- बीजेपी ने यूपी के राज्यसभा चुनाव में 8 उम्मीदवार घोषित किए, जिनमें प्रतापगढ़ से राधा कांत ओझा शामिल हैं
- राधा कांत ओझा अगर चुनाव जीत जाते हैं तो वह प्रतापगढ़ से छठे सांसद बन जाएंगे
- प्रतापगढ़ से वर्तमान में दो लोकसभा सांसद और तीन राज्यसभा सांसद हैं
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए बीजेपी ने सोमवार को लिस्ट जारी कर दी. बीजेपी ने 8 सीटों पर अपना उम्मीदवार उतारा है. इन आठ उम्मीदवारों में एक नाम राधा कांत ओझा का भी है, जो प्रतापगढ़ जिले से आते हैं.
अगर राधा कांत ओझा राज्यसभा चुनाव जीतते हैं तो वह प्रतापगढ़ के छठे सांसद बन जाएंगे. अभी प्रतापगढ़ ऐसा जिला है जहां 5-5 सांसद हैं.
इस हिसाब से देखा जाए तो प्रतापगढ़ भले ही पिछड़े जिलों में गिना जाता है, लेकिन आज के समय में ये यूपी की राजनीति का गढ़ बन गया है. यहां से 5 सांसदों का ताल्लुक है और अब 6वें की बारी है.
अभी कौन-कौन सांसद हैं प्रतापगढ़ से?
प्रतापगढ़ जिले से अभी दो लोकसभा और तीन राज्यसभा सांसद हैं. राधा कांत ओझा जीते तो 5वें राज्यसभा सांसद हो जाएंगे.
अभी प्रतापगढ़ लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी के शिव पाल सिंह पटेल सांसद हैं. इसी जिले में आने वाली कौशांबी सीट से समाजवादी पार्टी से पुष्पेंद्र सरोज लोकसभा सांसद हैं. वह भारत के सबसे युवा सांसद हैं. उनकी उम्र सिर्फ 27 साल है.
इनके अलावा तीन राज्यसभा सांसद- अमरपाल मौर्य (बीजेपी), इमरान प्रतापगढ़ी (कांग्रेस) और प्रमोद तिवारी (कांग्रेस) हैं, जो प्रतापगढ़ से ही आते हैं. इमरान प्रतापगढ़ी वैसे तो प्रतापगढ़ के रहने वाले हैं लेकिन कांग्रेस ने उन्हें महाराष्ट्र से राज्यसभा भेजा है.
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यूपी कांग्रेस अध्यक्ष भी यहीं से
यूपी कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा 'मोना' का ताल्लुक भी प्रतापगढ़ से ही है. उनके पिता प्रमोद तिवारी हैं.
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी प्रतापगढ़ की रामपुर खास सीट से 9 बार के विधायक रहे हैं. 2014 में आराधना मिश्रा ने यहां से उपचुनाव जीता और पहली बार विधायक बनीं. आराधना मिश्रा रामपुर खास सीट से तीन बार की विधायक हैं.

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अब राधा कांत ओझा की बारी
अब प्रतापगढ़ की सांसदों की लिस्ट में एक और नया नाम जुड़ सकता है- राधा कांत ओझा. वह भी प्रतापगढ़ से ही आते हैं.
वह शिवाकांत ओझा के छोटे भाई. शिवाकांत ओझा प्रतापगढ़ की रानीगंज सीट से बीजेपी विधायक रहे हैं. वह यूपी के स्वास्थ्य मंत्री भी रह चुके हैं. अब राधा कांत ओझा अगर राज्यसभा चुनाव जीतते हैं तो वह प्रतापगढ़ के छठे सांसद हो जाएंगे.
प्रतापगढ़ की सियासत क्या है?
प्रतापगढ़ की राजनीति की सबसे बड़ी पहचान यहां के ऐतिहासिक राजघराने रहे हैं. आजादी के बाद से लोकसभा के चुनावों में ज्यादातर समय सत्ता की बागडोर राजघरानों से जुड़े चेहरों के हाथों में रही है.
पूर्व केंद्रीय विदेश मंत्री राजा दिनेश सिंह प्रतापगढ़ से 4 बार सांसद चुने गए और इंदिरा गांधी सरकार के सबसे असरदार मंत्रियों में गिने जाते थे. उनकी बेटी राजकुमारी रत्ना सिंह ने भी इस विरासत को आगे बढ़ाते हुए कांग्रेस के टिकट पर 3 बार (1996, 1999, 2009) संसद में प्रतापगढ़ का प्रतिनिधित्व किया. राजा अजीत प्रताप सिंह और उनके बेटे अभय प्रताप सिंह भी यहां से सांसद बने.
जिले के पश्चिमी हिस्से (कुंडा और बाबागंज क्षेत्र) की राजनीति पिछले तीन दशकों से भदरी रियासत के रघुराज प्रताप सिंह उर्फ 'राजा भैया' के इर्द-गिर्द घूमती है. राजा भैया 1993 से लगातार कुंडा विधानसभा सीट से विधायक बनते आ रहे हैं.
प्रतापगढ़ जिले में कुल 7 विधानसभा सीटें हैं- कुंडा, बाबागंज, रामपुर खास, प्रतापगढ़ सदर, पट्टी, रानीगंज और विश्वनाथगंज.
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