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This Article is From Jun 03, 2022

कर्नाटक से राज्यसभा की चार सीट के लिए छह उम्मीदवार मैदान में, चौथी सीट के लिए कांटे की टक्कर

कर्नाटक (Karnataka) से राज्यसभा (RajyaSabha)  की चार सीट के लिए 10 जून को होने वाले चुनाव के लिए छह उम्मीदवार मैदान में हैं. एक सीट पर कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है.  

कर्नाटक से राज्यसभा की चार सीट के लिए छह उम्मीदवार मैदान में, चौथी सीट के लिए कांटे की टक्कर
 भाजपा नेताओं ने चार में से तीन सीट पर जीत का भरोसा जताया है. 
बेंगलुरु:

कर्नाटक (Karnataka) से राज्यसभा (RajyaSabha)  की चार सीट के लिए 10 जून को होने वाले चुनाव के लिए छह उम्मीदवार मैदान में हैं. एक सीट पर कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है.  चौथी सीट जीतने के लिए पर्याप्त संख्या में वोट नहीं होने के बावजूद, राज्य के सभी तीन राजनीतिक दलों - भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) ने इस सीट के लिए उम्मीदवार खड़े किए हैं.  राज्य से राज्यसभा चुनाव के लिए छह उम्मीदवार मैदान में हैं - भाजपा से केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, कन्नड़ फिल्म अभिनेता से नेता बने जग्गेश और निवर्तमान विधानपरिषद सदस्य (एमएलसी) लहर सिंह सिरोया, जबकि कांग्रेस से पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश और राज्य महासचिव मंसूर अली खान और जद (एस) के पूर्व सांसद डी कुपेंद्र रेड्डी शामिल हैं.  

उम्मीदवारों में सीतारमण और जयराम रमेश राज्य से फिर से चुनाव लड़ रहे हैं. जद (एस) द्वारा संसद के उच्च सदन के लिए रेड्डी के निर्वाचन को सुनिश्चित करने के लिए समर्थन मांगने के बावजूद, कांग्रेस ने नामांकन पत्र वापस लेने के अंतिम दिन शुक्रवार को अपने दूसरे उम्मीदवार खान का नामांकन वापस नहीं लिया और अपने सभी विधायकों को पार्टी के उम्मीदवारों को वोट देने के लिए एक व्हिप जारी किया है.  जद (एस) ने धर्मनिरपेक्षता का आह्वान करके और सांप्रदायिक ताकतों को दूर रखने के लिए कांग्रेस का समर्थन मांगा.  ऐसा बताया जाता है कि जद (एस) प्रमुख एच डी देवेगौड़ा ने इस संबंध में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी चर्चा की थी. 

पार्टी के दूसरे उम्मीदवार के रूप में खान के नाम की घोषणा कांग्रेस द्वारा एक आश्चर्यजनक कदम है, क्योंकि उसके पास सिर्फ एक सीट जीतने के लिए पर्याप्त वोट हैं.  इस कदम के बाद, सत्तारूढ़ भाजपा ने भी सिरोया की उम्मीदवारी की घोषणा की, जबकि उसके पास केवल दो सीट जीतने के लिए पर्याप्त संख्या बल है.  भाजपा से राज्यसभा सदस्य निर्मला सीतारमण और के सी राममूर्ति और कांग्रेस के जयराम रमेश का कार्यकाल 30 जून को समाप्त होने वाला है.  वहीं, एक सीट कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य ऑस्कर फर्नांडीस का पिछले साल निधन होने से खाली है.  इस वजह से राज्य की चार राज्यसभा सीट के लिये चुनाव कराने की जरूरत पड़ी है. 

राज्य से किसी उम्मीदवार को जीतने के लिए 45 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है, और विधानसभा में अपनी ताकत के आधार पर भाजपा दो और कांग्रेस एक सीट जीत सकती है.  मतों की गिनती 10 जून को मतदान के बाद उसी शाम 5 बजे होगी.  आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि क्योंकि चौथी सीट के लिए तीन उम्मीदवार हैं और उनमें से किसी के पास जीतने के लिए पर्याप्त संख्या में वोट नहीं हैं और ऐसे में ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है जहां जरूरत पड़ने पर दूसरे और तीसरे अधिमान्य मतों की गिनती करनी पड़ सकती है. 

कांग्रेस विधायक दल के नेता सिद्धरमैया ने एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘हमें अपने उम्मीदवार (खान) का नामांकन क्यों वापस लेना चाहिए? हमने उन्हें मैदान में उतारा है, क्योंकि हम जीतना चाहते हैं. '' उन्होंने ‘क्रॉस वोटिंग' की संभावना की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘हम उम्मीद करते हैं कि विधायक अपने विवेक से वोट करेंगे.  मैं अब आपको यह नहीं बता सकता कि हमें कौन वोट देगा. '' जद (एस) नेता एच. डी. रेवन्ना ने कहा कि अभी इंतजार करना होगा और देखना होगा कि मतदान के दिन क्या होता है, और उनकी पार्टी को उम्मीद है कि कांग्रेस धर्मनिरपेक्ष ताकतों का समर्थन करने की अपनी बात पर कायम रहेगी.  हालांकि, भाजपा नेताओं ने चार में से तीन सीट पर जीत का भरोसा जताया है. 




 

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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