मालदा जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव से ठीक पहले पश्चिम बंगाल और झारखंड की सीमा पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. मालदा के 26 नवनिर्वाचित जिला परिषद सदस्य इन दिनों झारखंड के पाकुड़ स्थित एक होटल में ठहरे हुए हैं. शुक्रवार देर रात मालदा पुलिस के होटल पहुंचने और सदस्यों से पूछताछ करने के बाद विवाद खड़ा हो गया. जिला परिषद सदस्यों ने इसे राजनीतिक दबाव की कार्रवाई बताया, जबकि पुलिस का कहना है कि वह एक शिकायत के आधार पर जांच के लिए वहां पहुंची थी. मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है. NDTV के लिए जयदेव कुमार की रिपोर्ट.
अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव से पहले बढ़ी हलचल
मालदा जिला परिषद में 6 अक्टूबर को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव होना है. इससे पहले 26 नवनिर्वाचित जिला परिषद सदस्य झारखंड के पाकुड़ स्थित एक होटल में ठहरे हुए हैं. मालदा जिला परिषद की कुल 43 सीटों में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने 34 सीटों पर जीत दर्ज की है. कांग्रेस को 5 और भाजपा को 4 सीटें मिली हैं. चुनाव से पहले सदस्यों के एक साथ होटल में ठहरने की घटना को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं.
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देर रात होटल पहुंची मालदा पुलिस
शुक्रवार देर रात मालदा पुलिस पाकुड़ के उस होटल में पहुंची जहां जिला परिषद सदस्य ठहरे हुए थे. पुलिस के पहुंचते ही होटल परिसर में तनाव की स्थिति बन गई. सूचना मिलने पर पाकुड़ नगर थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने में जुट गई. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इस दौरान पुलिस और कुछ जिला परिषद सदस्यों के बीच बहस और धक्का-मुक्की भी हुई.
सदस्यों ने लगाया दबाव बनाने का आरोप
नवनिर्वाचित जिला परिषद सदस्य सागरिका सरकार ने आरोप लगाया कि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव से पहले सदस्यों पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने दावा किया कि पुलिस की कार्रवाई राजनीतिक प्रभाव में की गई. होटल में मौजूद अन्य सदस्यों ने भी कहा कि वे अपनी इच्छा से पाकुड़ पहुंचे हैं और किसी तरह के दबाव या बंधन में नहीं हैं. सदस्यों ने पुलिस के साथ जाने से भी इनकार कर दिया.
महिला सदस्यों से दुर्व्यवहार का आरोप
जिला परिषद सदस्यों ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान महिला सदस्यों के साथ दुर्व्यवहार किया गया. हालांकि इन आरोपों पर पुलिस की ओर से तत्काल कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. स्थिति बिगड़ती देख पाकुड़ नगर थाना प्रभारी अनिल गुप्ता मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों से बातचीत कर मामला शांत कराने का प्रयास किया.
कांग्रेस नेता भी पहुंचे होटल
हंगामे की सूचना मिलने के बाद कई स्थानीय कांग्रेस नेता भी होटल पहुंच गए. उन्होंने पश्चिम बंगाल से आए जिला परिषद सदस्यों के पक्ष में समर्थन जताया और कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों पर किसी तरह का दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए. होटल परिसर में देर रात तक राजनीतिक चर्चाओं और गतिविधियों का दौर जारी रहा.
शिकायत के आधार पर पहुंची पुलिस
एनडीटीवी को मिली जानकारी के अनुसार पूरा मामला एक शिकायत से जुड़ा है. बताया गया है कि जिला परिषद सदस्य मंगली चौधरी के पति ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी पत्नी को कुछ लोग जबरन अपने साथ ले गए हैं. शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की और मोबाइल लोकेशन के जरिए पाकुड़ स्थित होटल तक पहुंची.
‘रिजॉर्ट पॉलिटिक्स' की चर्चा तेज
चुनाव से पहले जिला परिषद सदस्यों का दूसरे राज्य में एक होटल में ठहराया जाना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है. विपक्षी दल और स्थानीय राजनीतिक पर्यवेक्षक इस घटनाक्रम की तुलना देश के विभिन्न राज्यों में चुनाव से पहले देखने को मिलने वाली कथित 'रिजॉर्ट पॉलिटिक्स' से कर रहे हैं. हालांकि होटल में मौजूद जिप सदस्यों का कहना है कि उनका वहां ठहरना पूरी तरह स्वैच्छिक है और इसे किसी राजनीतिक दबाव या खरीद-फरोख्त से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए.
अब 6 अक्टूबर पर नजर
मालदा जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव 6 अक्टूबर को होना है. ऐसे में पाकुड़ होटल प्रकरण ने चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है. अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि चुनाव के दिन जिला परिषद की सत्ता किसके हाथ में जाती है और पाकुड़ की यह घटना आगे क्या राजनीतिक असर छोड़ती है.
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