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1000 किमी रेंज, AI गाइडेंस और स्वार्म अटैक... दुश्मन के घर में घुसकर तबाही मचाएगा ड्रोन 'काल'

नोएडा स्थित IG डिफेंस ने स्वदेशी लॉइटरिंग म्यूनिशन ड्रोन 'KAL' का सफल परीक्षण किया है. 1000 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम यह ड्रोन AI आधारित टारगेटिंग, एंटी-जैम नेविगेशन और स्वार्म अटैक जैसी आधुनिक क्षमताओं से लैस है.

1000 किमी रेंज, AI गाइडेंस और स्वार्म अटैक... दुश्मन के घर में घुसकर तबाही मचाएगा ड्रोन 'काल'
भारत का नया कामिकाजे ड्रोन
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आधुनिक युद्ध में अब सिर्फ लड़ाकू विमान और महंगी मिसाइलें ही जीत तय नहीं करतीं. कम लागत वाले और लंबी दूरी तक हमला करने में सक्षम कामीकाजे या सुसाइड ड्रोन तेजी से युद्ध का स्वरूप बदल रहे हैं. भारत भी इस तरह के ड्रोन के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है. नोएडा की प्राइवेट कंपनी IG डिफेंस ने हाल ही में ऐसे ही एक ड्रोन का सफल ट्रायल किया है. इस ड्रोन का नाम है 'KAL'. यह स्वदेशी लॉइटरिंग म्यूनिशन ड्रोन है, जो दुश्मन के इलाके में गहराई तक जाकर सटीक हमला करने के लिए डिजाइन किया गया है. NDTV ने KAL बनाने वाली कंपनी से बात की. कंपनी ने बताया कि कैसे यह ड्रोन भविष्य में कैसे भारतीय डिफेंस पावर को और ज्यादा बढ़ा सकता है.

क्या है KAL ड्रोन?

KAL का पूरा नाम काइनेटिक अटैकर लॉइटरर है. IG डिफेंस ने बताया कि इस ड्रोन का नाम KAL जानबूझकर रखा गया है. यह बताता है कि यह सिस्टम क्या है और क्या काम करता है.

  • Kinetic यानी विस्फोटक और भौतिक प्रहार करने वाला हथियार
  • Attack यानी आक्रामक मिशन के लिए तैयार सिस्टम
  • Loiterer यानी लक्ष्य क्षेत्र के ऊपर लंबे समय तक मंडराने की क्षमता

कुल मिलाकर, यह नाम प्लेटफॉर्म की मुख्य पहचान बताता है. एक ऐसा लॉइटरिंग म्यूनिशन जो लगातार बना रह सकता है, सटीक हमला कर सकता है और काइनेटिक-स्ट्राइक करने में सक्षम है.

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भारत के लिए ऐसे ड्रोन क्यों जरूरी?

KAL को बनाने की प्रेरणा सीधे तौर पर लंबी दूरी के, वन-वे यानी एकतरफा अटैक ड्रोन के आने और उनके ऑपरेशनल इस्तेमाल से मिली. आधुनिक युद्धों में इनके इस्तेमाल ने दिखाया है कि कैसे कम लागत वाले, लंबी दूरी के बिना पायलट वाले प्लेटफॉर्म  एयर-डिफेंस नेटवर्क पर दबाव बनाए रख सकते हैं और बड़े पैमाने पर हमले के ऑपरेशन चला सकते हैं. मिडिल ईस्ट और रेड सी में समुद्री ऑपरेशन्स तक इस तरह के ड्रोन्स के इस्तेमाल को देखा गया है.

इस बदलाव ने भारत के लिए एक बड़ी जरूरत को उजागर किया. आधुनिक युद्ध में तेजी से अहम होती जा रही इस क्षमता के लिए इंपोर्ट प्लेटफॉर्म पर निर्भर रहने के बजाय, देश में ही लंबी दूरी के बिना पायलट वाले स्ट्राइक सिस्टम को डिजाइन, डेवलेप और निर्मित करने की क्षमता हासिल करना जरूरी है. कंपनी ने KAL को इसी उभरती हुई क्षमता की जरूरत के जवाब में एक स्वदेशी भारतीय समाधान के तौर पर बनाया. यह भारत में, भारतीय जरूरतों के हिसाब से डिजाइन और विकसित किया गया एक लंबी दूरी का स्ट्राइक प्लेटफॉर्म है. यह दूसरे देशों को एक्सपोर्ट भी किया जा सकता है.

क्या हैं इसकी प्रमुख खूबियां?

कंपनी के मुताबिक KAL की सबसे बड़ी ताकत इसकी लंबी दूरी और सटीक हमला क्षमता है. इसकी रेंज 1000 किलोमीटर तक है. इसे आसमान में 7 से 8 घंटे तक उड़ाया जा सकता है. यह 50 किलोग्राम तक पेलोड को कैरी कर सकता है. यह ड्रोन 5000 मीटर ऊंचाई तक जा सकता है और दुश्मन के ठिकानों पर हमला कर सकता है. KAL में लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता, ऑटोनॉमस नेविगेशन, टर्मिनल गाइडेंस और नेटवर्क से जुड़े बैटलफील्ड इंटीग्रेशन का मेल है. इलेक्ट्रॉनिक-वॉरफेयर से बचने के लिए इस ड्रोन में GNSS एंटी-जैम क्षमता भी है.

