विज्ञापन

क्या देश में अनिवार्य होगा 'वर्क फ्रॉम होम'? PM मोदी की अपील पर सरकार ने दे दिया ये जवाब

प्रधानमंत्री मोदी ने केवल वर्क फ्रॉम होम की अपील की है.सूत्रों के मुताबिक, सरकार की तरफ से इसे अनिवार्य करने का कोई आधिकारिक या कानूनी आदेश जारी नहीं किया गया है.

क्या देश में अनिवार्य होगा 'वर्क फ्रॉम होम'? PM मोदी की अपील पर सरकार ने दे दिया ये जवाब

देशभर में ईंधन संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से कम पेट्रोल-डीजल इस्तेमाल करने की अपील की. उन्होंने दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम कल्चर को प्राथमिकता देने का आह्वान किया. इसके बाद वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य करने की खबरें सामने आईं. इस बीच सरकारी सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार कंपनियों या IT सेक्टर के लिए 'वर्क फ्रॉम होम' की कोई अनिवार्य नीति लाने पर विचार नहीं कर रही है.

सरकार ने वर्क फ्रॉम होम नहीं किया अनिवार्य

यह स्पष्टीकरण उन अटकलों के बाद आया है कि वैश्विक अनिश्चितता और ईंधन की कीमतों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच सरकार कंपनियों को बड़े पैमाने पर 'रिमोट वर्किंग'  की ओर धकेल सकती है. सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री की टिप्पणियों को गलत समझा जा रहा था और कुछ हलकों में उन्हें गलत तरीके से कड़े नियम के रूप में पेश किया जा रहा था. सूत्रों के अनुसार, सरकारी खर्च में कटौती करने, कल्याणकारी योजनाओं को कम करने या बुनियादी ढांचे में निवेश पर रोक लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं है.

सरकार का फोकस आर्थिक विकास को बनाए रखने पर है, साथ ही वह नागरिकों और कंपनियों को संसाधनों का अधिक सावधानी से उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है. 

प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में लोगों से अपील की थी कि वे अनावश्यक ईंधन की खपत कम करें, जहां संभव हो सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें और ऐसी स्थितियों में 'वर्क फ्रॉम होम' या वर्चुअल मीटिंग को अपनाएं जहां व्यक्तिगत रूप से यात्रा करने से बचा जा सकता हो. अधिकारियों ने कहा कि इस अपील को वैश्विक अनिश्चितता के दौर में, विशेष रूप से मिडिल ईस्ट में तनाव और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजारों में उतार-चढ़ाव के कारण, विवेकपूर्ण और जिम्मेदार खपत के आह्वान के रूप में देखा जाना चाहिए.

यह भी पढ़ें: बिहार में अब सरकारी और निजी दफ्तरों को Work From Home की सलाह, CM सम्राट चौधरी ने लागू किया नया 'पावर प्लान'

निवेश में कोई कटौती नहीं

सरकार सड़कों, रेलवे, रक्षा, बुनियादी ढांचे और कल्याणकारी कार्यक्रमों पर कैपिटल एक्सपेंडिचर को लगातार बनाए हुए है. अधिकारियों ने बताया कि सार्वजनिक निवेश में किसी भी तरह की कटौती या वापसी का कोई संकेत नहीं मिला है.

वहीं प्रधानमंत्री के संदेश को आंतरिक रूप से फिजूलखर्ची कम करने और ईंधन आयात और विदेशी मुद्रा के आउटफ्लो पर दबाव घटाने के एक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है. सूत्रों ने आगे कहा कि इसका उद्देश्य उत्पादकता या विकास को प्रभावित किए बिना, कार्यकुशलता और जिम्मेदार आर्थिक व्यवहार को प्रोत्साहित करना है.

कई कंपनियों ने भी परिचालन लागत और ईंधन के उपयोग को कम करने के लिए अपनी यात्रा नीतियों की समीक्षा करना और वर्चुअल मीटिंग को बढ़ावा देना शुरू कर दिया है. लेकिन अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ये उनके फैसले हैं और किसी भी सरकारी निर्देश का हिस्सा नहीं हैं. सूत्रों के अनुसार, सरकार का रुख यह है कि मौजूदा स्थिति में आर्थिक सावधानी और अधिक समझदारी भरी खपत की आवश्यकता है, न कि कड़ाई की.

यह भी पढ़ें: उत्तराखंड में 'नो व्हीकल डे': ईंधन बचत के लिए धामी कैब‍िनेट बैठक में'वर्क फ्रॉम होम' का भी एलान

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com