नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे अपनी ही पार्टी के उन वरिष्ठ नेताओं से आहत हैं, जिन्होंने हल्द्वानी की उस घटना की सार्वजनिक निंदा नहीं की जिसमें खरगे की सभा के बाद कुछ हिंदुवादी संगठनों ने सभास्थल का "शुद्धिकरण" किया था. सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस वर्किंग कमिटी की बुधवार को हुई बैठक में खरगे ने इसका जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें इस बात का अफसोस है कि सीडब्ल्यूसी के कई सदस्यों ने "हल्द्वानी शुद्धीकरण मामले" में उनका खुलकर समर्थन नहीं किया और घटना की निंदा नहीं की.
कांग्रेस मुख्यालय ‘इंदिरा भवन' में आयोजित बैठक की अध्यक्षता पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने की. इसमें पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा, जयराम रमेश और के. सी. वेणुगोपाल समेत पार्टी के शीर्ष नेता शामिल हुए. इसमें तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी, केरल के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार भी मौजूद थे.
चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों से मांगी रिपोर्ट
बैठक को संबोधित करते हुए खरगे और राहुल गांधी ने पार्टी शासित चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों से कहा कि वे अपने-अपने प्रदेशों में शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में आवश्यक सुधारों पर एक रिपोर्ट तैयार कर एक महीने के भीतर पार्टी अध्यक्ष को सौंपें. तेलंगाना, कर्नाटक, केरल और हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के मुख्यमंत्री हैं।
युवाओं और छात्रों के विषय पर आक्रामक तरीके से आगे बढ़ने पर दिया जोर
सूत्रों का कहना है कि बैठक में राहुल गांधी ने युवाओं और छात्रों के विषय पर आक्रामक तरीके से आगे बढ़ने पर जोर दिया और कहा कि मोदी सरकार पूरी तरह बैकफुट पर आ चुकी है. कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की गई और पार्टी ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार में विदेश नीति ‘समर्पण नीति' बन चुकी है. बैठक में कहा गया कि कार्य समिति की राय है कि महिला आरक्षण लोकसभा की 543 सीटों पर ही लागू होना चाहिए और अगले 25 वर्षों तक सीटों की संख्या में बढ़ोतरी नहीं की जाए.
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