झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की CGL परीक्षा को लेकर विवाद एक बार फिर चर्चा में है. राज्य के पूर्व महाधिवक्ता अजित कुमार ने दावा किया है कि जांच एजेंसियों की केस डायरी में पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी से जुड़े कई महत्वपूर्ण साक्ष्य दर्ज हैं. इसके बावजूद सरकार इस मामले में कोई ठोस निर्णय नहीं ले रही है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब जांच के दस्तावेजों में कई तथ्य मौजूद हैं तो परीक्षा को लेकर स्पष्ट फैसला क्यों नहीं लिया जा रहा.
2023 की परीक्षा रद्द हुई, 2024 की परीक्षा भी विवादों में
अजित कुमार ने कहा कि वर्ष 2023 में आयोजित CGL परीक्षा पेपर लीक की खबरों के बाद रद्द कर दी गई थी. इसके बाद 2024 में दोबारा परीक्षा आयोजित की गई. उनका आरोप है कि इस परीक्षा से पहले भी प्रश्नपत्र के उत्तर अभ्यर्थियों तक पहुंच गए थे. हालांकि इस बार पूरा प्रश्नपत्र सामने नहीं आया बल्कि ऐसा दस्तावेज मिला जिसमें केवल सही उत्तर का विकल्प दर्ज था और बाकी विकल्प हटाए गए थे.
नेपाल और बंगाल में चल रहे थे कथित कैंप
पूर्व महाधिवक्ता के अनुसार परीक्षा शुरू होने से पहले नेपाल में एक कथित कैंप चलाया जा रहा था जहां अभ्यर्थियों को उत्तर याद कराए जा रहे थे. बाद में पश्चिम बंगाल के नियामतपुर में भी इसी तरह का कैंप संचालित होने की बात सामने आई. उन्होंने कहा कि मामला बढ़ने के बाद अदालत ने संज्ञान लिया और जांच शुरू हुई.
जांच में सामने आए कई अहम तथ्य
अजित Kumar का दावा है कि जांच के दौरान कुछ छात्रों ने खुद स्वीकार किया कि उन्हें लगभग 120 उत्तर रटवाए गए थे. बाद में परीक्षा में वही उत्तर बड़ी संख्या में मेल खाते पाए गए. छात्रों ने CID को कई दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य भी सौंपे थे, जिनसे परीक्षा में गड़बड़ी की आशंका मजबूत होती है.
कोर्ट में क्या कहा गया था?
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार और जांच एजेंसियों ने अदालत में यह दलील दी कि बरामद दस्तावेज केवल "गेस पेपर" थे और पेपर लीक का कोई बड़ा मामला नहीं है. इसी आधार पर परिणाम प्रकाशन पर लगी रोक हट गई. हालांकि उनका कहना है कि केस डायरी में दर्ज तथ्य अलग तस्वीर दिखाते हैं.
नेपाल पहुंचाने और पैसों के लेनदेन का दावा
पूर्व महाधिवक्ता ने कहा कि केस डायरी में एक व्यक्ति के बयान का उल्लेख है जिसने 28 अभ्यर्थियों को पटना के रास्ते नेपाल पहुंचाने की बात स्वीकार की. दावा किया गया कि इसके लिए लाखों रुपये का भुगतान हुआ और एक बैंक खाते में पैसे भेजे गए. उन्होंने कहा कि 135 में से 120 प्रश्नों का मेल खाना गंभीर जांच का विषय है.
जांच पूरी नहीं होने पर उठे सवाल
अजित कुमार ने कहा कि अदालत ने जांच छह महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया था. उनका दावा है कि जांच अब तक पूरी नहीं हुई. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि जांच में पेपर लीक साबित होता है तो परीक्षा रद्द करने पर विचार किया जा सकता है. ऐसे में सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए.
नियुक्तियों और नियमों पर भी सवाल
उन्होंने JSSC और JPSC की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए. सहायक आचार्य नियुक्ति मामले का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि बीएड योग्यता से जुड़े नियमों के कारण कई अभ्यर्थियों को आवेदन का अवसर नहीं मिला. उनके अनुसार ऐसी नीतियां नियुक्ति प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबा कर रही हैं.
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