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जेल से बाहर आते ही आजम खान को ED ने गिरफ्तार क्यों कर लिया? समझें क्या है पूरा मामला

समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान को ED ने गिरफ्तार कर लिया है. आजम खान जैसे ही रामपुर जेल से बाहर आए, उन्हें ED की टीम ने गिरफ्तार कर लिया.

आजम खान को जेल से रिहा होते ही ED ने हिरासत में ले लिया.
IANS

उत्तर प्रदेश की रामपुर जेल में बंद समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान शनिवार को जेल से जैसे ही रिहा हो गए, वैसे ही ED की टीम ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. इलाहाबाद हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद आजम खान को शनिवार को रिहा किया गया था, लेकिन ED ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया.

इससे पहले शुक्रवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फर्जी पासपोर्ट और दो पैन कार्ड रखने के मामले में आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला को जमानत दी थी.

फर्जी पासपोर्ट और दो पैन कार्ड के मामले में पिछले साल नवंबर में आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला को दोषी पाया गया था. दोनों 17 नवंबर 2025 से ही रामपुर की जेल में बंद थे.

जेल के बाहर ही थी ED की टीम

आजम खान की रिहाई से पहले ही ED की टीम रामपुर जेल के बाहर पहुंच गई थी. रामपुर की जेल से बाहर आते ही ED की टीम ने उन्हें हिरासत में ले लिया था. जेल के बाहर की तस्वीरें-वीडियो सामने आई हैं. 

इनमें आजम खान जेल के बाहर आते दिखते हैं और तभी कुछ अधिकारी उनसे बात करते हैं. इसके बाद गाड़ी में बैठाकर ले जाते हैं. 

जानकारी के मुताबिक, आजम खान को रविवार को गाजियाबाद की PMLA कोर्ट में पेश किया जाएगा.

ED ने क्यों किया गिरफ्तार?

आजम खान को ED ने जिस मामले में गिरफ्तार किया है, वह मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ा है. इस मामले में ED ने 13 अक्टूबर को ही केस दर्ज किया था. 

ED ने यह केस यूपी के अलग-अलग थानों में दर्ज 54 FIR के आधार पर दर्ज किया था. इनमें आरोप लगाया गया था कि किसानों की जमीन को जबरन लेकर जौहर यूनिवर्सिटी के लिए इस्तेमाल किया गया.

इसके अलावा, आजम खान पर 2016 में कई मकानों को गिराने और सरकारी प्रोजेक्ट्स से जुड़े सामान और उपकरणों को यूनिवर्सिटी परिसर में इस्तेमाल करने का आरोप शामिल है.

ED का आरोप है कि अवैध गतिविधियों से मिले पैसे का इस्तेमाल यूनिवर्सिटी और उससे जुड़ी संपत्तियों की खरीद और निर्माण में किया गया.

ED के मुताबिक, जौहर यूनिवर्सिटी की अनुमानित लागत 499.09 करोड़ रुपये आंकी गई है. जबकि ट्रस्ट के आईटी रिटर्न में 2013-14 से 2024-25 के बीच 78.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च ही दिखाया गया.

जांच के बाद ED इस नतीजे पर पहुंचे की यूनिवर्सिटी कैंपस की कुल लागत में सिर्फ 72.63 करोड़ रुपये का स्रोत वैध रूप से साबित किया जा सका. बाकी 426.46 करोड़ रुपये को ED ने कथित अपराध से हुई कमाई माना है.

यूनिवर्सिटी की जमीन और बिल्डिंग भी अटैच

ED ने 28 अक्टूबर को ही मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और बिल्डिंग को अस्थायी रूप से अटैच किया है.

ED के मुताबिक, जब्त की गई संपत्तियों का मार्केट वैल्यू लगभग 1,170 करोड़ रुपए है. जब्त संपत्तियों में यूनिवर्सिटी की 59 इमारतें शामिल हैं.

जांच एजेंसी का दावा है कि जांच में सामने आया है कि सरकारी पैसे का इस्तेमाल यूनिवर्सिटी में किया गया. 

इसके अलावा, सरकारी पैसों से कुछ काम यूनिवर्सिटी में कराए गए और सरकारी ठेके पाने वाले ठेकेदारों के जरिए पैसे को दान के रूप में ट्रस्ट तक पहुंचाया गया.

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