14 अगस्त, भारत और पाकिस्तान के लिए एक ऐतिहासिक दिन है. इसी दिन 1947 में पाकिस्तान, भारत से अलग हुआ था. ब्रिटिश शासन के अंत और भारत के विभाजन के बाद पाकिस्तान एक स्वतंत्र देश बना. जबकि भारत 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हुआ. भारत और पाकिस्तान तो अलग हो गए लेकिन उस दौरान के हजारों कहानियां और किस्से आज भी किताबों के पन्नों में बंद है. साथ छूटने और नए परिवेश में अपनी जगह बनाने की जद्दोजहद, अलगाव और विस्थापन की ऐसी ही कहानियां बॉलीवुड की कई फिल्मों में दिखाई गई हैं. आज बंटवारे के 79 साल बाद हम ऐसी ही कुछ फिल्मों की बात कर रहे हैं.
'मैं वापस आऊंगा' (2026)
इस फिल्म की कहानी है कीनू की, जो एक सिख परिवार का कॉलेज स्टूडेंट है और जिया नाम की मुस्लिम लड़की के प्यार में पड़ जाता है. जब वे दोनों प्यार और रोमांस में डूबे होते हैं, तब भारत एक मुश्किल दौर से गुजर रहा होता है. जब वे शादी करने की योजना बना रहे होते हैं, तभी भारत और पाकिस्तान के बंटवारे का ऐलान हो जाता है. यह फिल्म अलग-अलग टाइमलाइन को दिखाती है और बताती है कि कैसे कीनू 78 साल बाद भी अपनी जिया से मिलने के लिए तरसता है, और अपनी मौत के समय उससे आखिरी बार अलविदा कहना चाहता है.
मम्मो (1994)
मम्मो में फरीदा जलाल मुख्य भूमिका में हैं. फरीदा जलाल ने एक पाकिस्तानी महिला का किरदार निभाया है जो अपने रिश्तेदारों के साथ रहने के लिए मुंबई आती है. बंटवारे के कई दशक बीत जाने के बाद भी, उसकी पहचान और नागरिकता उस देश के साथ उसके रिश्ते को उलझाए रखती है जिसे वह कभी अपना घर मानती थी. मम्मो और उसके परिवार के रिश्ते के जरिए, फिल्म बहुत ही संवेदनशीलता से दिखाती है कि कैसे 1947 की घटनाओं ने सरहदें खिंचने के बहुत समय बाद भी लोगों की जिंदगी और रिश्तों पर असर डाला.
पिंजर (2003)
पिंजर, पुरो की कहानी है, जिसे बंटवारे के समय बढ़ते सांप्रदाg
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