- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के एक कॉलेज में युवाओं को संबोधित किया.
- इस दौरान उन्होंने एक बार फिर 'दिमागी नक्सल' का जिक्र किया है.
- 'होम्योपैथिक दवा से छटपटाकर सब दिमागी नक्सली बाहर आ गए.'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली श्रीराम कॉलेज में युवाओं को संबोधित करते हुए एक बार फिर'दिमागी नक्सली' के बहाने विपक्ष पर निशाना साधा. उन्होंने 48 मिनट तक जेन-जी छात्रों के साथ सीधा संवाद किया. इस दौरान उन्होंने अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण का जिक्र करते हुए 'दिमागी नक्सल' के मुद्दे पर विपक्ष को आड़े हाथों लिया. पीएम मोदी ने दिमागी नक्सलियों की तुलना होम्योपैथिक दवा से की है. प्रधानमंत्री ने कहा इस शब्द ने एक होम्योपैथिक गोली की तरह काम किया है, जिसने आलोचकों को अपना असली रंग दिखाने के लिए मजबूर कर दिया है.
पीएम मोदी ने-छटपटाकर सब बाहर आ गए
पीएम मोदी ने कहा 'जैसे होम्योपैथी इलाज की खासियत होती है कि वह बीमारी को कुछ समय के लिए और उभार देता है और उसके बाद उसका जड़ से इलाज शुरू करता है, ठीक वैसे ही जैसे ही मैंने 'दिमागी नक्सल' वाली होम्योपैथी की गोली दी. देश के सारे दिमागी नक्सल छटपटाकर एक-एक करके बाहर आने लगे हैं. अब देश की जनता उनका असली रंग और इस बीमारी को बढ़ावा देने वालों का असली चेहरा साफ-साफ देख रही है. पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि देश ने जंगलों में सक्रिय सशस्त्र नक्सलवाद को तो लगभग खत्म कर दिया है, लेकिन देश की नीतियों और विकास को बाधित करने वाले ये 'दिमागी नक्सली' अब भी युवाओं को गुमराह करने की ताक में रहते हैं.
केदारनाथ आपदा का किया जिक्र
प्रधानमंत्री के संबोधन ने जनरेशन-जेड (Gen-Z) के युवाओं तक अपनी पहुंच बनाते हुए एक विकसित राष्ट्र के लिए एक आकांक्षी दृष्टिकोण की रूपरेखा तैयार करने का संदेश दिया. उदाहरण के तौर पर पीएम मोदी ने उन संकटों का हवाला दिया जिनसे उनकी सरकार पार पा चुकी है और छात्रों से अतीत पर विचार करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा मैंने आपको बहुत सी बातें बताई हैं. कुछ लोग सोच सकते हैं, यह क्या है? यह 140 करोड़ लोगों का देश है. यह बहुत आसान था. मोदी ने क्या नया किया? लेकिन क्या यह वास्तव में इतना आसान था? मैं आपको एक बार फिर पुराने दिनों में वापस ले जाना चाहता हूं. पिछली राष्ट्रीय आपात स्थितियों से निपटने के तरीकों की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा. याद कीजिए जब आप स्कूल में थे, तब 2013 में केदारनाथ में एक आपदा आई थी. पूरी सरकार हिल गई थी. उन्हें समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए या कैसे प्रतिक्रिया दी जाए.'
सरकार चुनौतियों का सामना करती है
अपनी सरकार के सामने आई चुनौतियों और उनका डटकर सामना करने के तरीके का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा 'सबसे पहले कोविड-19 महामारी आई, जिसने पूरी दुनिया की रफ्तार रोक दी. फिर रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध छिड़ गया. इसके बाद एक ऐसा दौर आया जब व्यापार और सप्लाई चेन को हथियार बनाया जाने लगा. फिर पश्चिम एशिया में संकट आया. हर बार लोगों ने कहा अब भारत नहीं बचेगा. जो मेरे आलोचक हैं, वे यह सोचकर खुश थे कि 'अब मोदी फंस गया है, अब मोदी गिर गया है. अब वे उसे कुचल देंगे. लेकिन मेरे देश के लोगों के आशीर्वाद में इतनी ताकत है कि भारत को विफल देखने वालों की हर मुराद अधूरी रह जा रही है.
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