- सपा ने कांग्रेस को 6 लोकसभा सीटों की तर्ज पर 30 विधानसभा सीटें देने की बात कही है
- इसी के जवाब में कांग्रेस ने 37 सीटों के बदले 185 विधानसभा का ऑफर सपा को दे दिया है
- अखिलेश यादव का कहना है कि बात सीट की नहीं, जीत की होनी चाहिए
उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस में सीट बंटवारे को लेकर चल रही खींचतान के बीच अखिलेश यादव ने एक पोस्ट के जरिए इसे कम करने की कोशिश की है. अखिलेश ने इस बात पर जोर दिया है कि लड़ाई सीट की नहीं, बल्कि जीत की होनी चाहिए.
इस पर यूपी कांग्रेस की अध्यक्ष आराधना मिश्रा ने भी कहीं न कहीं सहमति जताई है और कहा है कि कांग्रेस ने हमेशा गठबंधन धर्म निभाया है और आगे भी निभाएंगे.
दोनों ही पार्टियां भले ही 'सीट' की बजाय 'जीत' की बात करें लेकिन 'जीत' का रास्ता 'सीट' से ही होकर जाता है. जबकि अब तक कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट बंटवारे का कोई फॉर्मूला बन नहीं पाया है.
कांग्रेस को मिलेगी कितनी सीट?
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव में अब कुछ ही महीने बचे हैं. यूपी की 403 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस 100 से 150 सीटें मांग रही है. लेकिन अखिलेश इतनी सीटें देने को तैयार नहीं हैं.
बताया जा रहा है कि सीटों के बंटवारे को लेकर 2024 की जीत का गणित बैठाया जा रहा है. सपा के सूत्रों का कहना है कि 2024 में कांग्रेस ने 80 में से 17 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 6 सीटें जीती थीं. सपा का गणित है कि एक लोकसभा सीट के अंदर औसतन 5 विधानसभा सीट आती है. इस हिसाब से कांग्रेस ने जो 6 लोकसभा सीटें जीतीं, उसमें आने वालीं 30 सीटें वह ले ले.
समाजवादी पार्टी से जुड़े सूत्रों का तो यह भी कहना है कि इस हिसाब से कांग्रेस की 30 सीटें बनती हैं लेकिन अखिलेश 60 सीटें तक देने को तैयार हैं.

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कांग्रेस ने दिया- 185 सीट का ऑफर
उधर, समाजवादी पार्टी के गणित के आधार पर ही कांग्रेस ने भी अपना गणित लगाया है. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अगर इसी फॉर्मूले पर चलना है तो 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा ने भी 37 सीटें जीती थीं.
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अगर 1 लोकसभा सीट के बदले 5 विधानसभा सीटें दी जाएं तो सपा के खाते में 185 सीटें जानी चाहिए.
ऐसे में कांग्रेस का तर्क है कि अगर सपा 185 और कांग्रेस 30 सीटों पर लड़ती है तो कुल मिलाकर 215 सीटें होती हैं. ऐसे में बाकी बची हुई 188 सीटों का क्या होगा? इसी गणित को सामने रखकर कांग्रेस बराबरी हिस्सेदारी मांग रही है.
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'सीट' चाहिए या 'जीत'?
गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर चल रही खींचतान के बीच अखिलेश यादव ने रविवार को X पर पोस्ट किया, 'मकसद जब साफ हो तो हाथ-में-हाथ होता है, निगाह मंजिल पर हो तो सफर आसान होता है. बात बड़ी ये नहीं है कि गठबंधन में कितनी सीटें या कौन सी सीट किसके पास जा रही है, बात बड़ी ये है कि हम सबको ये सुनिश्चित करना है कि जीत गठबंधन की हो.'

इस पर यूपी कांग्रेस की अध्यक्ष आराधना मिश्रा ने कहा, 'कांग्रेस का हाथ सबके साथ. गठबंधन का धर्म हमने निभाया है और यह धर्म हम निभाएंगे. हमारा लक्ष्य है भाजपा की सरकार को राज्य में 2027 में हटाना और इंडिया ब्लॉक की सरकार को बनाना.'
सीट शेयरिंग और गठबंधन को लेकर समाजवादी पार्टी लगातार कांग्रेस पर हमलावर है। इस पर उन्होंने कहा, 'इंडिया ब्लॉक कोई राज्य स्तर पर गठबंधन नहीं था. यह राष्ट्रीय स्तर पर बना था. राष्ट्रीय नेताओं ने समर्थन दिया था.'
वहीं, कांग्रेस के रवैये को लेकर इंडिया ब्लॉक की दूसरी पार्टियां भी हमलावर हैं. एनसीपी (शरद पवार गुट) के राष्ट्रीय प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने कहा कि हमारा साझा लक्ष्य भाजपा को हराना है, इसलिए कांग्रेस को बड़ा दिल दिखाना होगा और सहयोगियों को साथ लेकर चलना चाहिए.
उन्होंने कहा कि 'उत्तर प्रदेश में कांग्रेस एक असफल प्रयोग कर रही है. वहां पर अखिलेश यादव को ही कैप्टन मानने की जरूरत है. कांग्रेस को चाहिए कि अखिलेश के संपर्क में रहकर और उनके साथ तालमेल बनाकर चुनाव लड़े. वरना कांग्रेस की जो थोड़ी-बहुत जमीन बची है, वह भी खत्म हो जाएगी और साथ ही वह अखिलेश को भी कमजोर करेंगे.'

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क्या साथ आ पाएंगे यूपी के लड़के?
2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और सपा ने गठबंधन किया था और इसके लिए 'यूपी के लड़के' वाला नारा दिया था. लेकिन यह नारा पूरी तरह फेल हो गया.
इसके बाद 2022 के चुनाव में सपा ने एक बड़ा गठबंधन बनाया. कांग्रेस के अलावा कई पार्टियां थीं लेकिन गठबंधन को सिर्फ 111 सीटें ही मिलीं. 2022 में भाजपा की भी 57 सीटें कम हो गई थीं.
2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और सपा ने फिर गठबंधन किया और दोनों ने मिलकर 80 में से 43 सीटें जीत लीं. सपा-कांग्रेस के गठबंधन ने भाजपा को बड़ी चोट पहुंचाई. अब कांग्रेस नेताओं का कहना है कि 2024 के चुनाव के बाद से राहुल गांधी का ग्राफ लगातार बढ़ा है और इसी आधार पर वह 100 से 150 सीटें मांग रही है.
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