18 जुलाई 2019 की सुबह. चेन्नई का एक नामी अस्पताल. वेंटिलेटर पर सांसे गिनता एक 72 साल का बुजुर्ग. चेहरे पर ऑक्सीजन मास्क, पर रूह पर एक कत्ल का बोझ. ठीक नौ दिन पहले यह शख्स एम्बुलेंस में लेटकर कोर्ट पहुंचा था. उम्रकैद की सजा काटने. पर जेल की कोठरी से पहले ही मौत ने इसके दरवाजे पर दस्तक दे दी. इस शख्स के जाने के बाद भी आज दुनिया के 22 देशों में लोग इसके रेस्टोरेंट में मजे से इडली-डोसा खा रहे हैं. नाम है 'सरवणा भवन'. यह कहानी किसी फिल्मी विलेन की नहीं, बल्कि उसी रेस्टोरेंट के मालिक पी. राजगोपाल की है, जिसने एक ज्योतिषी के कहने पर अपनी हवस के लिए एक बेगुनाह की जान ले ली. एक गरीब किसान का बेटा कैसे 'डोसा किंग' बना और कैसे उसके सिर चढ़े पागलपन ने 30 साल के एक नौजवान को मौत के घाट उतार दिया, आइए जानते हैं.
टेबल साफ करने से 'डोसा किंग' तक का सफर
तमिलनाडु के एक छोटे से गांव पुण्ययाड़ी में, 1947 में प्याज बेचने वाले एक गरीब किसान के घर राजगोपाल का जन्म हुआ. सातवीं के बाद पढ़ाई छूटी, गरीबी से तंग आकर चेन्नई भागे. जेब खाली थी, तो एक रेस्टोरेंट में टेबल पोंछने और जूठे बर्तन उठाने का काम मिला. फर्श पर सोए, पाई-पाई बचाई और फिर खुद की किराने की दुकान खोली.
एक दिन दुकान पर आए एक भूखे सेल्समैन ने राजगोपाल के दिमाग की बत्ती जला दी. उन्हें समझ आया कि चेन्नई में अच्छे खाने का बाजार खाली है. अपने अंधविश्वास के चलते उन्होंने ज्योतिषी से पूछा, जिसने कहा 'अग्नि' से जुड़ा काम करो. राजगोपाल ने केके नगर में एक डूबता हुआ रेस्टोरेंट खरीदा और 14 दिसंबर 1981 को खड़ा किया अपना पहला 'सरवणा भवन'. बेहतरीन स्वाद, कम दाम और गजब की साफ-सफाई. चेन्नई की जनता इस जादू पर फिदा हो गई. देखते ही देखते होटल के बाहर लंबी लाइनें लगने लगीं.

कर्मचारियों का मसीहा या शातिर दिमाग?
राजगोपाल अपने कर्मचारियों के लिए भगवान थे. बीमारी का खर्च, बेटियों की शादी का फंड, सब कंपनी देती थी. स्टाफ उन्हें प्यार से 'अन्नाची' (बड़ा भाई) कहता था. 1990 तक राजगोपाल अमीर और बेहद रसूखदार हो चुके थे, लेकिन इसी रुतबे ने उन्हें अहंकारी बना दिया. उन्हें लगने लगा कि वह जो चाहेंगे, पा लेंगे. कानून और समाज उनकी जेब में हैं.
वो सनक... जिसने सब तबाह कर दिया
राजगोपाल दो शादियां कर चुके थे, पर उनकी नजर अपने ही होटल के असिस्टेंट मैनेजर की बेटी जीवा ज्योति पर टिक गई. लड़की राजगोपाल से उम्र में तीस साल छोटी थी. ज्योतिषी ने आग में घी डालते हुए कहा, 'इस लड़की से तीसरी शादी कर लो, दुनिया के सबसे अमीर आदमी बन जाओगे.'
बस, यहीं से शुरू हुआ बर्बादी का खेल. राजगोपाल ने लड़की के परिवार को महंगे तोहफे और सोने के जेवर भेजना शुरू किया, लेकिन जीवा ज्योति का दिल धड़कता था प्रिंस संत कुमार के लिए-एक साधारण मैथ ट्यूटर. अप्रैल 1999 में दोनों ने भागकर शादी कर ली. यह बात 'डोसा किंग' के अहंकार पर करारा तमाचा थी. उसने पहले संत कुमार को बदनाम करने के लिए उसे एड्स होने की अफवाह उड़ाई, फिर तंत्र-मंत्र का सहारा लिया. जब बात नहीं बनी, तो ताकत और पैसे का नंगा नाच शुरू हुआ.

बीच सड़क पर अपहरण और 5 लाख की सुपारी
28 सितंबर 2001 की आधी रात. राजगोपाल खुद गुंडों के साथ संत कुमार के घर पहुंचे और अल्टीमेटम दिया. डरकर भाग रहे इस जोड़े को सरवणा भवन के गुंडों ने रास्ते से उठाया और गोदाम में बंद कर बेरहमी से पीटा. बेबस जीवा रोती रही, गिड़गिड़ाती रही. पुलिस कमिश्नर तक शिकायत पहुंची, लेकिन 'अन्नाची' के रसूख के आगे वर्दी नतमस्तक थी. थानेदार से लेकर अफसर तक वहां मुफ्त की रोटियां तोड़ते थे, इसलिए कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई.
इसके बाद राजगोपाल ने अपने वफादार डेनियल को बुलाया और संत कुमार को रास्ते से हटाने के लिए 5 लाख रुपये की सुपारी दे दी. डेनियल ने पैसे तो रख लिए, पर संत कुमार पर तरस खाकर उसे ₹5,000 देकर मुंबई भगा दिया. लेकिन संत कुमार अपनी पत्नी से दूर नहीं रह सका. वह वापस चेन्नई लौटा और दोनों सीधे राजगोपाल के सामने सरेंडर करने पहुंच गए. यह उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल साबित हुई.
आखिरी खूनी खेल और 18 साल की कानूनी जंग
जब राजगोपाल ने जिंदा संत कुमार को अपने सामने देखा, तो उसका पारा चढ़ गया. 26 अक्टूबर 2001 को संत कुमार को गाड़ी में ठूंसकर अगवा कर लिया गया और राजगोपाल के इशारे पर घने जंगलों में ले जाकर उसकी गला दबाकर हत्या कर दी गई. 31 अक्टूबर को कोडाईकनाल की पहाड़ियों में एक अज्ञात लाश मिली-ये प्रिंस संत कुमार थे.
जीवा ज्योति ने हार नहीं मानी. 20 नवंबर 2001 को आखिरकार केस दर्ज हुआ. रसूखदार राजगोपाल ने गवाहों को खरीदने, अखबारों में जीवा के चरित्र पर कीचड़ उछालने की पूरी कोशिश की, लेकिन सच नहीं दबा. 2004 में निचली अदालत ने राजगोपाल को 10 साल की सजा सुनाई. मामला जब मद्रास हाई कोर्ट पहुंचा, तो कोर्ट ने इसे सोची-समझी हत्या मानते हुए सजा को उम्रकैद में बदल दिया.
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