नेपाल में हालिया आपदा ने जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे को फिर उजागर कर दिया है. ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने, अचानक बाढ़, सूखा और भूस्खलन जैसी घटनाओं के बीच COP31 को लेकर वैश्विक स्तर पर तैयारियां तेज हैं. इसी संदर्भ में दिल्ली में आयोजित प्री-COP31 संवाद में विशेषज्ञों ने जलवायु कार्रवाई और ऊर्जा बदलाव पर चर्चा की. एनडीटीवी से विशेष बातचीत में चिंतन रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष शिशिर प्रियदर्शी ने कहा "नेपाल में हाल में जो आपदा हुई है, वह एक चेतावनी है. दुनियाभर में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं. सूखा, फ्लैश फ्लड और भूस्खलन जैसी आपदाओं की घटनाएं बढ़ रही हैं. हम अब और देरी नहीं कर सकते. COP31 की बैठक में ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए वैश्विक समुदाय द्वारा तय लक्ष्यों के क्रियान्वयन पर मुख्य फोकस रखना बेहद जरूरी होगा."
दिल्ली में आयोजित हुआ प्री-COP31 संवाद
तुर्की के अंताल्या शहर में होने वाली जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन की 'कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज' (COP31) की अहम बैठक से पहले बुधवार को चिंतन रिसर्च फाउंडेशन और ऑस्ट्रेलिया सरकार ने दिल्ली में "ग्रीन ट्रांजिशन में साझेदार: COP31 के लिए महत्वाकांक्षा, कार्रवाई और साझेदारियों को आगे बढ़ाना" विषय पर प्री-COP31 संवाद आयोजित किया. इस संवाद का मुख्य उद्देश्य व्यापक इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में जलवायु और ऊर्जा परिवर्तन से जुड़ी उभरती प्राथमिकताओं पर चर्चा को बढ़ावा देना था.

तीन प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित रही चर्चा
यह संवाद COP31 के जलवायु और ऊर्जा परिवर्तन एजेंडा के तीन प्रमुख स्तंभों पर केंद्रित रहा. इनमें जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढांचा (क्लाइमेट रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर), क्लाइमेट फाइनेंस और महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) शामिल रहे. इस चर्चा में ऑस्ट्रेलिया के जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा मंत्री क्रिस बोवेन के अलावा ऑस्ट्रेलिया, तुर्की, ब्राजील, फिजी, जमैका और इथियोपिया के राजदूतों ने भाग लिया.
ग्लोबल वार्मिंग पर रहेगा COP31 का मुख्य फोकस
शिशिर प्रियदर्शी के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन पर चर्चा दशकों से हो रही है. COP31 में विशेष फोकस ग्लोबल वार्मिंग पर रहेगा, क्योंकि इसका प्रभाव दुनियाभर के देशों और समाजों पर लगातार गहराता जा रहा है. शिशिर प्रियदर्शी ने एनडीटीवी से कहा, "COP31 की बैठक में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका होगी. भारत दुनिया के लिए एक रोल मॉडल देश है, क्योंकि हमने 2030 के कई लक्ष्य तय समय से पहले ही हासिल कर लिए हैं."
विकास और नेट जीरो के बीच संतुलन जरूरी
उन्होंने कहा, "हमें जलवायु परिवर्तन पर होने वाली बातचीत में विकास संबंधी आकांक्षाओं को भी शामिल करना होगा. 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए पांच गुना अधिक बिजली की आवश्यकता होगी. ऐसे में विकास की आकांक्षाओं और नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य के बीच संतुलन बनाना बेहद जरूरी होगा."

ग्लोबल साउथ के लिए महत्वपूर्ण मंच होगी COP31
विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे दुनिया जलवायु कार्रवाई के लिहाज से एक निर्णायक दशक में प्रवेश कर रही है, तुर्की के अंताल्या में होने वाली COP31 बैठक वैश्विक स्तर पर किए गए वादों को अमल में लाने, नए निवेश को आकर्षित करने और स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों को तेजी से अपनाने की दिशा में विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के देशों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगी.
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