- पत्रकार सतिंदर बैंस ने जसवंत सिंह खालड़ा हत्या मामले में मुख्य गवाह कुलदीप सिंह का इंटरव्यू लेकर कई खुलासे किए
- जसवंत सिंह खालड़ा की हत्या मामले में प्रमुख आरोपी अभी भी फरार है, उसने जमानत के बाद अदालत में सरेंडर नहीं किया
- के.पी.एस. गिल पर जसवंत सिंह खालड़ा की हत्या के आदेश देने का आरोप है, लेकिन कोई ठोस सबूत नहीं मिला- बैंस
सतलुज फिल्म विवाद को लेकर एनडीटीवी ने वरिष्ठ पत्रकार सतिंदर बैंस से विशेष बातचीत की. सतिंदर बैंस वही पत्रकार हैं, जिन्होंने पहली बार उस मुख्य गवाह का इंटरव्यू लेकर ये खुलासा किया था कि सामाजिक कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की हत्या कैसे हुई. ये गवाह पंजाब पुलिस का कर्मचारी कुलदीप सिंह था, जो इस कथित फर्जी मुठभेड़-हत्या मामले में मुख्य आरोपी एसएचओ का ड्राइवर था.
सतिंदर बैंस ने पहली बार एनडीटीवी पर घटनाक्रम को पूरे विस्तार से बताया. उन्होंने बताया कि मुख्य गवाह कुलदीप सिंह तक वे कैसे पहुंचे और उसका बयान कैसे दर्ज किया गया, जिसने बाद में आरोपियों की सजा सुनिश्चित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने कहा कि इस मामले का एक प्रमुख आरोपी अभी भी फरार है. उसे 2023 में जमानत मिल गई थी, लेकिन उसके बाद उसने अदालत में आत्मसमर्पण नहीं किया.
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उन्होंने बताया कि जसवंत सिंह खालड़ा का कथित रूप से कैसे अपहरण किया गया, उन्हें यातनाएं दी गईं और फिर उनकी हत्या कर दी गई. उनका कहना है कि सरकार द्वारा फिल्म पर प्रतिबंध लगाना एक गलती थी, क्योंकि इससे फिल्म और अधिक लोकप्रिय हो गई. उन्होंने यह भी कहा कि अकाली दल चुनाव से पहले इस फिल्म से राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है.

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उन्होंने कहा कि 1990 के शुरुआती सालों में हिंदू भी मारे गए थे और आम लोग उग्रवादियों के डर में जी रहे थे. उनके अनुसार, उस समय का माहौल लगभग तालिबान शासन के जैसा था. 1990 के दशक में आतंकवाद से लड़ने के नाम पर पुलिस द्वारा कई मानवाधिकार उल्लंघन भी किए गए.
सतिंदर बैंस ने बताया कि उन्होंने सतलुज फिल्म देखी है और उनके अनुसार फिल्म में आतंकवाद या खालिस्तान के समर्थन जैसा कुछ भी नहीं है. उन्होंने इस पूरे विवाद को निराधार बताया.
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