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नेपाल त्रासदी के बाद हिमाचल में अलर्ट, घेपन ग्लेशियल झील से 5 मिनट में आ सकती है तबाही!

हिमाचल में घेपन ग्लेशियल झील के बढ़ते जलस्तर से ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड का खतरा बढ़ गया है. झील में अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने का काम चल रहा है.

नेपाल त्रासदी के बाद हिमाचल में अलर्ट, घेपन ग्लेशियल झील से 5 मिनट में आ सकती है तबाही!
हिमाचल के लाहौल स्पीति में 5 मिनट में GLOF से हो सकती है तबाही
हिमाचल:

नेपाल में ग्लेशियर टूटने से हुई तबाही के बाद हिमाचल प्रदेश अलर्ट मोड पर आ गया है. लाहौल-स्पीति में 4,070 मीटर की ऊंचाई पर स्थित घेपन ग्लेशियल झील का जलस्तर बढ़ने से ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) का खतरा मंडरा रहा है. खतरे को देखते हुए उपायुक्त एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) की अध्यक्ष किरण भड़ाना ने टीम के साथ झील का निरीक्षण किया.

किरण भड़ाना पहली महिला IAS अधिकारी हैं, जो लगभग 14 किलोमीटर की कठिन पैदल चढ़ाई कर स्वयं घेपन झील तक पहुंचीं. उन्होंने झील के जलस्तर, आसपास के ग्लेशियरों, भू-भाग और पानी के संभावित बहाव मार्ग का मौके पर जायजा लिया. डीसी ने कहा कि घेपन झील के आसपास बड़ी संख्या में ग्लेशियर और ऊंचे पर्वत हैं, जिनकी स्थिरता की नियमित वैज्ञानिक निगरानी जरूरी है. नेपाल में पिछले माह हुई त्रासदी ने ग्लेशियरों की अस्थिरता से जुड़े खतरों की गंभीरता को सामने रखा है. ऐसे में SDMA और NDMA के साथ समन्वय कर वैज्ञानिक आकलन और निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाएगी.

5 मिनट में आबादी तक पहुंच सकता है पानी

डीसी किरण भड़ाना ने बताया कि अब तक के आकलनों में आपदा की स्थिति में झील का पानी 22 मिनट में आबादी तक पहुंचने की संभावना जताई गई है, लेकिन वास्तविक भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन का आकलन है कि पानी महज 5 मिनट में भी आबादी वाले क्षेत्र तक पहुंच सकता है. उन्होंने कहा कि इस जोखिम को देखते हुए संवेदनशील क्षेत्रों के लिए प्रभावी निकासी योजना, नियमित मॉक ड्रिल, जनजागरूकता और त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था मजबूत करना जरूरी है.

अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने की तैयारी

डीसी ने बताया कि घेपन झील में अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करने पर काम चल रहा है. इसका मकसद जलस्तर सहित अन्य मानकों की लगातार निगरानी और खतरे की स्थिति में रियल टाइम चेतावनी देना है. C-DAC तिरुवनंतपुरम द्वारा विकसित प्रणाली का सिस्सू झील में परीक्षण भी किया जा चुका है.

10 विभागों की 15 सदस्यीय टीम पहुंची झील

निरीक्षण के लिए 10 विभागों के 15 अधिकारियों-कर्मचारियों की टीम झील तक पहुंची. इसमें ITDP के परियोजना अधिकारी अश्वनी कुमार शर्मा, उप वन क्षेत्रपाल लीला मणि, चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुषमा और डॉ. विक्रांत नेगी, BRO 94 RCC के प्रभारी कैप्टन हरिओम शरण, अग्निशमन केंद्र केलांग के प्रभारी रतन चंद, होमगार्ड फायरमैन छेरिंग आंगरुप, जल शक्ति विभाग के जेई पंकज महाजन समेत अन्य शामिल रहे.

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