- दिल्ली-NCR में पार्किंग की समस्या गंभीर है, जहां अवैध पार्किंग माफिया मनमर्जी करते हैं.
- नोएडा सेक्टर-18 की अधिकृत पार्किंग में सूचना बोर्ड पर जरूरी जानकारियां जैसे कंपनी का नाम और क्षेत्रफल नहीं थे.
- सेक्टर-63 में निर्धारित पार्किंग नहीं होने के कारण सड़क किनारे वाहनों की कतार लगी रहती है.
दिल्ली-NCR में पार्किंग एक बड़ी समस्या है. इस समस्या से लाखों लोगों को हर रोज दो-चार होना पड़ता है. प्रशासन द्वारा पार्किंग की जगह तय किए जाने के बाद भी कई जगह अवैध पार्किंग माफिया भी उठ खड़े हुए हैं. जो भरपूर मनमर्जी भी करते हैं. यूं तो नोएडा में पार्किंग व्यवस्था को लेकर नियम तय हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कई सवाल खड़े कर रही है. कहीं अधिकृत पार्किंग में ही नोएडा अथॉरिटी के निर्धारित नियमों का पूरी तरह पालन होता नहीं दिख रहा, तो कहीं सड़क के एक हिस्से को ही लोगों ने पार्किंग में तब्दील कर दिया है. नोएडा के सेक्टर-18, 63, 98 और 104 में पार्किंग व्यवस्था की तस्वीर अलग-अलग थी, मगर नियमों के पालन पर हर जगह सवाल उठते दिखे.
(दिल्ली-एनसीआर में आप गाड़ी लेकर कहीं भी जाएं,…मार्केट, कॉमर्शियल बिल्डिंग, ऐतिहासिक स्थल, मंदिर, बड़े पार्क या फिर रेस्टोरेंट, वहां पहुंचते ही सबसे पहले जो व्यक्ति आपसे मुखातिब होता है वो है पार्किंग की पर्ची काटता कर्मचारी. कई जगहों पर ये कर्मचारी नगर निगम या विकास प्राधिकरणों द्वारा अधिकृत भी होते हैं लेकिन राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के जिलों की अधिकतर जगहों पर पार्किंग शुल्क के नाम पर पर्ची माफिया काम कर रहा है. ये वो लोग हैं जिन्हें ना तो किसी ने पार्किंग के लिए अधिकृत किया है और ना ही जिस जगह पर ये गाड़ियां पार्क करवाकर पैसे वसूलते हैं वहां पार्किंग का कोई शुल्क तय है. अगर आप इनसे सवाल-जवाब करें या पैसे देने से मना करें तो दबंगई दिखाने को भी ये तैयार रहते हैं. ndtv.in ऐसे ही पार्किंग माफिया के खिलाफ चला रहा है मुहिम. इस सीरीज की दूसरी किस्त में पढ़िए, नोएडा के अलग अलग सेक्टरों में कैसे चल रहा है अवैध पार्किंग का खेल.)

सेक्टर-18: बोर्ड लगा, लेकिन जरूरी जानकारियां गायब
नोएडा अथॉरिटी के नियमों के मुताबिक पार्किंग के एंट्री और एग्जिट गेट पर सूचना बोर्ड लगाना अनिवार्य है. इस बोर्ड पर पार्किंग से जुड़ी जरूरी जानकारियां दर्ज होनी चाहिए. इनमें पार्किंग संचालन का टेंडर किस कंपनी के पास है, पार्किंग का निर्धारित क्षेत्रफल कितना है और शिकायत या सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर जैसी जानकारियां शामिल हैं.
सेक्टर-18 की अधिकृत पार्किंग में एंट्री और एग्जिट पर बोर्ड तो लगा दिखाई दिया, लेकिन उस पर कई अहम जानकारियां मौजूद नहीं थीं. बोर्ड पर न तो पार्किंग का क्षेत्रफल दर्ज था और न ही पार्किंग संचालित करने वाली कंपनी का नाम स्पष्ट रूप से दिया गया था.

