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कश्मीर से मसूरी तक बरस रही 'सफेद आफत', जानिए क्या है इस बर्फबारी का पाकिस्तान कनेक्शन

हिमालय के इलाकों में हर साल बर्फ पड़ती है और उसकी वज़ह वेस्टर्न डिस्टरबेंस ही होता है. अंतर बस इतना रहा कि जिस बर्फबारी की शुरुआत आम तौर पर दिसंबर के महीने में होती है वो नहीं हो पाई.

कश्मीर से मसूरी तक बरस रही 'सफेद आफत', जानिए क्या है इस बर्फबारी का पाकिस्तान कनेक्शन
पहाड़ों को जमकर हो रही है बर्फबारी
पीटीआई
  • दिल्ली और हिमालय क्षेत्र में अचानक हुई भारी बारिश और बर्फबारी के कारण मौसम में अप्रत्याशित बदलाव आया
  • इस सर्दी में पहली बार दो सिस्टम के मेल से हिमालय के ऊपरी और निचले क्षेत्रों में व्यापक बर्फबारी देखी गई
  • दिल्ली में ठंडक बढ़ेगी और तापमान गिरने से सुबह की ठंडक वापस लौटने की संभावना है
नई दिल्ली:

दिल्ली में बारिश और पहाड़ों पर बर्फबारी, मौसम ने शुक्रवार को अचानक करवट बदला तो सब हैरान हो गए. मौसम पर नज़र रखने वालों के लिए भी क्या वाकई इस तरीके की बर्फबारी चौंकाने वाली रही या सर्दियों के मौसम में ऐसी घटनाएं सामान्य मानीे जातीं हैं, ये सवाल तो उठता ही है. एनडीटीवी इंडिया ने मौसम के इस बदलाव को लेकर जानकारों से बात की और पता लगाने की कोशिश भी कि आखिरकार 107 दिनों तक सूखा-सूखा मौसम अचानक ही मेहरबान क्यों हो गया और वो भी इतना कि हर ओर झमाझम.

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आखिरकार क्या वज़ह रही इस तरह के बदलाव की

सर्दियों में वाकई ऐसी बर्फबारी असामान्य नहीं है. शुक्रवार को जो हुआ वो दरअसल दो सिस्टम के एक साथ आने से संभव हो पाया. दरअसल, पाकिस्तान के ऊपर एक कम दवाब यानि लो प्रेशर सिस्टम बना जिससे पूर्व और पश्चिम दोनों ओर से एक्टिव वेस्टर्न डिस्टरबेंस को आद्रता मिली. भूमध्य सागर की ओर से आने वाले सिस्टम को अरब सागर से तो नमी मिली ही, लो प्रेशर सिस्टम से बंगाल की खाड़ी ने भी नमी की सप्लाई कर दी और पूरा हिमालय बर्फ से ढ़क गया.

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स्काईमेट वेदर के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट महेश पालावत बताते हैं कि, "ऐसी बर्फबारी सर्दियों में देखने को मिलती है, लेकिन एक सिस्टम के साथ दो तरफ से नमी मिले ऐसा हमेशा नहीं होता, यही वज़ह रही कि अचानक खूब बर्फबारी हुई. वो भी ऊपरी हिमालय से लेकर निचले हिमालय तक.

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क्या इस साल मौसम का अंदाज़ उल्टा-पुल्टा है?

 हिमालय के इलाकों में हर साल बर्फ पड़ती है और उसकी वज़ह वेस्टर्न डिस्टरबेंस ही होता है. अंतर बस इतना रहा कि जिस बर्फबारी की शुरुआत आम तौर पर दिसंबर के महीने में होती है वो नहीं हो पाई. इसकी वज़ह क्लाइमेट चेंज रही, जिससे हिमालय के दक्षिण यानि भारत में मौसम शुष्क ही बना रहा. अक्टूबर के महीने के बाद बारिश हुई ही नहीं और ऐसा होना इस बर्फबारी से ज्यादा असामान्य था. भारतीय मौसम विभाग के सीनियर वैज्ञानिक आर के जेनामनि बताते हैं, "ठंड के मौसम में बर्फबारी का नहीं होना असामान्य होता है.

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ऐसे में अगर बर्फबारी हुई है तो उसकी वज़ह ये है कि देर से ही सही सक्रिय वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर हिमालय के दक्षिणी इलाके में दिखा." इस बारिश और बर्फबारी से ठंड की विदाई में देरी भी होगी. पिछले दिनों दिल्ली का तापमान 27 डिग्री तक पहुंच गया था जो सामान्य से 6 से 7 डिग्री तक अधिक था, लेकिन अब रात और सुबह का तापमान अगले कुछ दिनों में गिरेगा यानि सुबह वाली कंपकंपी लौटने वाली है.

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लेखक के बारे में
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कुमार कुणाल
National Bureau Head
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