राष्ट्रवाद, अनुशासन और देशभक्ति की बात करने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर कर्नाटक के होम मिनिस्टर प्रियांक खरगे ने सीधे सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने RSS प्रमुख मोहन भागवत को एक खुला पत्र लिखकर पूछा है कि जब देश के सभी संगठन कानून और नियमों के दायरे में काम करते हैं, तो RSS खुद को इनसे ऊपर क्यों मानता है?
रिथुराज पुरोहित की रिपोर्ट...
मोहन भागवत को लिखा खुला पत्र
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने RSS सरसंघचालक मोहन भागवत को एक ओपन लेटर लिखा है. इस पत्र में उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जो संगठन लगातार राष्ट्रवाद, अनुशासन और कर्तव्य की बात करता है, उसे इन मूल्यों को व्यवहार में भी दिखाना चाहिए. सिर्फ विचारों में ही नहीं, बल्कि कामकाज में भी पारदर्शिता जरूरी है.
नियमों के पालन पर उठाया सवाल
प्रियांक खरगे ने अपने पत्र में कहा कि RSS आम लोगों को नियमों का पालन करने की सीख देता है, लेकिन खुद उन्हीं नियमों से बाहर दिखाई देता है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश के छोटे संगठन, एनजीओ, ट्रस्ट, कंपनियां और आम नागरिकों से रजिस्ट्रेशन, ऑडिट और टैक्स देने की अपेक्षा की जाती है, तो RSS को भी इन नियमों का पालन करना चाहिए.
पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग
पत्र में यह भी कहा है कि RSS को अपनी गतिविधियों और फाइनेंस को लेकर पारदर्शी होना चाहिए. प्रियांक खरगे ने अपील की कि संगठन अपनी 100वीं सालगिरह को सिर्फ जश्न तक सीमित न रखे, बल्कि इसे आत्मनिरीक्षण का मौका बनाए. उन्होंने सुझाव दिया कि RSS खुद को आधिकारिक रूप से रजिस्टर करे और कानून के तहत अपनी जिम्मेदारियों को निभाए.
खरगे ने जोर देकर कहा कि किसी भी संगठन को भारत के संविधान का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर RSS वास्तव में अपने विचारों को मजबूत करना चाहता है, तो उसे संविधान के दायरे में रहकर काम करना चाहिए और अपनी जवाबदेही तय करनी चाहिए.
सरकारी स्तर पर जवाब का इंतजार
पत्र के अंत में प्रियांक खरगे ने RSS से औपचारिक जवाब मांगा है. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा के लिए RSS के अधिकृत प्रतिनिधियों की ओर से जवाब का इंतजार किया जा रहा है.
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