- दिमागी नक्सली वाले मुद्दे पर देश में सियासत जारी है. विपक्ष के कई नेताओं ने खुद को दिमागी नक्सली बताया है.
- पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने खुद को दिमागी नक्सली बताया है.
- इससे पहले रविवार केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मामले पर पोस्ट किया था.
नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए 'दिमागी नक्सली' मुद्दे पर बड़ा बयान दिया था. जिसके बाद इस मुद्दे पर देश में सियासी घमासान दिख रहा है. पूर्व केंद्रीय मंत्री पी.चिदंबरम और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती जैसे सीनियर नेताओं ने खुद को 'दिमागी नक्सली' बताया है. जबकि किरेन रिजिजू ने कहा था कि दिमागी नक्सली वही है जो संविधान को नहीं मानते हैं.
पी. चिदंबरम ने दिया था बयान
पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने 16 अगस्त को कहा था 'विपक्ष का मानना है कि सरकार अपनी नीतियों पर सवाल उठाने वाले हर बुद्धिजीवी, पत्रकार और नेता को 'अर्बन नक्सल' या 'दिमागी नक्सल' कहकर बदनाम करना चाहती है.
महबूबा मुफ्ती ने भी दिया बयान
पीडीपी अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी इस मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा 'कि वह राज्य में अनुच्छेद 370 की बहाली का समर्थन करती हैं, इसलिए रिजिजू और उनकी सरकार की परिभाषा के हिसाब से वह भी एक 'दिमागी नक्सल' हैं. इसके साथ ही आरजेडी सांसद मनोज झा, टीएमसी के कीर्ति आजाद और कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने भी किरेन रिजिजू के बयानों पर पलटवार किया था.
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Very unfortunate & highly damaging statement by respected former Home Minister of India.
— Kiren Rijiju (@KirenRijiju) August 16, 2026
PM @narendramodi ji didn't say opposition leaders are Dimagi Naxals. Only following are Dimagi Naxals:
1. Who support Maoists and reject Indian Constitution.
2. Who stand with separatists… https://t.co/QUIlmlEQZC
किरेन रिजिजू ने रविवार को दिया था बयान
दरअसल, पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर दिए भाषण में 'दिमागी नक्सली' वाली टिप्पणी की थी. जिस पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए इस मामले में स्पष्टीकरण दिया था. उन्होंने लिखा 'दिमागी नक्सल' वे लोग हैं जो परदे के पीछे रहकर माओवादियों की हिंसक विचारधारा का समर्थन करते हैं और देश के संविधान को नहीं मानते. अलगाववादियों के साथ खड़े होते हैं और अनुच्छेद 370 का समर्थन करते हैं, उत्तर-पूर्व को भारत से अलग करने के लिए 'चिकन नेक' को काटना चाहते हैं.' किरेन रिजिजू के इसी बयान के बाद विपक्षी नेताओं ने बयान दिए थे.
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