महाराष्ट्र की राजनीति और विकास के रोडमैप में सबसे बड़ा नाम शरद पवार ने अपनी मुंबई की कायापलट और अपने पारिवारिक संघर्ष को लेकर बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. पवार ने बताया कि जब वे राज्य के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने महाराष्ट्र से उद्योगों के पलायन को न सिर्फ रोका, बल्कि मुंबई को सिंगापुर की तर्ज पर एक ग्लोबल फाइनेंशियल हब में तब्दील कर दिया. आज जिसे पूरी दुनिया बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) के नाम से जानती है, उसे एक आर्थिक शहर के रूप में विकसित करने की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है.
सिंगापुर मॉडल और 1 रुपये में 50 एकड़ जमीन पर क्या बोले?
शरद पवार ने मुंबई के आर्थिक इतिहास का जिक्र करते हुए बताया कि एक दौर ऐसा था जब शहर में करीब 120 टेक्सटाइल मिलें चलती थीं. जब मिल मालिकों को लगने लगा कि कपड़ा उद्योग अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है, तो वे अपने कारोबार को बदलना चाहते थे. उस वक्त अगर कड़े फैसले नहीं लिए जाते, तो उद्योग महाराष्ट्र से बाहर चले जाते.
इसी खतरे को देखते हुए उन्होंने सिंगापुर के आर्थिक मॉडल का अध्ययन किया और मुंबई में एक विश्वस्तरीय 'फाइनेंशियल सिटी' बनाने की नींव रखी.
पवार ने याद करते हुए बताया कि उस दौरान एक बड़े बिल्डर उनके पास 25 एकड़ जमीन मांगने आए थे. उन्होंने उस बिल्डर से कहा, "मैं तुम्हें एक रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से जमीन दूंगा, लेकिन शर्त यह है कि 25 नहीं, 50 एकड़ जमीन लेनी होगी और काम बड़ा करना होगा."
बस इसी फैसले ने बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) की तस्वीर बदल दी. आज देश-दुनिया के लगभग सभी प्रमुख बैंकों, वित्तीय संस्थानों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मुख्यालय बीकेसी में स्थापित हैं.
'मां ने सिखाया- नौकरी नहीं, अपना कारोबार करो'
अपने व्यवसायिक और राजनीतिक विजन का श्रेय शरद पवार ने अपनी मां को दिया. उन्होंने कहा कि उनकी मां की सीधी और साफ सीख थी, "किसी की नौकरी करने मत जाओ, अपना खुद का व्यवसाय खड़ा करो."
पवार ने बताया कि उनके परिवार में जो भी संस्कार और हिम्मत आई, वह उनकी मां की ही देन थी. उन्होंने अपने भाइयों की जिंदगी के कई अनसुने किस्से भी साझा किए.
उन्होंने बताया कि उनके भाई वसंत राव अपनी पढ़ाई पूरी कर एक सफल वकील बने.
- अप्पासाहेब पवार: प्रवरानगर में नौकरी करते थे. पवार ने माना कि अप्पासाहेब की वजह से ही उन्हें खेती, किसानों के मुद्दे और चीनी उद्योग की जमीनी समझ हासिल हुई.
- अनंतराव: वे स्वभाव से बेहद आक्रामक, तेजतर्रार और स्वाभिमानी थे. फर्ग्युसन कॉलेज में पढ़ाई के पहले ही दिन जब प्रिंसिपल ने किसानों का मजाक उड़ाया, तो अनंतराव ने अपनी देशी भाषा में उन्हें जमकर खरी-खोटी सुना दी. इस घटना के बाद उन्हें कॉलेज से निकाल दिया गया था.
- माधव राव: वे इंजीनियर बनना चाहते थे, लेकिन 60 प्रतिशत अंक होने के कारण उन्हें कॉलेज में दाखिला नहीं मिला. उन्होंने हार नहीं मानी, तहसीलदार कार्यालय में क्लर्क की नौकरी की, फिर इंग्लैंड गए और वहां से अपनी इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की.
- सूर्यकांत भाऊ: उन्होंने पहले मंत्रालय में नौकरी की और बाद में इंग्लैंड जाकर टाउन प्लानिंग की पढ़ाई पूरी की.
- प्रताप भाऊ: वे आज मशहूर 'सकाल' मीडिया ग्रुप और अखबार का सफल संचालन कर रहे हैं.
एक ही मां की तीन संतानों को 'पद्म पुरस्कार'
शरद पवार ने गर्व से कहा कि उनकी मां की सीख थी कि जो भी काम हाथ में लो, उसमें अपना 100 प्रतिशत ध्यान लगा दो. इसी समर्पण का नतीजा है कि दुनिया में ऐसा कोई दूसरा उदाहरण नहीं मिलता जहां एक ही मां की तीन-तीन संतानों को भारत सरकार के सर्वोच्च 'पद्म पुरस्कारों' से सम्मानित किया गया हो.
'साहस के बिना उद्योग नहीं बढ़ते'
नए उद्यमियों को संदेश देते हुए शरद पवार ने कहा कि फैसले हमेशा हिम्मत और साहस के साथ लेने चाहिए. जब तक एक-दूसरे की मदद करने की भावना नहीं होगी, तब तक कारखाने और व्यापार आगे नहीं बढ़ सकते. अगर सही योजना और सटीक सोच हो, तो दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है.
(यशपाल सोनकांबले का इनपुट)
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