भारत में वीवीआईपी (VVIP) हस्तियों को Z+ (जेड-प्लस) सुरक्षा दी जाती है. जेड-प्लस सर्वोच्च स्तर की सुरक्षा श्रेणियों में से एक है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत को भी Z+ (जेड-प्लस) सुरक्षा दी गई है. इस सुरक्षा के तहत 55 सुरक्षाकर्मियों का दल होता है. यह दल 24 घंटे साथ रहता है और शिफ्ट के आधार पर काम करता था. इस पूरे सुरक्षा घेरे में 10 - 12 कमांडों, 4 से 5 बुलेटप्रूफ गाड़ी, जैमर और एस्कॉर्ट वाहन शामिल होते हैं. ये सुरक्षा कई लेयरों मे होती हैं. पहली लेयर पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर की होती है. दूसरी लेयर इलीट कमांडो की होते हैं जो कि भारत के सबसे घातक सैनिक माने जाते हैं.
तीसरी लेयर QRT (क्विक रिस्पांस टीम) की होती है. वहीं सबसे आखिरी यानी चौथी लेयर लॉकल पुलिस की होती है. जिस जगह जाते हैं, वहां की पुलिस सुरक्षा की चौथी लेयर में तैनात रहती है. इस तरह से कुल चार लेयर Z+ (जेड-प्लस) सुरक्षा के तहत आती है.
जेड-प्लस किसे दी जाती है
ये सुरक्षा खतरे के आकलन के आधार पर दी जाती है. इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की खुफिया रिपोर्ट के आधार ये सुरक्षा उन्हें प्रदान की जाती है, जिन्हें किसी तरह से खतरा हो सकता है. गृह मंत्रालय की एक विशेष समिति खतरे की समीक्षा करती है और उसके बाद ही ये सुरक्षा दी जाती है. इस सुरक्षा पर आने वाला खर्च सरकार ही उठाती थी. हालांकि उद्योगपति मुकेश अंबानी खुद से अपनी जेड-प्लस सुरक्षा का खर्च उठा रहे हैं.
एक अनुमान के अनुसार Z+ (जेड-प्लस) सुरक्षा का मासिक खर्च 30 से 40 लाख रुपये तक आता है. हाल ही में तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री विजय को भी केंद्र सरकार ने Z+ श्रेणी दी है.
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