- संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 14 अगस्त तक चलेगा, जिसमें राजनीतिक दल अपनी रणनीति बनाएंगे
- एनडीए को तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना के टूटने से लोकसभा में समर्थन बढ़ा है और दो तिहाई बहुमत के करीब पहुंचा है
- DMK के लोकसभा और राज्यसभा सांसद एनडीए के लिए अहम हैं, उनके समर्थन से बहुमत का आंकड़ा करीब पहुंच सकता है
संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने वाला है और यह 14 अगस्त तक चलेगा.संसद के मॉनसून सत्र को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है.एनडीए काफी उत्साहित दिख रही है क्योंकि तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना उद्धव गुट में टूट के बाद उनकी संख्या में बढ़ोतरी हुई है और वो धीरे-धीरे लोकसभा में दो तिहाई बहुमत के करीब पहुंचती नजर आ रही है.यहां पर इन दोनों धड़ों के अलावा एक ऐसी पार्टी भी है जिसके बिना एनडीए दो तिहाई बहुमत तक पहुंच नहीं पाएगी और वो है डीएमके.तमिलनाडु में डीएमके और कांग्रेस का लगातार गठबंधन रहा जो इस विधानसभा चुनाव में भी था मगर चुनाव के बाद कांग्रेस डीएमके से अलग हो गई और एक्टर विजय की पार्टी टीवीके के साथ हाथ मिला कर सरकार में शामिल हो गई.
DMK और कांग्रेस के बीच बड़ी दूरी
कांग्रेस के इस कदम से नाराज डीएमके ने लोकसभा और राज्यसभा में कांग्रेस से अलग बैठने के लिए दोनों सभापतियों को चिट्ठी लिखी.अब आने वाले मॉनसून सत्र में डीएमके इंडिया गठबंधन के दलों से अलग बैठेगी. डीएमके के लोकसभा में 22 और राज्यसभा में 8 सांसद हैं.मॉनसून सत्र में एनडीए की रणनीति ये है कि तृणमूल कांग्रेस के टूटे धड़े के 20 सांसदों और उद्धव ठाकरे के टूटे 6 सासदों मिलाकर एनडीए की संख्या 318 तक पहुंचती है. उसमें यदि डीएमके के 22 सांसदों का समर्थन मिल जाए तो 340 की संख्या हो जाएगी. लोकसभा में दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा 363 है.
हालांकि एनडीए इस आंकड़े से 23 सांसद कम है मगर वहां तक पहुंचने की कोशिश की जा सकती है.यदि ऐसा होता है तो परिसीमन विधेयक और एक राष्ट्र एक चुनाव का बिल लाया जा सकता है.इसका मतलब है कि डीएमके के 22 सांसदों का समर्थन सबसे अहम है.ये बात कांग्रेस भी समझ रही है इसलिए वह एक बार फिर डीएमके को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है.
कांग्रेस साथ करने को तैयार
यही वजह है कि कांग्रेस ने डीएमके के लिए एक खिड़की खोल दी है और कोशिश हो रही है कि मॉनसून सत्र से पहले डीएमके को विपक्ष के खेमे में जोड़ लिया जाए.कांग्रेस अध्यक्ष के करीबी और कनार्टक से राज्यसभा के सांसद नासिर हुसैन का कहना है कि हम उन सभी राजनीतिक दलों के साथ काम करने के लिए तैयार हैं जो बीजेपी और आरएसएस के खिलाफ हमारी लड़ाई में हमारा साथ देना चाहती है. नासिर हुसैन ने आगे कहा कि संविधान को बचाने ,संघीय ढांचे की रक्षा करने और विविधताओं को सहजने में जो भी दल हमारा साथ देगा हम उनके साथ रहेंगे.
DMK विपक्ष दलों के साथ बैठक में हो शामिल
कहने का मतलब है कि इशारा डीएमके की तरफ ही है मगर अब कांग्रेस की दिक्कत है कि डीएमके इंडिया गठबंधन छोड़ चुकी है. ऐसे में कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इंडिया गठबंधन में कई ऐसे दल हैं जिनसे हम राज्यों में लड़ते हैं मगर दिल्ली में विपक्ष की राजनीति इकट्ठे करते हैं. जैसे वामदल और तृणमूल कांग्रेस,जरूरी नहीं है कि डीएमके इंडिया गठबंधन का हिस्सा हो मगर वो संसद में विपक्षी दलों की रोजाना होने वाली बैठक में तो शामिल हो ही सकती है. कांग्रेस संसद में डीएमके को अपने पाले में लाने के लिए इसी रणनीति पर काम कर रही है.कांग्रेस को लगता है कि इस तरह वह डीएमके को एनडीए के पाले में जाने से रोक सकती है और सरकार के परिसीमन बिल के लाने के मंसूबों पर पानी फेर सकती है.फैसला अब डीएमके को करना है.
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