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राजस्थान में 'मुन्नाभाई MBBS'... 8वीं पास बना फर्जी डॉक्टर, 100 बेड का अस्पताल खोला, खुद किए कई सारे ऑपरेशन

जालोर के रानीवाड़ा में 8वीं पास नानजीराम चौधरी ने फर्जी MBBS डिग्री की मदद से 100 बेड का अस्पताल खोल लिया. अब उसे गिरफ्तार कर लिया गया है.

राजस्थान में 'मुन्नाभाई MBBS'... 8वीं पास बना फर्जी डॉक्टर, 100 बेड का अस्पताल खोला, खुद किए कई सारे ऑपरेशन
जालोर में फर्जी डॉक्टर बन खड़ा कर दिया इतना बड़ा अस्पताल.
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जालोर:

फिल्म 'मुन्नाभाई MBBS' तो आपने देखी ही होगी. इस फिल्म में संजय दत्त डॉक्टर बनने के लिए फर्जीवाड़ा करते हैं. लेकिन राजस्थान में सामने आई ये कहानी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट नहीं, बल्कि हकीकत है. यहां महज आठवीं पास एक शख्स पर फर्जी डिग्रियों के दम पर डॉक्टर बनने और करीब 100 बेड का अस्पताल चलाने का आरोप है. 

जालोर के रानीवाड़ा में भास्कर हॉस्पिटल चलाने वाले नानजीराम चौधरी ने कथित तौर पर दसवीं-बारहवीं की मार्कशीट से लेकर MBBS और गायनेकोलॉजी के डिप्लोमा तक फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया. आरोप है कि वह अस्पताल में कई ऑपरेशन भी कर चुका है. 

वहीं, दूसरा आरोपी पंकज यादव कजाकिस्तान से MBBS करने के बाद भारत में जरूरी FMGE परीक्षा छह बार पास नहीं कर पाया, तो उसने कथित तौर पर फर्जी MBBS डिग्री का सहारा लिया. SOG ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर इस पूरे फर्जी डॉक्टर नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है.

कैसे शुरू हुआ पूरा खेल?

कहानी की शुरुआत होती है जालोर के रानीवाड़ा से. जहां नानजीराम चौधरी कभी अस्पताल के ओपीडी काउंटर पर मरीजों की पर्चियां काटने का काम करता था, लेकिन कुछ साल बाद उसी अस्पताल का मालिक बन गया. 

जांच के मुताबिक, 2015 में उसने राजदेव हॉस्पिटल खरीद लिया और 2016 में इसका नाम बदलकर भास्कर हॉस्पिटल कर दिया. आज इसी अस्पताल को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.

आरोप है कि नानजीराम महज आठवीं पास है. इसके बावजूद उसने दसवीं और बारहवीं की कथित फर्जी मार्कशीट, MBBS की डिग्री और गायनेकोलॉजी और ऑब्स्टेट्रिक्स का डिप्लोमा हासिल करने के फर्जी दस्तावेज पेश किए. इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में डॉक्टर के रूप में रजिस्ट्रेशन करवाया.

आरोपी नानजीराम और पंकज यादव.

आरोपी नानजीराम और पंकज यादव.
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100 बेड का बना लिया था अस्पताल

SOG के एडीजी विशाल बंसल ने बताया कि जांच में सामने आया है कि नानजीराम ने मुंबई के कॉलेज ऑफ फिजिशियंस एंड सर्जन्स से गायनेकोलॉजी और ऑब्स्टेट्रिक्स के डिप्लोमा से जुड़े दस्तावेज पेश किए थे. लेकिन वेरिफिकेशन करवाने पर डिप्लोमा सर्टिफिकेट, अलॉटमेंट लेटर, पासिंग सर्टिफिकेट और अटेम्प्ट सर्टिफिकेट फर्जी पाए गए. 

जांच के मुताबिक, आरोपी ने अपनी शैक्षणिक योग्यता से जुड़े दस्तावेजों में भी कथित फर्जीवाड़ा किया. जिस शख्स ने कभी अस्पताल में मरीजों की पर्चियां काटीं, उसी पर फर्जी मेडिकल दस्तावेजों के आधार पर डॉक्टर के रूप में रजिस्ट्रेशन करवाने का आरोप है. 

बताया जा रहा है कि भास्कर हॉस्पिटल करीब 100 बेड का है. आरोपी के यहां कई ऑपरेशन किए जाने की जानकारी भी सामने आई है. ऐसे में अब अस्पताल में इलाज कराने वाले मरीजों की सुरक्षा और ऑपरेशन से जुड़े रिकॉर्ड भी जांच का अहम हिस्सा हो सकते हैं. अस्पताल को सील करने के लिए CMHO स्तर पर कार्रवाई की बात सामने आई है.

मरीज का ऑपरेशन करता नानजीराम.

मरीज का ऑपरेशन करता नानजीराम.
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दूसरा आरोप- पंकज यादव

इस मामले में दूसरा आरोपी पंकज यादव है. जिसने 2013 से 2018 के बीच कजाकिस्तान में MBBS की पढ़ाई की, लेकिन भारत में डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस करने के लिए जरूरी FMGE परीक्षा में करीब छह बार फेस हो गया. 

SOG के आईजी अजय पाल लांबा के मुताबिक, इसके बाद पंकज ने बिहार के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज, मुजफ्फरपुर के नाम से कथित फर्जी MBBS डिग्री और मार्कशीट तैयार करवाईं. बिहार मेडिकल काउंसिल के फर्जी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट का भी इस्तेमाल किया. संबंधित कॉलेज और पटना के आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय से वेरिफिकेशन करवाने पर उसकी डिग्री और मार्कशीट फर्जी पाई गईं.

SOG ने पंकज यादव को हरियाणा के कैथल से गिरफ्तार किया. जांच के अनुसार, वह गिरफ्तारी से बचने के लिए वहां रह रहा था.

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दो साल पहले हुई थी शिकायत

इस पूरे मामले की शुरुआत 6 अक्टूबर 2024 को राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. गिरिधर गोपाल की शिकायत से हुई थी. 

अशोक नगर थाने में दर्ज इस मामले में शुरुआत में आठ लोगों के नाम सामने आए. बाद में जांच के दौरान नानजीराम चौधरी के खिलाफ भी कथित फर्जी दस्तावेजों से रजिस्ट्रेशन करवाने का मामला सामने आया. 

मामले की जांच बाद में SOG को सौंपी गई. अब तक पंकज यादव और नानजीराम चौधरी को गिरफ्तार किया जा चुका है. जांच एजेंसी फर्जी डिग्रियां तैयार करने और उपलब्ध करवाने वालों के साथ राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन पदाधिकारियों और कर्मचारियों की संभावित भूमिका की भी पड़ताल कर रही है.

फिल्म में मुन्नाभाई का फर्जी डॉक्टर बनने का किस्सा मनोरंजन था. लेकिन असल जिंदगी में फर्जी डिग्रियों के आधार पर अस्पताल चलाने का आरोप मरीजों की जिंदगी से जुड़ा गंभीर सवाल है. अब जांच में यह पता लगाना अहम होगा कि इन कथित फर्जी डॉक्टरों ने कितने मरीजों का इलाज किया, कितने ऑपरेशन किए और इस पूरे खेल में मदद करने वाले लोग कौन हैं.

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