देशभर में नए-नए हाइवे और एक्सप्रेस बन रहे हैं. राजधानी दिल्ली से मुंबई और कोलकाला जैसे शहरों तक एक्सप्रेसवे बनाए जा रहे हैं. यूपी सबसे ज्यादा एक्सप्रेसवे वाला राज्य बन चुका है. वहीं बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में भी हाई स्पीड कॉरिडोर बन रहे हैं, जो लोगों का सफर आसान और सुपरफास्ट बना रहे हैं. आज हम एक ऐसे हाईस्पीड कॉरिडोर के बारे में बता रहे हैं, जो बिहार और झारखंड को जोड़ेगा. इस हाइवे से 9 घंटे का सफर महज 60 मिनट में पूरा हो सकेगा. इसकी सबसे बड़ी खासियत गंगा नदी पर बन रहा पुल होगा, दो देश के सबसे लंबे पुलों में से एक होगा. हम बात कर रहे हैं 'साहिबगंज-मनिहारी गंगा पुल प्रोजेक्ट की.' आइए इस प्रोजेक्ट की खासियत बताते हैं.
क्या है प्रोजेक्ट पर ताजा अपडेट?
साहिबगंज-मनिहारी गंगा पुल प्रोजेक्ट को अक्तूबर 2024 तक पूरा होना था, लेकिन गंगा नदी की कठिन परिस्थितियों और बाढ़ की चुनौतियों के कारण अब NHAI ने इसे दिसंबर 2026 तक पूरी तरह चालू करने का लक्ष्य रखा है. फिलहाल इसका करीब 80% पूरा हो चुका है.

क्या है इस कॉरिडोर की खासियत?
- इस पूरे कॉरिडोर की लंबाई करीब 22 किलोमीटर है, जो झारखंड में NH-133B और बिहार में NH-131A के बीच कनेक्टिविटी देगा.
- गंगा नदी पर बन रहा मुख्य पुल 6 किलोमीटर लंबा है, जिसे एडवांस 'एक्स्ट्रा-डोज्ड'टेक्नोलॉजी से 4-लेन चौड़ा बनाया जा रहा है.
- यह पूरा होने पर भारत के सबसे लंबे नदी पुलों में से एक होगा.
- प्रोजेक्ट में बिहार की तरफ 5.5 किलोमीटर लंबा मनिहारी बाईपास और अन्य एप्रोच सड़कों का निर्माण भी शामिल है.
- इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 1970 करोड़ रुपये है.

बिहार-झारखंड के बीच बनेगा नया रास्ता
यह गंगा पुल न केवल दो जिलों को बल्कि कई राज्यों और पड़ोसी देशों को भी एक सूत्र में पिरोएगा. फिलहाल झारखंड के साहिबगंज और बिहार के कटिहार-मनिहारी के बीच लोग नावों और फेरी पर निर्भर हैं. यहां गंगा नदी पर पुल बनने के बाद लोगों को सीधे तौर पर फायदा होगा. इस पुल के चालू होने से साहिबगंज और पूर्णिया के बीच यात्रा का समय लगभग 9 घंटे से घटकर मात्र 1 घंटा रह जाएगा.
यह कॉरिडोर झारखंड के संथाल परगना को बिहार, पश्चिम बंगाल और असम, त्रिपुरा जैसे पूर्वोत्तर राज्यों से सीधे जोड़ेगा. इसके अलावा यह पुल पड़ोसी देशों जैसे नेपाल, भूटान और बांग्लादेश के साथ सड़क मार्ग से व्यापारिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने में रणनीतिक भूमिका निभाएगा.

किसानों को भी फायदा
इस कॉरिडोर के शुरू होने के बाद स्थानीय किसानों को सीधे तौर पर फायदा होगा. पुल बनने के बाद स्थानीय किसान अपनी फसल को आसानी से मंडियों तक ले जा सकेंगे. स्थानीय उद्योगों के लिए लॉजिस्टिक लागत कम होगी और नए औद्योगिक क्षेत्रों का विकास होगा. इसके अलावा पर्यटकों के लिए संथाल पर गना और झारखंड की पहाड़ियों तक पहुंचना अब सुगम होगा, जिससे पर्यटन रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.
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