मिडिल ईस्ट में गहराते युद्ध के संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज एक बड़ी इमरजेंसी बैठक बुलाई है. पीएम आवास पर जारी इस हाई-लेवल मीटिंग में सीनियर कैबिनेट मंत्रियों के साथ कच्चे तेल, गैस और फर्टिलाइजर की सप्लाई चेन की समीक्षा की जा रही है. सरकार का मुख्य फोकस युद्ध के बीच देश में ईंधन और बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है. इस उच्च स्तरीय बैठक में गृह मंत्री, वित्त मंत्री, विदेश मंत्री और पेट्रोलियम मंत्री सहित कई वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री और शीर्ष अधिकारी शामिल हैं.
13 कैबिनेट मंत्री बैठक में मौजूद
पीएम हाउस पर चल रही इस हाई लेवल मीटिंग में 13 कैबिनेट मंत्री भी मौजूद हैं. इसमें गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन, विदेश मंत्री एस जयशंकर, पीयूष गोयल, हरदीप सिंह पुरी, प्रह्लाद जोशी, अश्विनी वैष्णव, के राम मोहन नायडू, जे पी नड्डा, सर्वानंद सोनोवाल, मनोहर लाल खट्टर और शिवराज सिंह चौहान शामिल हैं. इसके अलावा बैठक में एनएसए अजीत डोभाल और पीएम के दोनों प्रिंसिपल सेक्रेटरी भी मौजूद हैं.
#WATCH | दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया के बदलते हालात को देखते हुए पेट्रोलियम, क्रूड, गैस, पावर और फर्टिलाइज़र सेक्टर से जुड़ी स्थिति की समीक्षा के लिए एक उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। pic.twitter.com/h0Fu9WW7hf
— ANI_HindiNews (@AHindinews) March 22, 2026
ईंधन और ऊर्जा आपूर्ति पर फोकस
बैठक का मुख्य उद्देश्य देश भर में निर्बाध आपूर्ति और कुशल वितरण सुनिश्चित करना है तथा सरकार इस दिशा में सक्रिय कदम उठा रही है. पीएम मोदी ने 12 मार्च को कहा था कि पश्चिम एशिया में युद्ध ने विश्वव्यापी ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है जो राष्ट्रीय चरित्र की एक गंभीर परीक्षा है और इससे शांति, धैर्य एवं लोगों में अधिक जागरूकता के जरिये निपटने की जरूरत है. प्रधानमंत्री ने कहा था कि उनकी सरकार अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं में उत्पन्न व्यवधानों से निपटने के लिए लगातार काम कर रही . मोदी ने कहा था, ‘यह पता लगाने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं कि आपूर्ति श्रृंखला में आए व्यवधानों से हम कैसे पार पा सकते हैं.'
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संघर्ष के बीच दुनिया के कई नेताओं से बात कर चुके हैं PM
प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से दुनिया के कई नेताओं से बात की है. संघर्ष शुरू होने के बाद से मोदी ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, फ्रांस, मलेशिया, इजराइल और ईरान के नेताओं से टेलीफोन पर बातचीत की है.
अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर 28 फरवरी को हमला किए जाने के बाद युद्ध की शुरुआत हुई. ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजराइल और खाड़ी क्षेत्र के अपने कई पड़ोसी देशों पर हमला किया. ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बाधित कर दिया है जो एक प्रमुख समुद्री मार्ग है और इसके जरिये दुनिया की 20 प्रतिशत ऊर्जा की ढुलाई होती है. संघर्ष शुरू होने के बाद से ईरान ने बहुत कम पोतों को इससे गुजरने की अनुमति दी है. इसके कारण भारत समेत कई देशों में ऊर्जा आपूर्ति में गंभीर व्यवधान पैदा हो गया है.
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