हेल्पलाइन का जिक्र, लेकिन नंबर ही नहीं
सबसे दिलचस्प स्थिति हेल्पलाइन नंबर को लेकर दिखी. बोर्ड पर हेल्पलाइन नंबर का उल्लेख तो किया गया है, लेकिन उसके आगे वास्तविक नंबर ही दर्ज नहीं है. ऐसे में अगर किसी वाहन चालक को पार्किंग से संबंधित शिकायत करनी हो या किसी तरह की सहायता चाहिए तो वह किससे संपर्क करे, यह स्पष्ट नहीं है.
पार्किंग में मौजूद कर्मचारी से जब संचालन करने वाली कंपनी का नाम पूछा गया तो वह भी कंपनी का नाम नहीं बता सका. इससे पार्किंग संचालन में पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े होते हैं.

सेक्टर-63 में सड़क किनारे वाहनों की कतार
सेक्टर-18 से अलग तस्वीर सेक्टर-63 के डी ब्लॉक में देखने को मिली. यहां निर्धारित पार्किंग नहीं होने के बावजूद सड़क किनारे बड़ी संख्या में वाहन खड़े नजर आए. अलग-अलग कंपनियों और दफ्तरों के बाहर सड़क का इस्तेमाल पार्किंग के तौर पर किया जा रहा है.
कई जगह वाहनों की कतार के कारण सड़क का करीब आधा हिस्सा घिरा हुआ दिखाई दिया. यानी जिस सड़क का इस्तेमाल वाहनों की आवाजाही के लिए होना चाहिए, उसका एक बड़ा हिस्सा पार्किंग में तब्दील हो गया है. इससे न केवल यातायात प्रभावित होने की आशंका रहती है, बल्कि व्यस्त समय में जाम की समस्या भी बढ़ सकती है.

सेक्टर-98: ‘नो पार्किंग' बोर्ड के नीचे ही खड़ी गाड़ियां
पार्किंग नियमों की अनदेखी की एक और तस्वीर सेक्टर-98 से सामने आई. यहां सड़क किनारे स्पष्ट रूप से ‘नो पार्किंग' का बोर्ड लगा है, लेकिन उसी बोर्ड के नीचे और आसपास कई वाहन पार्क किए हुए दिखाई दिए.
यानी जिस जगह वाहन खड़ा नहीं करने का निर्देश बोर्ड के जरिए दिया गया है, उसी स्थान का इस्तेमाल पार्किंग के लिए किया जा रहा है. यह तस्वीर शहर में पार्किंग नियमों के पालन और उनकी निगरानी पर सवाल खड़े करती है.

सेक्टर-104: साइकिल स्टैंड के सामने कारें
सेक्टर-104 में स्थिति और भी अव्यवस्थित नजर आई. यहां लोग साइकिल स्टैंड के सामने ही अपनी गाड़ियां पार्क कर रहे हैं. इसके अलावा सड़क पर लगे ‘नो पार्किंग' बोर्ड के सामने भी लाइन से वाहन खड़े दिखाई दिए.
इन इलाकों में अधिकृत पार्किंग नहीं होने के बावजूद जहां-तहां वाहन खड़े किए जाने से सड़क की उपलब्ध जगह कम हो रही है. साथ ही साइकिल स्टैंड जैसी निर्धारित सुविधाओं तक पहुंच भी प्रभावित हो सकती है.

नियम हैं, लेकिन जमीन पर पालन कितना?
नोएडा के अलग-अलग सेक्टरों से सामने आई ये तस्वीरें पार्किंग व्यवस्था के दो अलग पहलुओं की ओर इशारा करती हैं. एक तरफ अधिकृत पार्किंग में सूचना बोर्ड होने के बावजूद जरूरी जानकारियां गायब हैं, वहीं दूसरी तरफ कई स्थानों पर सड़क किनारे और ‘नो पार्किंग' क्षेत्र में वाहन खड़े किए जा रहे हैं.
ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि पार्किंग के लिए बनाए गए नियमों का पालन सुनिश्चित कराने और सड़कों पर बेतरतीब पार्किंग रोकने के लिए जिम्मेदार एजेंसियों की निगरानी कितनी प्रभावी है.
अगर आप भी हैं पार्किंग माफिया के शिकार तो अपनी शिकायत, सुझाव हमें मेल करें- edit.blogs@ndtv.com
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