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आतंक का चेहरा, किश्तवार के जंगलों में दिखा जैश कमांडर सैफुल्लाह और आदिल, कार्रवाई के बाद भागा फिर रहा

आतंकी सैफुल्लाह एक साल से अधिक समय से किश्तवार में सक्रिय है और उसे स्थानीय समर्थन मिल रहा था. सुरक्षा एजेंसियां फिलहाल ओवरग्राउंड नेटवर्क को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने के लिए अभियान चला रही हैं.

आतंक का चेहरा, किश्तवार के जंगलों में दिखा जैश कमांडर सैफुल्लाह और आदिल, कार्रवाई के बाद भागा फिर रहा
  • पाकिस्तानी मूल का जैश कमांडर सैफुल्लाह और उसका डिप्टी आदिल पिछले दो साल से किश्तवार के जंगलों में सक्रिय है
  • किश्तवार के पहाड़ों में एक गुप्त फोर्टिफाइड बंकर को सुरक्षा बलों ने ध्वस्त किया जिसमें सैफुल्लाह छिपा था
  • जांच एजेंसियां स्थानीय समर्थन देने वाले नेटवर्क को खत्म करने के लिए लगातार अभियान चला रही हैं
किश्तवार (जम्मू-कश्मीर):

पाकिस्तानी मूल का जैश कमांडर सैफुल्लाह अपने डिप्टी आदिल और अन्य जैश आतंकवादियों के साथ किश्तवार के जंगलों में घूमता हुआ दिखा है. उसकी कई तस्वीरें कैमरे में कैद हुई हैं. सैफुल्लाह और आदिल पिछले दो सालों से किश्तवार में सक्रिय है. ये तस्वीरें किश्तवार की पहाड़ियों में आतंकवादियों को खदेड़ने के लिए चलाए गए अभियान से कुछ सप्ताह पहले शूट की गई हैं.

दो दिन पहले ही किश्तवाड़ के पहाड़ों में सुरक्षा बलों ने जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों का एक बेहद मजबूत और गुप्त कारगिल‑स्टाइल फोर्टिफाइड बंकर ध्वस्त किया था. 12,000 फीट की ऊंचाई पर बने इस ठिकाने में जैश का पाकिस्तानी मूल का कमांडर सैफुल्लाह और उसका सहयोगी आदिल महीनों तक छिपा हुई था. अंदर मिले सामानों से आतंकियों की लंबी योजना का खुलासा हुआ है.

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इस दौरान जब सुरक्षा बलों ने बंकर को घेर लिया, तो आतंकियों ने ग्रेनेड फेंककर जवाब दिया, जिसमें सात जवान घायल हो गए. हालांकि बाद में हवलदार गजेंद्र सिंह ने दम तोड़ दिया. वहीं हमले के बाद सैफुल्लाह और आदिल अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहा.

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इस गुफा से कई पैकेट मैगी, चावल, आलू-टमाटर, मसाले, अनाज, कुकिंग गैस सिलेंडर और सूखी लकड़ियां मिली. इससे पता चलता है कि आतंकियों का यहीं महीनों रहने का प्लान था और ऑपरेशन चलाने की मंशा थी. साफ अंदेशा है कि इतनी ऊंचाई और दुर्गम इलाके में इतने बड़े पैमाने पर राशन, मसाले और ईंधन पहुंचाना स्थानीय समर्थन के बिना संभव नहीं था. जांच एजेंसियां अब उन लोगों को तलाश रही है, जिन्होंने आतंकियों की इसमें मदद की है.
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आतंकियों के नेटवर्क को खत्म करने के लिए सुरक्षा एजेंसियां चला रही अभियान

अधिकारियों के मुताबिक, आतंकी सैफुल्लाह एक साल से अधिक समय से इसी इलाके में सक्रिय था और उसे स्थानीय समर्थन मिल रहा था. बंकर इतनी चालाकी से बनाया गया था कि ऊपर से देखने पर कोई अंदाजा नहीं लग सकता था कि नीचे आराम से रहने की पूरी जगह है. आतंकी इस क्षेत्र को लंबे समय तक अपना ठिकाना बनाए रखने की योजना में थे. सुरक्षा एजेंसियां फिलहाल ओवरग्राउंड नेटवर्क को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने के लिए अभियान चला रही हैं.

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Pradeep Dutta
Consulting Editor
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