- संजय निषाद ने निषाद समाज को ओबीसी से हटाकर अनुसूचित जाति में आरक्षण देने की मांग की है
- उन्होंने कहा कि नौ फीसदी कोटा ओबीसी से हटाकर अनुसूचित जाति के आरक्षण में शामिल किया जाना चाहिए
- संजय निषाद ने भाजपा पर निषाद समाज के आरक्षण मुद्दे पर पहल न करने का आरोप लगाया है
उत्तर प्रदेश में भाजपा के साथ गठबंधन सरकार में शामिल निषाद पार्टी के नेता संजय निषाद ने आरक्षण को लेकर बड़ी टिप्पणी की है. उन्होंने NDTV से बातचीत में कहा कि निषाद समाज को ओबीसी से हटाकर अनुसूचित जाति में डालकर आरक्षण देना चाहिए. इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि 9 फीसदी कोटा ओबीसी से हटाकर एससी आरक्षण में डालना चाहिए. इस दौरान संजय निषाद ने भाजपा पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि सपा, बसपा और कांग्रेस ने निषाद समाज के साथ न्याय नहीं किया था. इसी के चलते उन्हें सरकार से जाना पड़ा और अब भाजपा भी दोषी है, जो उस पर पहल नहीं कर रही है.
इस दौरान उन्होंने ओबीसी आरक्षण को लेकर भी बात की और कहा कि 27 फीसदी कोटे में से 99 फीसदी हिस्सा एक ही जाति के लोगों के पास है. संजय निषाद ने कहा आरक्षण में कोटा होना चाहिए. हम आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा के साथ आए थे. उन्होंने कहा कि भाजपा ने यूपी में 43 सीट आरक्षण और संविधान के नाम पर खो दीं. उन्होंने पुरानी बात का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा ने भी कहा था कि हम निषाद समाज को अनुसूचित जाति में आरक्षण देंगे. भाजपा जब सत्ता में थी तो आरक्षण की आवाज उठा रही थी, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ.
उन्होंने भाजपा को सत्ता से बाहर होने की चेतावनी दी. संजय निषाद ने कहा कि मैं तो निषादों के आंदोलन का नेता हूं. मैंने उनकी आवाज उठाई है. कांग्रेस, सपा और बसपा को सत्ता से बाहर इसलिए होना पड़ा क्योंकि अनुसूचित जातियों की कई जातियों को भी ओबीसी में डाला गया और उन्हें लूटा गया. कहीं ऐसा तो नहीं कि आप डील करना चाहते हैं? इस पर संजय निषाद ने कहा कि हम गरीब भले हैं, लेकिन वफादार हैं. हमने इस देश के लिए भगवान राम को पार उतारा और उन्होंने हमें गले लगाया. वह जब वापस आए तो किसी को गले नहीं लगाया, लेकिन निषाद राज से मिले.
'यूपी में 14 लाख आरक्षित पद, इनमें 13.5 लाख तो हाथी और साइकिल वालों के पास'
संजय निषाद ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 28 लाख नौकरियां हैं. इनमें से 14 लाख आरक्षित हैं. इनमें 7 लाख नौकरियां साइकिल वालों पर हैं तो 6.5 लाख हाथी वालों पर हैं. फिर बाकी 50 हजार में अन्य जातियों के लोग रहते हैं. संजय निषाद ने कहा कि महिलाओं को आरक्षण मिल गया है. सवर्णों को आरक्षण मिला है. आखिर निषादों का नंबर कब आएगा. इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि हमारे लिए योगी आदित्यनाथ मार्गदर्शक हैं और पूजनीय हैं. यदि यह फैसला लागू नहीं हुआ तो क्या आप भाजपा का साथ छोड़ देंगे. इस पर संजय निषाद ने कहा कि आरक्षण के मसले पर हम स्वतंत्र हैं.
'मेरी रैलियों में पैसे लेकर लोग नहीं आते, हम आंदोलन वाले नेता हैं'
योगी सरकार के मंत्री ने कहा कि मेरी रैलियों में लोग बुलाने से नहीं आते. पैसे लेकर नहीं आते हैं बल्कि खुद आते हैं. उन्होंने कहा कि हमारे समाज ने मंडल कमिशन के लिए सबने लड़ाई लड़ी थी, लेकिन नौकरियों पर किसका कब्जा है. हमारे लोग तो झोपड़ियों में रहते हैं. हम आरक्षण की भीख नहीं मांग रहे हैं बल्कि हक ही मांग रहे हैं. संजय निषाद ने कहा कि हमने अंग्रेजों और मुगलों से लड़ाई लड़ी थी. यदि इस देश में गद्दार होंगे तो हम उनसे भी लड़ेंगे. संजय निषाद ने यह भी कहा कि भाजपा की राष्ट्रीय टीम में भी कोई निषाद समाज का नेता होना चाहिए.
पहले भी ऐसा कह चुके हैं संजय निषाद, मंच से ही रो दिए थे
यह पहला मौका नहीं है, जब संजय निषाद ने आरक्षण के मसले पर योगी सरकार को तेवर दिखाए हैं. इससे पहले मार्च में भी वह एक रैली के दौरान भावुक हो गए थे. उन्होंने मंच से रोते हुए कहा था कि यदि आरक्षण वाली मांग पूरी नहीं हुई तो मैं मंत्री पद ही छोड़ दूंगा. इससे पहले भी वह कई बार ऐसी बातें कर चुके हैं. मार्च में संजय निषाद ने कहा था कि हमारे वोट ले लिए जाते हैं, लेकिन हमारी बहनों और बेटियों की गरिमा भंग की जाती है.
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