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1 hour ago
नई दिल्ली:

संसद का बजट सत्र अपने दूसरे चरण में प्रवेश करते ही तूफानी होता दिख रहा है. बुधवार को लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर होने वाली चर्चा के दौरान जबरदस्त हंगामे के आसार हैं. जानकारी के अनुसार, आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी इस बहस में हिस्सा ले सकते हैं.

118 सांसदों ने किया था प्रस्ताव पर हस्ताक्षर

विपक्ष ने फरवरी 2026 में ही यह अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था, जिस पर 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए थे. विपक्ष का आरोप है कि ओम बिरला ने लोकसभा में पक्षपातपूर्ण तरीके से कार्यवाही चलाई और कई मौकों पर विपक्षी नेताओं को बोलने का अवसर नहीं दिया.

सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि बिरला ने हमेशा संवैधानिक दायित्वों का पालन किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पहले साफ कर चुके हैं कि ओम बिरला ने सभी पक्षों को साथ लेकर चलने की कोशिश की है.

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कल भी तीखी नोकझोंक, आज फिर घमासान तय

मंगलवार को सदन में तीखी बहस हुई और बार-बार स्थगन के कारण कार्यवाही बाधित रही. विपक्ष ने सरकार पर स्पीकर को 'सरकार की आवाज' बनाने का आरोप लगाया, जबकि सरकार ने विपक्ष को नियमों की अनदेखी के लिए घेरा. कई विपक्षी सांसदों ने प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए, वहीं जगदंबिका पाल की अध्यक्षता में सदन को कई बार स्थगित करना पड़ा.

10 घंटे की बहस, फिर वोटिंग

लोकसभा सचिवालय के अनुसार प्रस्ताव पर 10 घंटे की चर्चा निर्धारित की गई है, जिसके बाद वोटिंग होगी. प्रस्ताव पारित कराने के लिए विपक्ष को साधारण बहुमत (Simple Majority) चाहिए. हालांकि एनडीए का स्पष्ट बहुमत देखते हुए इसे पारित कराना विपक्ष के लिए बेहद कठिन माना जा रहा है.
 

जयराम रमेश ने किरेन रिजिजू पर साधा निशाना

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने X पर लिखा- कल लोकसभा में अध्यक्ष को हटाने के प्रस्ताव पर हुई बहस में संसदीय कार्य मंत्री ने गर्व से दावा किया कि बहस के लिए 10 घंटे आवंटित किए गए हैं, जबकि दिसंबर 1954 में इसी तरह के प्रस्ताव के लिए केवल 2.5 घंटे ही निर्धारित किए गए थे. वे यह बताना भूल गए कि -

1. 18 दिसंबर 1954 को स्वयं प्रधानमंत्री बहस में उपस्थित थे और उन्होंने बहस में भाग लिया था.

2. 18 दिसंबर 1954 को बोलते हुए जवाहरलाल नेहरू ने सदन की अध्यक्षता कर रहे उपसभापति से अनुरोध किया था कि अधिकांश समय विपक्ष को आवंटित किया जाए.

3. जब 18 दिसंबर 1954 को लोकसभा में प्रस्ताव पेश किया गया था, तब 489 सांसदों वाले सदन में कांग्रेस के 364 सांसद थे.

4. 18 दिसंबर 1954 को (और बाद में 1966 और 1987 में भी) लोकसभा में अध्यक्ष के विरुद्ध प्रस्ताव पर बहस के दौरान उपाध्यक्ष अध्यक्ष की कुर्सी पर उपस्थित थे. मध्य वर्ष 2019 से लोकसभा में कोई उपाध्यक्ष नहीं है, जो संविधान का स्पष्ट उल्लंघन है.

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