- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेश यात्रा के बाद कैबिनेट की बैठक में सभी केंद्रीय और राज्य मंत्री शामिल होंगे
- बैठक में हाल के नीतिगत फैसलों के परिणामों और विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज की समीक्षा की जाएगी
- मिडिल ईस्ट संकट के कारण ऊर्जा, विमानन, कृषि और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों पर पड़ रहे आर्थिक प्रभावों पर चर्चा होगी
पांच दिनों की विदेश यात्र से लौटने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को कैबिनेट की अहम बैठक करने वाले हैं. मोदी मंत्रिपरिषद की बैठक आज शाम को पूरे 11 महीने बाद होने जा रही है. संभावित फेरबदल की अटकलों के बीच महत्वपूर्ण बैठक करीब 4-5 घंटे चलने की संभावना है. इस दौरान सुधारों को लेकर करीब एक दर्जन मंत्रालय प्रजेंटेशन देंगे. ऊर्जा, वित्त, रेलवे, वाणिज्य, श्रम, कृषि, वन एवं पर्यावरण, सड़क परिवहन, परमाणु ऊर्जा, डीपीआईआईटी आदि मंत्रालयों के सचिव प्रजेंटेशन देंगे. इससे पहले सभी मंत्रालय पिछले दो वर्षों में सुधारों के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी कैबिनेट सचिवालय को सौंप चुके हैं. ऐसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश के बाद किया गया था.
11 महीने बाद हो रही मोदी कैबिनेट की बैठक
सभी मंत्री अपने मंत्रालयों द्वारा सुधारों की दिशा में उठाए गए कदमों की जानकारी देंगे साथ ही यह भी बताएंगे कि आगे सुधार किस तरह किए जाएंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का महत्वपूर्ण मार्गदर्शन होगा, जिसमें सरकार के आने वाले एजेंडे के बारे में बताए जाने की संभावना है. बैठक में पश्चिम एशिया के युद्ध के मद्देनजर कई महत्वपूर्ण सुधार किए जाने की संभावना है. बता दें कि इससे पहले पिछले साल चार जून को मंत्रिपरिषद की बैठक हुई थी.
इस बैठक में केंद्र सरकार के सभी कैबिनेट मंत्रियों, राज्य मंत्रियों (स्वतंत्र प्रभार) और राज्य मंत्रियों मौजूद रहेंगे. इस बैठक में विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज, हाल ही में लिए गए नीतिगत फैसलों के परिणामों और भविष्य की योजनाओं की समीक्षा की जाएगी. हाल ही में पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के बाद हो रही इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा है.
सभी केंद्रीय मंत्री होंगे बैठक में शामिल
प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में सभी कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और अन्य राज्य मंत्री शामिल होंगे.बैठक में मिडिल ईस्ट के संकट और उसके कारण ऊर्जा, विमानन, कृषि और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों पर पड़ रहे आर्थिक प्रभाव को कम करने की रणनीतियों पर भी चर्चा होगी. मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलों के बीच, यह इस साल मंत्रिपरिषद की पहली बैठक होगी.
सूत्रों ने बताया कि बैठक में विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के कामकाज, हाल ही में लिए गए प्रमुख निर्णयों और उनके परिणामों तथा भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की जाएगी. सूत्रों ने बताया कि विभिन्न सरकारी योजनाओं एवं कार्यक्रमों के विभिन्न पहलुओं, उन्हें अधिकतम सफलता के लिए कैसे लागू किया जाए और अन्य विषयों की भी समीक्षा किए जाने की उम्मीद है.
मिडिल ईस्ट संकट पर होगी चर्चा
प्रधानमंत्री मिडिल ईस्ट में जारी संकट और उसके आर्थिक प्रभावों का जिक्र कर सकते हैं और मंत्रालयों एवं विभागों को नागरिकों को कम से कम असुविधा हो, इसके लिए आवश्यक दिशानिर्देश दे सकते हैं. सूत्रों के अनुसार, बैठक में ऊर्जा, कृषि, उर्वरक, विमानन, जहाजरानी और रसद जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है.
मिडिल ईस्ट संघर्ष शुरू होने के तुरंत बाद, मोदी ने सभी संबंधित मंत्रालयों को निर्देश दिया था कि नागरिकों और युद्ध के कारण प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं को दूर करने के लिए हरसंभव कदम उठाए जाएं. सूत्रों के मुताबिक, बैठक में आम जनता के लाभ के लिए सभी क्षेत्रों में सुधार लाने की सरकार की प्राथमिकता पर भी चर्चा होने की संभावना है.
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