- संसद का बजट सत्र 28 जनवरी 2026 से शुरू होकर लगभग 309 घंटे के काम के बाद शनिवार को संपन्न हुआ.
- राज्यसभा की कार्य-उत्पादकता इस सत्र में 109.87% रही जबकि लोकसभा की उत्पादकता 93% दर्ज की गई.
- महिला आरक्षण से जुड़े तीन बिलों पर कुल 21 घंटे 27 मिनट की बहस हुई लेकिन वे पारित नहीं हो सके.
संसद का बजट सत्र शनिवार को संपन्न हो गया. लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय के मुताबिक, 28 जनवरी 2026 से शुरू हुए संसद के इस सबसे अहम सत्र के दौरान दोनों सदनों में करीब 309 घंटे से कुछ ज्यादा काम हुआ. इस दौरान, राज्य सभा की कार्य-उत्पादकता 109.87% रही, जबकि लोक सभा की कार्य-उत्पादकता 93% रिकॉर्ड की गई.
कई मायनों में संसद का यह बजट सत्र बेहद अहम रहा. बजट सत्र के समापन पर लोक सभा स्पीकर ने कहा कि सत्र के दौरान लोकसभा में 12 सरकारी विधेयक पुन: स्थापित किए गए और 09 विधेयक पारित किए गए.
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सदन में पारित हो गए यह विधेयक
बजट सत्र के दौरान पारित किए गए कुछ महत्वपूर्ण विधेयक हैं:
- औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026
- उभयलिंगी व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026
- वित्त विधेयक, 2026
- दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026
- आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026
- जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक, 2026
- केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026
इन 3 बिलों पर रहा सबसे ज्यादा फोकस
इस सत्र के दौरान सबसे ज्यादा फोकस महिला आरक्षण को लागू करने से जुड़े 3 बिलों पर रहा:
- संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026;
- संघ राज्यक्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2026; और
- परिसीमन विधेयक, 2026!
इन 3 विधेयकों पर सदन में 16 और 17 अप्रैल को कुल 21 घंटे, 27 मिनट तक लम्बी चर्चा हुई. इस बड़ी बहस में 131 सांसदों ने भाग लिया. हालांकि संविधान संशोधन बिलों के समर्थन में दो-तिहाई समर्थन न मिलने की वजह से ये महत्वपूर्ण विधेयक पारित नहीं हो सके.
बेहतर रही राज्यसभा की प्रोडक्टिविटी
बजट सत्र के दौरान राज्य सभा की प्रोडक्टिविटी लोक सभा से काफी बेहतर रही. राज्य सभा चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन ने सत्र के समापन पर कहा, "कुल मिलाकर सदन कुल 157 घंटे 40 मिनट तक चला. इस सत्र की उत्पादकता 109.87 प्रतिशत रही. सत्र के दौरान, हमें 117 प्रश्न, 446 शून्यकाल प्रस्तुतियां और 207 विशेष उल्लेख उठाने का अवसर मिला".
राज्य सभा सचिवालय के मुताबिक, सदन में 94 मौकों पर सांसदों ने संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल 12 क्षेत्रीय भाषाओं में बात की, जबकि इस सत्र के दौरान लोक सभा में सांसदों ने 18 भारतीय भाषाओं में 181 वक्तव्य दिए और उनका साथ-साथ अनुवाद भी सफलतापूर्वक किया गया.
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