नई दिल्ली: पाकिस्तान की सेना के मीडिया विंग यानी DG ISPR अहमद शरीफ चौधरी का विवादित बयान चर्चा में है. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अहमद शरीफ ने मुस्लिमों को काफिरों से दूर रहने की नसीहत दे डाली. वायरल वीडियो में वो सार्वजनिक तौर पर कट्टरपंथ का सहारा लेते हुए कहते हैं, ‘ईमान वालों को छोड़कर काफिरों को दोस्त ना बनाओ, अगर तुम ऐसा करोगे तो प्रॉब्लम है, फिर तुम मुस्लिम्स में नहीं आते'. अहमद ने कहा, ‘अफगान कहते हैं कि उनका और भारतीयों का DNA एक जैसा है. अगर ऐसा है तो अफगान मुसलमान कैसे हो सकते हैं'? बता दें कि अहमद के बयान ने न सिर्फ कूटनीतिक नियमों की धज्जियां उड़ा दी हैं बल्कि पाकिस्तान में रह रहे अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
अहमद ने कहा, ''अफगानों का DNA भारतीयों जैसा है इसलिए वे मुसलमान नहीं हो सकते''. यह बयान न केवल अफगानिस्तान के साथ उसके बिगड़ते रिश्तों की आग में घी डालने जैसा है, बल्कि खुद पाकिस्तान के भीतर सांस ले रहे अल्पसंख्यक हिंदुओं की जिंदगी को और जोखिम में डालने वाला है.
अहमद ने बलूचिस्तान के मौजूदा हालात और वहां हो रहे विद्रोह को लेकर आरोप लगाया कि बलूचिस्तान में जारी हिंसा के पीछे ‘बाहरी ताकतों का पावर प्ले' है. पाकिस्तान सेना के मुताबिक, ‘बलूचिस्तान के एलीट वर्ग और सरदारों का एक कॉमन एजेंडा है. बाहरी ताकतों को ये बखूबी समझ आ गया है कि बलूचिस्तान सिर्फ रणनीतिक रूप से ही नहीं, बल्कि कुदरती संसाधनों और ‘ब्लू इकोनॉमी' से भी भरा पड़ा है. वो जानते हैं कि जब बलूचिस्तान तरक्की करेगा तो पूरा पाकिस्तान और ये क्षेत्र आगे बढ़ेगा. यही बात बाहरी ताकतों को हजम नहीं हो रही, इसलिए वो आतंकवादियों और यहां के सरदारों से हाथ मिलाकर सीधे तौर पर दखल दे रहे हैं'.
उन्होंने कहा, "TTP और अफगान सरकार का मुख्य हथियार आतंकवाद है. वे अपनी अर्थव्यवस्था, सरकार और यहां तक कि कूटनीति भी आतंक के दम पर चलाते हैं." इसके बाद उन्होंने एक और तंज कसा कि "भारत और अफग़ानिस्तान में क्या समानता है? बस उनका DNA और अगर कोई और चीज है, तो वह है आतंकवाद."
पाकिस्तान ने मोहरे की तरह किया तालिबान का इस्तेमाल
जबकि हकीकत कुछ और है. पाकिस्तान ने अपने फ़ायदे के लिए तालिबान का इस्तेमाल मोहरे की तरह किया, लेकिन जब अगस्त 2021 में तालिबान सत्ता में लौटा, तो उन्हें पाकिस्तान का असली चेहरा दिख गया. अफग़ानिस्तान में खाने-पीने की भारी कमी के बीच ऐसी खबरें आईं कि पाकिस्तान से भेजा गया गेहूं सड़ा हुआ और खाने लायक नहीं था. इसके उलट, अफगान लोगों ने अच्छी क्वॉलिटी का 50,000 मीट्रिक टन इमरजेंसी गेहूं भेजने के लिए भारत की खुलकर तारीफ की. इन घटनाओं से उन्हें यह समझने में मदद मिली कि उनका असली शुभचिंतक कौन है- भले ही पाकिस्तान के साथ सीमा विवाद बढ़ गए थे.
DG ISPR ने खुद इस विरोधाभास को माना कि "एक सेक्युलर-नेशनलिस्ट है, तो दूसरा कट्टर धार्मिक चरमपंथी. फिर भी, दोनों मिलकर पाकिस्तान के खिलाफ़ ऑपरेशन चला रहे हैं." बलूचिस्तान का दर्द, बहाना "बाहरी ताकतें" बलूचिस्तान में जारी बगावत के लिए DG ISPR ने "बाहरी ताकतों" को जिम्मेदार ठहराया.
"भारत", "हिंदू" और "काफ़िर" की आड़ लेती है पाकिस्तानी सेना
पाकिस्तान का इतिहास साफ़ है. जब भी सेना अंदरूनी मोर्चे पर नाकाम होती है, तो वह "भारत", "हिंदू" और "काफ़िर" की आड़ लेती है. लेकिन इस बार मामला ज़्यादा गंभीर है. सेना के आधिकारिक मंच से नफरत भरी बातें (हेट स्पीच) पाकिस्तान में हिंदुओं और दूसरे अल्पसंख्यकों के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं. इससे चरमपंथियों को हमला करने की खुली छूट मिल जाती है."DNA" और "काफिर" वाला दांव खेलने से पाकिस्तान सुरक्षित नहीं होगा. दुनिया ने यह खेल पहले भी देखा है और अब वह इस पर यकीन नहीं करने वाली.
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