प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने संबोधन में ‘दिमागी नक्सल' शब्द का उल्लेख करते हुए कहा था कि ऐसे लोग व्यवस्था के भीतर रहकर समाज और नीतियों को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं. उन्होंने नागरिकों से ऐसे तत्वों की पहचान करने और उनसे दूरी बनाने की अपील की थी. इसके बाद इस शब्द को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया.
मनोज झा ने कसा तंज
आरजेडी सांसद मनोज झा ने प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री हर साल राजनीतिक शब्दावली में एक नया शब्द जोड़ देते हैं. उन्होंने कहा कि पहले ‘आंदोलनजीवी' और ‘अर्बन नक्सल' जैसे शब्द सामने आए थे और अब ‘दिमागी नक्सल' शब्द जुड़ गया है. झा ने कहा कि उन्होंने पहले भी संसद में ‘अर्बन नक्सल' की परिभाषा पूछी थी, लेकिन इसका स्पष्ट जवाब नहीं मिला था.
तेज प्रताप यादव ने उठाए सवाल
जनशक्ति जनता दल के संस्थापक और आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने भी इस मुद्दे पर टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ही बेहतर तरीके से बता सकते हैं कि दिमागी नक्सल कौन है और कौन नहीं. तेज प्रताप ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को पूरे देश का दौरा कर ऐसे लोगों की पहचान करनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि संभव है उन्हें सबसे अधिक ऐसे लोग अपनी ही पार्टी में मिल जाएं.
चिराग पासवान ने किया समर्थन
वहीं केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने प्रधानमंत्री के बयान का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों की पहचान जरूरी है जो अराजकता फैलाने और देश की प्रगति में बाधा डालने की नीयत से काम करते हैं. उनके अनुसार देश की विकास यात्रा को प्रभावित करने वाली सोच और गतिविधियों पर नजर रखना आवश्यक है.
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