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नेहा, अंजली, दानिश अली... राहुल गांधी के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में नजर आईं छात्राएं कौन हैं?

राहुल गांधी ने 25 जुलाई को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "धर्मेंद्र प्रधान को जाना होगा, वो भ्रष्ट है उनको कैबिनेट से हटाया जाए. छात्रों के साथ हुई हिंसा के धर्मेंद्र प्रधान प्रतीक है."

नेहा, अंजली, दानिश अली... राहुल गांधी के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में नजर आईं छात्राएं कौन हैं?
राहुल गांधी ने जंतर-मंतर प्रोटेस्ट में शामिल तीन छात्रों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की. (Photo: Screengrab/X/RahulGandhi)
नई दिल्ली:

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर प्रोटेस्ट और 20 जुलाई को हुए पुलिस एक्शन के लेकर राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान उन्होंने सरकार के सामने कुछ मांगें रखी हैं. राहुल गांधी ने साफ तौर से कहा, "कैबिनेट से धर्मेंद्र प्रधान को हटाना पड़ेगा. जिन लोगों ने छात्रों को पीटा उनको सजा दी जाए और प्रधानमंत्री माफी मांगें." उन्होंने कहा कि इन तीन मांगों पर कोई समझौता नहीं होगा. धर्मेंद्र प्रधान को जाना होगा, वो भ्रष्ट है उनको कैबिनेट से हटाया जाए. छात्रों के साथ हुई हिंसा के धर्मेंद्र प्रधान प्रतीक है. 

राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनके साथ तीन छात्राएं नजर आईं. ये वो छात्राएं हैं, जिन्होंने जंतर-मंतर प्रोटेस्ट में चेहरा रही हैं. आइए जानते हैं कि ये तीनों कौन हैं?

1- नेहा बोरा

नेहा बोरा एक भारतीय स्टूडेंट एक्टिविस्ट हैं. वे मौजूदा वक्त में AISA यानी ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की अखिल भारतीय अध्यक्ष हैं. नेहा उत्तराखंड की रहने वाली हैं. उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीए और अंबेडकर यूनिवर्सिटी से मास्टर किया है. मौजूदा वक्त में नेहा जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स में पीएचडी कर रही हैं.

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नेहा जेएनयू में पीएचडी स्कॉलर हैं. (Photo: IG/@neowsibora) 

अपने एकेडमिक सफर के अलावा, नेहा एक थिएटर आर्टिस्ट और एक्टिविस्ट के तौर पर भी जानी जाती हैं. पिछले कुछ सालों में, उन्होंने शिक्षा के निजीकरण, मॉब लिंचिंग, बिलकिस बानो को इंसाफ दिलाने और गाजा में मानवीय संकट जैसे कई सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी है.

जंतर-मंतर पर चल रहे प्रोटेस्ट के दौरान जिन तीन छात्रों ने हंगर स्ट्राइक की थी, नेहा उनमें से एक हैं. नेहा के साथ मनीष कुमार और अमीन अमितोज ने भूख हड़ताल किया. नारों और भाषणों से हटकर, नेहा बोरा ने अपनी 23 दिन की भूख हड़ताल से पूरे देश का ध्यान अपनी तरफ खींचा. इस हड़ताल ने भारत की परीक्षा प्रणाली में मौजूद कमियों को लेकर बढ़ती चिंताओं को उजागर किया.

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2- अंजली 

अंजली, दिल्ली यूनिवर्सिटी के सबसे पुराने संस्थान इंद्रप्रस्थ कॉलेज फॉर विमेन (IPCW) की छात्रा हैं. वे डीयू AISA का प्रेसिडेंट हैं. बिहार के गया जिले के की रहने वाली अंजली कैंपस की राजनीति में धीरे-धीरे सफर तय किया. अपने दूसरे साल के दौरान, वे DU की जमीन पर एक कमर्शियल ऊंची इमारत बनाने के विरोध में हुए प्रदर्शन में शामिल हुईं, जहां वे पहली बार AISA के सदस्यों के संपर्क में आईं.

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 अंजली ने 2025 में DUSU प्रेसिडेंट का चुनाव लड़ा था. (Photo: IG/@anjali_du_)

पिछले कुछ सालों में अंजलि एक मजबूत स्टूडेंट लीडर के तौर पर उभरी हैं. वे डीयू में महिलाओं के हॉस्टल के लिए चलाए गए कैंपेन और IPCW फेस्ट के दौरान हुए यौन उत्पीड़न की घटनाओं के बाद हुए विरोध-प्रदर्शन में सक्रिय रूप से शामिल थीं. इस विरोध की वजह से ही प्रॉक्टोरियल जांच हुई थी. उन्होंने रामजस और हंसराज के लड़कों के हॉस्टल बंद करने का भी विरोध किया और 2023 में दिल्ली में आई बाढ़ के दौरान AISA के राहत कार्यों में योगदान दिया.

साल 2025 में उनके कैंपेन में जेंडर सेंसिटाइजेशन (लैंगिक संवेदनशीलता), फीस बढ़ोतरी का विरोध और शिकायतों के समाधान जैसे मुद्दे शामिल हैं. उन्होंने उन कदमों का भी विरोध किया है, जिन्हें वह 'स्टूडेंट-विरोधी' मानती हैं, जैसे कि SEC और VAC कोर्स और इंटरनल असेसमेंट सिस्टम. अंजलि ने पिछले साल 2025 में DUSU प्रेसिडेंट का चुनाव लड़ा, जिसमें उनकी हार हो गई.

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3- दानिश अली 

जेएनयू के सेंटर फॉर हिस्टोरिकल स्टडीज (CHS) की PhD स्कॉलर दानिश अली, मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के छोटे से गांव बांदरबारू की रहने वाली हैं. उन्होंने पास के शहर गाडरवारा से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की, जहां वे थ्रोबॉल और क्रिकेट में राज्य-स्तरीय खिलाड़ी के तौर पर भी उभरीं. 

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 दानिश जेएनयू में अपनी स्पीच के लिए मशहूर हैं. (Photo: IG/@danish_.aisa)

दानिश के पिता एक रिटायर्ड सरकारी स्कूल टीचर हैं, जबकि उनकी मां अभी एक सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल हैं. दानिश अली ने SGTB खालसा कॉलेज से हिस्ट्री में ग्रेजुएशन किया और बाद में 2022–2024 में मास्टर्स के लिए JNU में दाखिला लिया. वे दलितों, मुसलमानों और आदिवासियों जैसे हाशिए पर मौजूद समुदायों के अधिकारों की वकालत करने वाले अपनी जोशीली तकरीरों के लिए पहचानी जाती हैं.

नवंबर 2025 में हुए JNUSU चुनाव में दानिश अली ने जॉइंट सेक्रेटरी पद के लिए 1991 वोट हासिल करके शानदार जीत दर्ज की और 'लेफ्ट यूनिटी' की क्लीन स्वीप को बरकरार रखा.

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