राम मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद ट्रस्ट में ही बड़े पैमाने पर बदलाव की तैयारी है. अब राम मंदिर की व्यवस्था संभालने के लिए सीईओ होगा और उसके आवेदन मांगे गए थे. शनिवार को आवेदन करने की आखिरी तारीख थी. राम मंदिर का सीईओ बनने के लिए कुल 2357 आवेदन आए हैं. अब इनकी स्क्रीनिंग होगी और फिर कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा. इस बीच 22 जुलाई को ट्रस्ट की बैठक होने वाली है और उसमें भी इसे लेकर चर्चा हो सकती है. इसके अलावा चढ़ावा चोरी की जांच के बाद आई एसआईटी रिपोर्ट पर भी मीटिंग में बात होगी.
विशेष सूत्रों के अनुसार राम मंदिर के CEO की कुर्सी के लिए देशभर से दावेदारों ने ताल ठोकी है. इस पद की रेस में रिटायर्ड आईएएस, आईपीएस, पीसीएस, पीपीएस, सेना के अधिकारी, सीए शामिल हैं. इसके अलावा खुद को समाजसेवी बताने वाले कई लोगों ने भी आवेदन किया है. अब इन आवेदनों की स्क्रीनिंग की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. इसके लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन हुआ है. जो सभी आवेदनों की स्क्रीनिंग करेगी और फिर अंतिम तौर पर किसी सीईओ के चयन पर भी विचार करेगी.
नए CEO के सामने ट्रस्ट की साख और पारदर्शिता बहाल करने की बड़ी चुनौती होगी. ऐसे में सीईओ के तौर पर किसे चुना जाए, यह भी एक बड़ा सवाल है. इसका हल करना समिति के लिए भी आसान नहीं होगा. राम मंदिर का जो भी सीईओ बनेगा, उस पर सभी की नजरें होंगी. सीईओ कैसे राम मंदिर की व्यवस्था को दुरुस्त करेगा और किस तरह उठने वाले सवालों के जवाब दे सकेगा. यह अहम है और इसीलिए सीईओ की व्यवस्था पर विचार भी किया गया है.
महंत दिनेंद्रदास बोले- मंदिर आने वालों की संख्या बढ़ गई है
इस बीच राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य महंत दिनेंद्रदास महाराज का कहना है कि विवाद के बाद भी यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कमी नहीं आई है. उनका कहना है कि परंपरा के साथ राम मंदिर में पूजा जारी है. समय पर ही पूजा हो रही है. श्रद्धालुओं की संख्या में भी कोई कमी नहीं देखी जा रही. तथ्य यह है कि संख्या में इजाफा ही हो रहा है.
ट्रस्ट से हटाए गए गोपाल राव अयोध्या से ही बाहर निकले
इस बीच राम मंदिर ट्रस्ट से हटाए गए गोपाल राव ने अयोध्या छोड़ दी है. पुलिस और SIT जांच के बीच गोपाल राव के अयोध्या से चले जाने की खबर है. उन्होंने कई लोगों को इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि वह अब अयोध्या में नहीं हैं. हालांकि उन्होंने अपनी वापसी को लेकर कोई जानकारी साझा नहीं की है.गौरतलब है कि हाल ही में ट्रस्ट की एक बैठक में गोपाल राव को उनके पद से हटा दिया गया था. उनके पद से हटने के तुरंत बाद अयोध्या छोड़ने की खबर ने धार्मिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है. उनकी भविष्य की भूमिका को लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया है.
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