KAL को जो चीज अलग बनाती है, वह सिर्फ इसका एयरफ़्रेम या इसकी अलग-अलग खूबियां नहीं हैं. इसे एक बड़े प्रिसिजन-स्ट्राइक आर्किटेक्चर के हिस्से के तौर पर काम करने के लिए डिजाइन किया गया है. यह सिर्फ एक अकेले हथियार के तौर पर काम करने के बजाय, नेटवर्क से जुड़े टारगेट की पहचान, युद्धक्षेत्र के डेटा और कमांड-एंड-कंट्रोल क्षमताओं का इस्तेमाल करता है.

GPS बंद होने पर भी टारगेट तक पहुंचेगा

IG डिफेंस ने बताया कि KAL को इलेक्ट्रॉनिक-वॉरफेयर वाले मुश्किल माहौल में काम करने के लिए कई स्तरों वाले उपायों के साथ डिजाइन किया गया है. इसलिए, इसका पूरा आर्किटेक्चर इस तरह बनाया गया है कि यह सिर्फ़ एक नेविगेशन सोर्स पर निर्भर रहने के बजाय नेविगेशन में बैकअप और टर्मिनल गाइडेंस में मज़बूती दे सके.

  • मल्टी-बैंड GNSS और इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (INS): ये सिस्टम ऑटोनॉमस वे-पॉइंट नेविगेशन के साथ मिलकर काम करते हैं. अगर GNSS सिग्नल न मिले या खराब हो जाए, तो भी INS स्वतंत्र रूप से नेविगेशन में मदद कर सकता है. 
  • GNSS एंटी-जैम (AJAM) क्षमता: इसे एक्टिव GNSS जैमिंग के खिलाफ मजबूती देने के लिए डिजाइन किया गया है. 
  • EO/IR टर्मिनल गाइडेंस: इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड गाइडेंस आखिरी चरण में मदद करता है, जिससे सैटेलाइट नेविगेशन पर निर्भरता कम हो जाती है. 
  • सटीकता: इस सिस्टम को कम सर्कुलर एरर प्रोबेबल हासिल करने के लिए डिजाइन किया गया है.
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AI से लैस है KAL

कंपनी का दावा है कि KAL में AI-आधारित टारगेटिंग क्षमता दी गई है. एक बार लक्ष्य तय होने के बाद ड्रोन लगातार मानवीय नियंत्रण की जरूरत के बिना अंतिम चरण तक मिशन पूरा कर सकता है. इससे रेस्पॉस समय कम होता है और टारगेट पर हमला ज्यादा प्रभावी बनता है.

स्वार्म अटैक क्यों है गेम चेंजर?

KAL की सबसे महत्वपूर्ण क्षमताओं में से एक है स्वार्म ऑपरेशन. इस तकनीक में कई ड्रोन एक साथ नेटवर्क बनाकर काम करते हैं. इसके जरिए एक साथ कई दिशाओं से हमला किया जा सकता है. इससे दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम पर दबाव बनता है. इसके साथ ही दुश्मन के रडार को भी चकमा दिया जा सकता है. 

मिसाइल से कितना अलग है KAL?

क्रूज मिसाइलें बेहद प्रभावी होती हैं, लेकिन उनकी लागत बहुत ज्यादा होती है. इसके मुकाबले KAL को कम लागत में बड़े पैमाने पर उत्पादन योग्य प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया गया है. कंपनी का कहना है कि यह पारंपरिक क्रूज मिसाइल का सीधा विकल्प नहीं है, बल्कि एक ऐसा स्ट्राइक प्लेटफॉर्म है जिसे बड़ी संख्या में इस्तेमाल कर दुश्मन के एयर डिफेंस पर दबाव बनाया जा सकता है.

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कैसे लॉन्च होगा ड्रोन?

KAL को कई प्लेटफॉर्म से लॉन्च किया जा सकता है. इसे ट्रक आधारित लॉन्चर, वाहन आधारित सिस्टम, झुकी हुई रेल लॉन्चर, फिक्स्ड प्लेटफॉर्म और रॉकेट-असिस्टेड टेक-ऑफ (RATO) से लॉन्च किया जा सकता है.

भारतीय सेना को क्या फायदा होगा?

अगर यह प्लेटफॉर्म बड़े पैमाने पर शामिल होता है, तो भारतीय सेना को कई रणनीतिक लाभ मिल सकते हैं. यह ड्रोन सीमा पार छिपे दुश्मन के ठिकानों को तबाह कर सकता है. वहीं जरूरत पड़ने पर दुश्मन के एयर डिफेंस पर दबाव डाल सकता है. इस ड्रोन के जरिए कम लागत में सटीक स्ट्राइक की जा सकती है. बहुत जोखिम वाले मिशनों में पायलट की जरूरत भी नहीं होगी.

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