8th Pay Commission 5 Family Unit Formula: आठवें वेतन आयोग की पिछले दिनों दिल्ली में हुई मीटिंग के बाद अब केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजर जयपुर में होने वाली बैठक पर है. इसके बाद चंडीगढ़, चेन्नई, पुदुचेरी और अन्य शहरों में भी मीटिंग होनी है. अब तक जितने भी कर्मचारी-पेंशनर्स संगठन आयोग के सदस्यों से मिले हैं, सबसे सैलरी, पेंशन, भत्ते, हेल्थ स्कीम और अन्य सुविधाओं पर अपनी मांगें तो रखी हैं ही, कई संगठनों ने एक और महत्वपूर्ण फॉर्मूले में बदलाव की मांग की है. वो फॉर्मूला फिटमेंट फैक्टर या महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी(DA Hike) का नहीं, बल्कि फैमिली यूनिट का है.
जी हां, फैमिली यूनिट का फॉर्मूला. ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AINPSEF) के नेशनल प्रेसिडेंट डॉ मंजीत सिंह पटेल ने भी आयोग के साथ इस मुद्दे पर बात रखी थी. उन्होंने बताया कि फैमिली यूनिट के फॉर्मूले में बदलाव से सैलरी और पेंशन में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हो सकती है.
फैमिली यूनिट फॉर्मूले को 3 से 5 करने की मांग
डॉ पटेल ने बताया कि फैमिली यूनिट की संख्या अब तक 3 मानकर फिटमैंट फैक्टर तय किया जाता रहा है. इसमें कर्मचारी, उसके जीवनसाथी और दो बच्चे शामिल होते हैं. अब इसमें माता-पिता को भी शामिल करने की मांग की जा रही है.
3 फैमिली यूनिट फॉर्मूला
- कर्मचारी- 1 यूनिट
- जीवनसाथी- 1 यूनिट (पति या पत्नी)
- पहला बच्चा- 0.5 यानी आधा यूनिट
- दूसरा बच्चा- 0.5 यानी आधा यूनिट
कुल यूनिट- 3
5 फैमिली यूनिट फॉर्मूला
- कर्मचारी- 1 यूनिट
- जीवनसाथी- 1 यूनिट (पति या पत्नी)
- पहला बच्चा- 0.8 यूनिट
- दूसरा बच्चा- 0.8 यूनिट
- कर्मचारी के माता-पिता - (0.8 + 0.8) यूनिट
कुल यूनिट- 5.2 (राउंडऑफ में - 5)
डॉ पटेल के मुताबिक, सामाजिक सुरक्षा की दिशा में ये एक महत्वपूर्ण मांग है कि 'फैमिली यूनिट' की संख्या 3 से बढ़ाकर 5 की जाए. उन्होंने कहा, 'खास बात यह है कि अब माता-पिता को भी फैमिली यूनिट का हिस्सा बनाने की मांग की गई है, कारण कि माता-पिता की जिम्मेदारी भी कर्मचारी पर होती है. वेतन आयोग के इतिहास में पहली बार पुरुष और महिला की यूनिट वैल्यू की असमानता को खत्म कर, दोनों को समान रूप से 1-1 यूनिट देने की मांग की गई है.'

कितनी बढ़ सकती है सैलरी, कैलकुलेशन समझ लें
डॉ पटेल ने समझाया कि ILO के मानदंड के अनुसार, प्रति यूनिट लिविंग कॉस्ट को सैलरी निर्धारण में कैलकुलेट किया जाता है. जैसे कि आज रोटी, कपड़ा, मकान, पढ़ाई, इलाज का खर्च जोड़कर एक व्यक्ति का मिनिमम लिविंग कॉस्ट 13,000 रुपये बैठता है.
- अब पुराने 3 फैमिली यूनिट फॉर्मूले के आधार पर अनुमानित न्यूनतम बेसिक सैलरी बनेगी-
- 3×13,000= ₹ 39,000
- अगर नया 5 फैमली यूनिट फॉर्मूले को स्वीकृति मिलती है तो अनुमानित न्यूनतम बेसिक सैलरी हो जाएगी-
- 5×13,000= ₹ 65,000
- यानी कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में 26,000 रुपये की बढ़ोतरी हो जाएगी. प्रतिशत में देखें तो ये 66% बढ़ोतरी है.
बेसिक सैलरी के आधार पर मिलने वाला महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता और अन्य भत्ते अलग से जुड़ेंगे. इस तरह कर्मचारियों की सैलरी में अच्छी-खासी बढ़ोतरी होगी. और फिर रिटायरमेंट के बाद इसी आधार पर बढ़ी हुई पेंशन भी मिलेगी.
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