फरीदाबाद के सेक्टर-12 स्थित लघु सचिवालय के बाहर सड़क किनारे वाहनों से कथित तौर पर पार्किंग शुल्क वसूले जाने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है. आरोप है कि विभिन्न सरकारी कार्यों से लघु सचिवालय आने वाले लोगों से सड़क पर वाहन खड़ा करने के बदले मनमाने तरीके से पैसे लिए जा रहे हैं. खास बात यह है कि यह सब उस इलाके में होने का दावा किया जा रहा है, जहां प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस की लगातार मौजूदगी रहती है.
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वाहन चालकों का आरोप, शुल्क मांगने पर होता है विवाद
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क किनारे वाहन खड़ा करने के बाद कुछ लोग पार्किंग शुल्क की मांग करते हैं. कई वाहन चालकों का आरोप है कि जब वे शुल्क के बारे में जानकारी मांगते हैं या भुगतान करने से इनकार करते हैं, तो बहस और विवाद की स्थिति पैदा हो जाती है. इससे आम लोगों में नाराजगी बढ़ रही है.
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न बोर्ड, न रेट लिस्ट, फिर किस आधार पर वसूली?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस स्थान पर कथित तौर पर पार्किंग शुल्क वसूला जा रहा है, वहां पार्किंग संचालक, अधिकृत एजेंसी, ठेकेदार या शुल्क दरों से जुड़ी कोई स्पष्ट जानकारी दिखाई नहीं देती. आमतौर पर अधिकृत पार्किंग स्थलों पर शुल्क, नियम और संचालक की जानकारी वाला बोर्ड लगाया जाता है, लेकिन यहां ऐसी व्यवस्था नजर नहीं आती.

अधिकृत पार्किंग है या नहीं, स्थिति स्पष्ट नहीं
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यह नगर निगम या किसी संबंधित विभाग की अधिकृत पार्किंग है, तो वहां पार्किंग शुल्क, ठेकेदार का नाम, अनुमति अवधि और नियमों की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जानी चाहिए. वहीं अगर पार्किंग अधिकृत नहीं है, तो सड़क पर वाहन खड़ा करवाकर शुल्क वसूले जाने की अनुमति किसने दी, यह भी बड़ा सवाल है.
सड़क को ही बना दिया गया कथित पार्किंग स्थल
लघु सचिवालय के चारों ओर सड़क किनारे वाहनों की लंबी कतारें अक्सर देखी जा सकती हैं. आरोप है कि सड़क के एक हिस्से को ही पार्किंग की तरह इस्तेमाल कर वाहन चालकों से पैसे वसूले जा रहे हैं. इससे न केवल वाहन चालकों को परेशानी होती है, बल्कि यातायात व्यवस्था भी प्रभावित होती है.

आम नागरिकों पर बढ़ रहा अतिरिक्त बोझ
सरकारी दफ्तरों में जरूरी कार्यों के लिए आने वाले लोग पहले ही पार्किंग की समस्या से जूझते हैं. ऐसे में सड़क किनारे वाहन खड़ा करने के लिए भी शुल्क चुकाने की मजबूरी और भुगतान न करने पर विवाद की स्थिति आम नागरिकों की परेशानी को और बढ़ा रही है.
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सेंट्रल थाने के आसपास भी उठ रहे सवाल
लघु सचिवालय के नजदीक ही सेंट्रल थाना मौजूद है. इसके बावजूद थाने के बाहर और आसपास सड़क किनारे बड़ी संख्या में वाहन खड़े होने और कथित पार्किंग शुल्क वसूले जाने को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यह गतिविधि लंबे समय से चल रही है, तो संबंधित विभागों और पुलिस की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ी?

अधिकारियों की नाक के नीचे चल रहा कथित खेल
जिस इलाके में जिला प्रशासन के महत्वपूर्ण कार्यालय और वरिष्ठ अधिकारियों के दफ्तर स्थित हैं, वहां पार्किंग के नाम पर कथित वसूली के आरोप प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि सार्वजनिक सड़क पर वाहन खड़ा करवाकर शुल्क लेने की वैधता की जांच संबंधित विभागों को करनी चाहिए.
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पार्किंग के नाम पर दबंगई के भी आरोप
कुछ वाहन चालकों का आरोप है कि शुल्क न देने पर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है और कई बार मामला कहासुनी तक पहुंच जाता है. उनका कहना है कि किसी भी अधिकृत पार्किंग में निर्धारित शुल्क, रसीद और स्पष्ट नियम होने चाहिए. बिना किसी आधिकारिक जानकारी के शुल्क वसूला जाना लोगों के संदेह को बढ़ाता है.
लघु सचिवालय जैसे महत्वपूर्ण सरकारी परिसर के बाहर कथित अवैध पार्किंग वसूली के आरोपों ने नगर निगम, पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. लोगों का कहना है कि सड़कें किसी की निजी संपत्ति नहीं हैं और यदि किसी स्थान पर पार्किंग की अनुमति है तो उसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए. अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन मामले की जांच कर स्थिति स्पष्ट करता है या फिर सड़क किनारे पार्किंग के नाम पर कथित वसूली के ये आरोप यूं ही चर्चा का विषय बने रहते हैं.
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