग अचानक भारत को सकारात्मक नज़रिए से देख रहे हैं.'

हरीश साल्वे ने आखिर में कहा कि असल में, भारत एक बड़े बाजार के तौर पर जाना जाता है, इसलिए जब हमें कोई टेक्नोलॉजी बेचनी होती है, तो हम भारत जाते हैं; जब हमें प्रोडक्ट्स बेचने होते हैं, तो हम भारत जाते हैं.

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लेखक के बारे में
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गौरी द्विवेदी
कार्यकारी संपादक, एनडीटीवी वर्ल्ड - NDTV
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