नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपना लिखित जवाब दाखिल करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं. दोनों नेताओं ने कहा है कि एजेंसी की कार्रवाई "बाहरी विचारों" से प्रभावित दिखाई देती है और इस मामले को अन्य मामलों से अलग तरीके से देखा गया है. जवाब में कहा गया है कि यह देश का संभवत एकमात्र मामला है जिसमें ED ने किसी निजी शिकायत के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच को आगे बढ़ाया. उनका दावा है कि कानून की सामान्य प्रक्रिया में ऐसा नहीं किया जाता.
निजी शिकायत से शुरू हुआ पूरा मामला
राहुल गांधी और सोनिया गांधी की ओर से दाखिल जवाब में कहा गया है कि ED ने पूर्व केंद्रीय मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी की निजी शिकायत के आधार पर ECIR दर्ज की. दोनों नेताओं का कहना है कि कानून के तहत केवल निजी शिकायत के आधार पर ऐसी कार्रवाई की अनुमति नहीं है. जवाब में यह भी कहा गया है कि ED खुद कई मामलों में यह रुख अपनाता रहा है कि निर्धारित अपराध यानी प्रेडिकेट ऑफेंस में FIR दर्ज हुए बिना मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू नहीं की जा सकती.
सात साल की देरी पर भी उठाए सवाल
दस्तावेज के अनुसार सुब्रमण्यम स्वामी ने वर्ष 2014 में निजी शिकायत दायर की थी. हालांकि ED ने उस समय ECIR दर्ज नहीं की. एजेंसी ने करीब सात साल बाद 30 जून 2021 को ECIR दर्ज की. राहुल और सोनिया गांधी ने इस देरी को भी अपने पक्ष में महत्वपूर्ण आधार बताया है. उनका कहना है कि यदि केवल निजी शिकायत पर्याप्त होती तो एजेंसी को सात साल इंतजार करने की जरूरत नहीं पड़ती. इससे यह संकेत मिलता है कि ED भी पहले इस कानूनी स्थिति को लेकर अलग सोच रखता था.
ED की "गणनापूर्ण चुप्पी" पर सवाल
दोनों नेताओं ने कहा कि ट्रायल कोर्ट और बाद में हाईकोर्ट में भी ED यह स्पष्ट नहीं कर पाया कि नेशनल हेराल्ड मामले को दूसरे मामलों से अलग क्यों माना जा रहा है. जवाब में कहा गया है कि एजेंसी की "गणनापूर्ण चुप्पी" कई सवाल खड़े करती है. उनका कहना है कि इस मामले में कानून और FATF के अंतरराष्ट्रीय मानकों से अलग रुख अपनाया गया है और एजेंसी ने इसके कारणों को स्पष्ट नहीं किया.
ट्रायल कोर्ट के फैसले और हाईकोर्ट की सुनवाई का जिक्र
गौरतलब है कि ED ने 15 अप्रैल 2025 को राहुल गांधी, सोनिया गांधी, सैम पित्रोदा और अन्य लोगों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की थी. हालांकि 16 दिसंबर 2025 को ट्रायल कोर्ट ने मामले का संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था. अदालत ने कहा था कि मामला FIR पर आधारित नहीं बल्कि मजिस्ट्रेट के समक्ष दायर निजी शिकायत पर आधारित है.
इसके अगले ही दिन 17 दिसंबर 2025 को ED ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी. राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने इसे एजेंसी की "असाधारण रुचि" और "अनुचित जल्दबाजी" का उदाहरण बताया है. उनका कहना है कि इतने कम समय में चुनौती दाखिल करना सवाल खड़े करता है. दोनों नेताओं ने ED की याचिका को कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग बताते हुए इसे खारिज करने की मांग की है. मामले की सुनवाई जस्टिस सचिन दत्ता की अदालत में हुई, जहां अगली सुनवाई के लिए 12 अक्टूबर की तारीख तय की गई है.
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